{"_id":"615227e38ebc3e02d4058114","slug":"the-name-of-another-officer-of-the-authority-came-to-the-fore-in-the-compensation-scam-noida-news-noi607173158","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुआवजा घोटाले में प्राधिकरण के एक और अधिकारी का नाम आया सामने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुआवजा घोटाले में प्राधिकरण के एक और अधिकारी का नाम आया सामने
विज्ञापन
नोएडा। वर्ष 2015-16 में गेझा तिलपताबाद में मुआवजे के अनियमितता मामले में प्राधिकरण के एक और अधिकारी का नाम सामने आया है। सूत्रों की मानें तो उक्त अधिकारी पर जल्द कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण ने शासन को पत्र के माध्यम से अनुमति मांगी है।
दरअसल, इसी मामले में नोएडा प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2020 में एक अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है। वहीं थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में विभागीय जांच भी कराई गई थी। मामला सामने आने पर जांच कराने पर ऐसे 12 प्रकरण सामने आए थे। इनमें से एक मामले की जांच पूरी हुई है।
दरअसल, यह मामला जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर है। इसमें गेझा तिलपताबाद के एक किसान ने मुआवजे से असंतुष्ट होकर कोर्ट का रुख किया था। यहां जिला सत्र न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ नोएडा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि प्राधिकरण ने रकम जमा करा दी थी। फिर इस मामले में अलग-अलग दो और लोगों ने मुआवजे का दावा पेश किया। एक वादी को समझौते के नाम पर 9 करोड़ रुपये दिए गए। इस मामले में शक गहरा गया क्योंकि कई बिंदुओं पर यहां गड़बड़ी हुई थी। इसी मामले में 2018 में मुआवजे की राशि और बढ़ाकर देने की बात हुई। यहां सीईओ ने मामले की जांच कराई, जिसमें फर्जीवाड़े का मामला खुल गया। अब भविष्य में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, इसी मामले में नोएडा प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2020 में एक अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है। वहीं थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में विभागीय जांच भी कराई गई थी। मामला सामने आने पर जांच कराने पर ऐसे 12 प्रकरण सामने आए थे। इनमें से एक मामले की जांच पूरी हुई है।
विज्ञापन
दरअसल, यह मामला जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर है। इसमें गेझा तिलपताबाद के एक किसान ने मुआवजे से असंतुष्ट होकर कोर्ट का रुख किया था। यहां जिला सत्र न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ नोएडा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि प्राधिकरण ने रकम जमा करा दी थी। फिर इस मामले में अलग-अलग दो और लोगों ने मुआवजे का दावा पेश किया। एक वादी को समझौते के नाम पर 9 करोड़ रुपये दिए गए। इस मामले में शक गहरा गया क्योंकि कई बिंदुओं पर यहां गड़बड़ी हुई थी। इसी मामले में 2018 में मुआवजे की राशि और बढ़ाकर देने की बात हुई। यहां सीईओ ने मामले की जांच कराई, जिसमें फर्जीवाड़े का मामला खुल गया। अब भविष्य में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।
विज्ञापन