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Noida News: इलाज के लिए सहना पड़ रहा इंतजार का दर्द
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फोटो
इलाज के लिए सहना पड़ रहा इंतजार का दर्द
सेक्टर-39 जिला अस्पताल : लाइन में घंटों गुजार रहे मरीजों का हाल बेहाल, टोकन व्यवस्था भी फेल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए इंतजार का दर्द सहना पड़ रहा है। लाइन में घंटों गुजारने के बाद मरीज बेहाल हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। सोमवार को दो हजार से अधिक मरीजों की भीड़ के आगे यह व्यवस्था भी फेल हो गई।
मरीजों के साथ तीमारदारों के सेक्टर-39 जिला अस्पताल में जुटने से पांच सौ करोड़ की इमारत में उपलब्ध सुविधाएं कम पड़ती दिख रही हैं। पहले टोकन के लिए मरीजों को लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। इसके बाद ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श के लिए लाइन में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। डॉक्टर के पर्चे पर लिखी दवाओं के लिए फार्मेसी पर भी लंबी कतार में लगने के बाद मरीज स्वस्थ होने की जगह बीमार हो रहे हैं।
सोमवार को अस्पताल की ओपीडी से लेकर फार्मेसी और जांच केंद्रों तक अव्यवस्था दिखाई दी। दो हजार से अधिक मरीज ओपीडी में डॉक्टरों से परामर्श के लिए पहुंचे। अस्पताल की पैथोलॉजी लैब से लेकर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सेंटर में भी कतार में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि मरीजों की भीड़ बढ़ने से कुछ दिक्कतें तो होंगी ही। व्यवस्था में सुधार का प्रयास किया जा रहा है।
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नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ काट रहा पर्ची
नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ का काम मरीजों के उपचार में डॉक्टरों का सहयोग करना है, लेकिन अव्यवस्थाओं के बीच सोमवार को टोकन काउंटरों पर इनकी ड्यूटी लगानी पड़ी। छह काउंटरों पर टोकन काटने की व्यवस्था है, जिन्हें बढ़ाकर दस कर दिया गया। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं दिखाई दिया।
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अस्पताल बड़ा पर सुविधाएं जस की तस
जिला अस्पताल भले ही 500 करोड़ से बनी आठ मंजिला इमारत में शिफ्ट हो गया है, लेकिन सुविधाएं जस की तस बनी हुई हैं। सेक्टर-30 का पुराना अस्पताल 100 बेड का था। नए अस्पताल में 240 बेड की क्षमता हो गई है, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ पुराने अस्पताल के जितने ही हैं।
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तबादले के जुगाड़ में लगे चिकित्सक
नए अस्पताल में ओपीडी और भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है। काम के बोझ से परेशान स्टाफ नर्स ही नहीं बल्कि डॉक्टर भी अब दूसरे जिलों में तबादले के जुगाड़ में लगे हुए हैं। कई कर्मचारी दूसरे जनपदों से तबादला होकर नोएडा आए हैं, जो यहां का हाल देखकर पछता रहे हैं।
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इलाज के लिए सहना पड़ रहा इंतजार का दर्द
सेक्टर-39 जिला अस्पताल : लाइन में घंटों गुजार रहे मरीजों का हाल बेहाल, टोकन व्यवस्था भी फेल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए इंतजार का दर्द सहना पड़ रहा है। लाइन में घंटों गुजारने के बाद मरीज बेहाल हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। सोमवार को दो हजार से अधिक मरीजों की भीड़ के आगे यह व्यवस्था भी फेल हो गई।
मरीजों के साथ तीमारदारों के सेक्टर-39 जिला अस्पताल में जुटने से पांच सौ करोड़ की इमारत में उपलब्ध सुविधाएं कम पड़ती दिख रही हैं। पहले टोकन के लिए मरीजों को लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। इसके बाद ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श के लिए लाइन में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। डॉक्टर के पर्चे पर लिखी दवाओं के लिए फार्मेसी पर भी लंबी कतार में लगने के बाद मरीज स्वस्थ होने की जगह बीमार हो रहे हैं।
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सोमवार को अस्पताल की ओपीडी से लेकर फार्मेसी और जांच केंद्रों तक अव्यवस्था दिखाई दी। दो हजार से अधिक मरीज ओपीडी में डॉक्टरों से परामर्श के लिए पहुंचे। अस्पताल की पैथोलॉजी लैब से लेकर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सेंटर में भी कतार में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि मरीजों की भीड़ बढ़ने से कुछ दिक्कतें तो होंगी ही। व्यवस्था में सुधार का प्रयास किया जा रहा है।
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नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ काट रहा पर्ची
नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ का काम मरीजों के उपचार में डॉक्टरों का सहयोग करना है, लेकिन अव्यवस्थाओं के बीच सोमवार को टोकन काउंटरों पर इनकी ड्यूटी लगानी पड़ी। छह काउंटरों पर टोकन काटने की व्यवस्था है, जिन्हें बढ़ाकर दस कर दिया गया। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं दिखाई दिया।
अस्पताल बड़ा पर सुविधाएं जस की तस
जिला अस्पताल भले ही 500 करोड़ से बनी आठ मंजिला इमारत में शिफ्ट हो गया है, लेकिन सुविधाएं जस की तस बनी हुई हैं। सेक्टर-30 का पुराना अस्पताल 100 बेड का था। नए अस्पताल में 240 बेड की क्षमता हो गई है, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ पुराने अस्पताल के जितने ही हैं।
तबादले के जुगाड़ में लगे चिकित्सक
नए अस्पताल में ओपीडी और भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है। काम के बोझ से परेशान स्टाफ नर्स ही नहीं बल्कि डॉक्टर भी अब दूसरे जिलों में तबादले के जुगाड़ में लगे हुए हैं। कई कर्मचारी दूसरे जनपदों से तबादला होकर नोएडा आए हैं, जो यहां का हाल देखकर पछता रहे हैं।