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Noida News: नियम है...नो पीयूसीसी, नो फ्यूल और सड़कों पर धुआं उड़ाते दौड़ रहे वाहन
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-फोटो
- 10 हजार रुपये का होता है बिना पीयूसीसी वाले वाहनों का चालान, एप पर दर्ज किए नंबर का रिकार्ड परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस के पास नहीं जा रहा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान के लिए व्यवस्था तो बनाई गई है, लेकिन इसका अपेक्षित असर नजर नहीं आ रहा है। पेट्रोल पंपों पर ऐसे वाहन रोजाना पहुंच रहे हैं, जिनका पीयूसीसी समाप्त हो चुका है। इन वाहन चालकों को पीयूसीसी जांच कराने के बाद ही ईंधन लेने की हिदायत दी जा रही है, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। इसके कारण स्थिति अब भी पहले जैसी बनी हुई है।
नो पीयूसीसी, नो फ्यूल व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे वाहनों की पहचान करना है, जो निर्धारित मानक से अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं। पेट्रोल पंपों पर तैनात ऑपरेटर रोजाना कई ऐसे वाहनों की पहचान कर रहे हैं, जिनकी पीयूसीसी की अवधि समाप्त हो चुकी है और इसके बावजूद वे सड़कों पर चल रहे हैं। इन वाहनों का डाटा एप पर दर्ज होने के बाद भी उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे व्यवस्था का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
बिना पीयूसीसी वाहन पर 10 हजार रुपये जुर्मानाः बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के सड़क पर चलते पाए जाने वाले वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई का प्रावधान है। इसके लिए 10 हजार रुपये तक का जुर्माना निर्धारित है। ऐसे वाहनों की पहचान के बाद कार्रवाई होने से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम की जा सकती है। पंप संचालकों का कहना है कि केवल पीयूसीसी जांच कराने की हिदायत देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
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बिना पीयूसीसी वाले वाहन अगर सड़क पर चलते मिल रहे हैं तो उन पर कार्रवाई की जा रही है। पेट्रोल पंप पर पहुंचने वाले ऐसे वाहन चालकों को पीयूसीसी कराने के लिए कहा जा रहा है। -नंद कुमार, एआरटीओ प्रशासन
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- 10 हजार रुपये का होता है बिना पीयूसीसी वाले वाहनों का चालान, एप पर दर्ज किए नंबर का रिकार्ड परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस के पास नहीं जा रहा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान के लिए व्यवस्था तो बनाई गई है, लेकिन इसका अपेक्षित असर नजर नहीं आ रहा है। पेट्रोल पंपों पर ऐसे वाहन रोजाना पहुंच रहे हैं, जिनका पीयूसीसी समाप्त हो चुका है। इन वाहन चालकों को पीयूसीसी जांच कराने के बाद ही ईंधन लेने की हिदायत दी जा रही है, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। इसके कारण स्थिति अब भी पहले जैसी बनी हुई है।
नो पीयूसीसी, नो फ्यूल व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे वाहनों की पहचान करना है, जो निर्धारित मानक से अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं। पेट्रोल पंपों पर तैनात ऑपरेटर रोजाना कई ऐसे वाहनों की पहचान कर रहे हैं, जिनकी पीयूसीसी की अवधि समाप्त हो चुकी है और इसके बावजूद वे सड़कों पर चल रहे हैं। इन वाहनों का डाटा एप पर दर्ज होने के बाद भी उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे व्यवस्था का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
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बिना पीयूसीसी वाहन पर 10 हजार रुपये जुर्मानाः बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के सड़क पर चलते पाए जाने वाले वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई का प्रावधान है। इसके लिए 10 हजार रुपये तक का जुर्माना निर्धारित है। ऐसे वाहनों की पहचान के बाद कार्रवाई होने से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम की जा सकती है। पंप संचालकों का कहना है कि केवल पीयूसीसी जांच कराने की हिदायत देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
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बिना पीयूसीसी वाले वाहन अगर सड़क पर चलते मिल रहे हैं तो उन पर कार्रवाई की जा रही है। पेट्रोल पंप पर पहुंचने वाले ऐसे वाहन चालकों को पीयूसीसी कराने के लिए कहा जा रहा है। -नंद कुमार, एआरटीओ प्रशासन