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Delhi : लकड़ी के सुंदर अक्षरों में पिरोई बाइबिल, बस्तर की खास कला में माहिर हैं अजय मंडावी, मिलना है पद्मश्री
Wed, 05 Apr 2023 06:24 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2023 06:24 AM IST
सार
उनकी ख्याति अब देश की सीमाओं के पार भी जा चुकी है। उन्होंने 40 फुट ऊंची, 22 फुट चौड़ी लकड़ी की पट्टिका पर वंदेमातरम की कृति बनाई, ये कलाकृति गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। वहीं उन्होंने अब पूरी बाइबिल लकड़ी के सुंदर अक्षरों में पिरो दी है, जिसकी चर्चा फिर से दुनियाभर में हो रही है।
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अजय कुमार मंडावी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकार अजय मंडावी की नक्काशी का मुरीद आज सारा देश है। लेकिन उनकी ख्याति अब देश की सीमाओं के पार भी जा चुकी है। उन्होंने 40 फुट ऊंची, 22 फुट चौड़ी लकड़ी की पट्टिका पर वंदेमातरम की कृति बनाई, ये कलाकृति गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। वहीं उन्होंने अब पूरी बाइबिल लकड़ी के सुंदर अक्षरों में पिरो दी है, जिसकी चर्चा फिर से दुनियाभर में हो रही है।
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कांकेर जिले के रहने वाले आदिवासी कलाकार अजय मंडावी का नाम पद्मश्री पाने वालों की सूची में शामिल है। उन्हें पांच अप्रैल को ये सम्मान दिया जाएगा। अजय मंडावी बचपन से वुडन आर्ट (काष्ठकला) का काम कर रहे हैं। वर्तमान में वो जिला जेल कांकेर में बंद कैदियों को काष्ठ कला का प्रशिक्षण देते हैं। अपनी कला के जरिए वो बहुत सी कलाकृतियां तैयार कर चुके हैं। उन्हें बस्तर की खास कला में महारत हासिल है। लकड़ी पर उनकी छेनी गजब की चलती है।
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अजय मंडावी ने बताया कि लकड़ी पर कुरेदकर कलाकृति बनाना आसान नहीं है। लकड़ी पर एक-एक अक्षर को आकार देना पड़ता है, फिर उसे काष्ठ पट्टिका पर चिपकाया जाता है। वह यह कला जेल में बंद कैदियों को भी सिखा रहे है। इन कैदियों में नक्सल समूह में रहे लोग ही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें उनके काम के लिए 2006 में राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। अब उन्हें पद्म पुरस्कार मिल रहा है, जिसके लिए वे बेहद खुश हैं।
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