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Noida News: कठुआ के राजबाग में बनेगी प्रदेश की पहली क्षेत्रीय सीमन लैब
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कठुआ जिले के राजबाग में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक क्षेत्रीय सीमन लैब खुलेगी। नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के तहत इस पर लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका उद्देश्य विशेष रूप से बीटल नस्ल के बकरों को प्रजनन के लिए वैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाना है। यह प्रयोगशाला प्रदेश में पशुधन के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
इस परियोजना के तहत बकरों के सीमन को आधुनिक तकनीक से फ्रीज और संरक्षित किया जाएगा। इसके बाद इसका कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से प्रजनन के लिए उपयोग किया जाएगा। यह पहल जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों में बेहतर नस्ल के बकरे तैयार करने में मदद करेगी। इससे स्थानीय पशु पालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राजबाग में भेड़ और बकरी पालन केंद्र के अधिकारी मोहम्मद काजी ने बताया कि बीटल नस्ल उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता और अनुकूलनशीलता के लिए जानी जाती है। क्षेत्रीय सीमन लैब इसी बीटल नस्ल को केंद्र में रखकर खोली जा रही है। बता दें कि वर्तमान में राजबाग में पशुपालन विभाग का भेड़ और बकरी पालन केंद्र है। इस केंद्र की क्षमता को बढ़ाए जाने को लेकर पहले ही प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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इस परियोजना के तहत पशुपालकों को प्रशिक्षण देने, सीमन वितरण की व्यवस्था करने और क्षेत्रीय स्तर पर प्रजनन सेवाओं को सुलभ बनाने की योजना है। इससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पशुधन सुधार की पहुंच सुनिश्चित होगी।
मॉडल बनकर उभरेगा कठुआ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अत्याधुनिक लैब न केवल स्थानीय पशुधन की गुणवत्ता में सुधार करेगी बल्कि एक वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली की स्थापना के माध्यम से पूरे क्षेत्र में नस्ल सुधार की प्रक्रिया को भी गति देगी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लैब खुलने से कठुआ जिला पशुधन विकास के क्षेत्र में एक मॉडल बनकर उभरेगा।
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इस परियोजना के तहत बकरों के सीमन को आधुनिक तकनीक से फ्रीज और संरक्षित किया जाएगा। इसके बाद इसका कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से प्रजनन के लिए उपयोग किया जाएगा। यह पहल जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों में बेहतर नस्ल के बकरे तैयार करने में मदद करेगी। इससे स्थानीय पशु पालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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राजबाग में भेड़ और बकरी पालन केंद्र के अधिकारी मोहम्मद काजी ने बताया कि बीटल नस्ल उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता और अनुकूलनशीलता के लिए जानी जाती है। क्षेत्रीय सीमन लैब इसी बीटल नस्ल को केंद्र में रखकर खोली जा रही है। बता दें कि वर्तमान में राजबाग में पशुपालन विभाग का भेड़ और बकरी पालन केंद्र है। इस केंद्र की क्षमता को बढ़ाए जाने को लेकर पहले ही प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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इस परियोजना के तहत पशुपालकों को प्रशिक्षण देने, सीमन वितरण की व्यवस्था करने और क्षेत्रीय स्तर पर प्रजनन सेवाओं को सुलभ बनाने की योजना है। इससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पशुधन सुधार की पहुंच सुनिश्चित होगी।
मॉडल बनकर उभरेगा कठुआ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अत्याधुनिक लैब न केवल स्थानीय पशुधन की गुणवत्ता में सुधार करेगी बल्कि एक वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली की स्थापना के माध्यम से पूरे क्षेत्र में नस्ल सुधार की प्रक्रिया को भी गति देगी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लैब खुलने से कठुआ जिला पशुधन विकास के क्षेत्र में एक मॉडल बनकर उभरेगा।