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Noida News: महंगी खेल सामग्री और बढ़ती फीस के आगे घुटने टेक रहा हुनर

Sun, 03 Dec 2023 01:40 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 03 Dec 2023 01:40 AM IST
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The hungry man is baring his teeth in front of crushed sports material and grains.
महंगी खेल सामग्री और बढ़ती फीस के आगे घुटने टेक रहा हुनर
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- लाखों रुपये खर्च कर लेनी पड़ रही कोचिंग, अभिभावकों की जेब हो रही ढीली



संवाद न्यूज एजेंसी



नोएडा। बैडमिंटन कोचिंग के लिए अधिक फीस और इस्तेमाल होने वाली खेल सामग्री महंगी होने के कारण हुनर अब घुटने टेक रहा है। कई अभिभावक अकादमियों की लाखों रुपये की फीस का भार देख, कदम पीछे खींच रहे हैं। एसोसिएशन के अनुसार जिले में छोटी बड़ी कुल 100 बैडमिंटन अकादमियां हैं। इनमें से 25 बड़ी तो 75 छोटी हैं। इन अकादमियों में तीन हजार से अधिक बच्चे प्रशिक्षण लेते हैं।
बैडमिंटन एसोसिएशन के पदाधिकारी बताते हैं कि जिले में 90 प्रतिशत से अधिक बैडमिंटन अकादमियां अपनी दुकान चला रही हैं। वह युवाओं से कोचिंग के नाम पर सालाना लाखों रुपए की फीस ऐंठ रही हैं। अकादमियों में 15 हजार रुपये मासिक तक की रकम ली जा रही है। ग्रेनो के पीएसएम अकादमी के कोच निशांत चौधरी का कहना है कि बहुत सी अकादमियों में अच्छे कोच भी नहीं है। ऐसे में शहर के कमजोर परिवार से निकले बच्चों में 100 में से केवल दो-तीन स्टेट व राष्ट्रीय स्तर पर आगे आ पाते हैं। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए खिलाड़ियों को लखनऊ, बैंगलूरु समेत अन्य जगहों पर जाकर तैयारी करनी पड़ती है।
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गौतमबुद्ध नगर बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद खरे बताते हैं कि बैडमिंटन अकादमियों को अगर प्रशासन का साथ मिले तो शहर के युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा में और तेजी से विकास किया जा सकता है। नोएडा स्टेडियम में चल रही बैडमिंटन अकादमी के लिए चार लाख रुपये से अधिक का मासिक शुल्क देना होता है। अगर प्रशासन इस शुल्क को नहीं ले या कम कर दे तो खिलाड़ियों पर भी इसका भार कम पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों की पहचान बनाने बनाने वाले नोएडा स्टेडियम में चल रही अकादमी से नीर नेहवाल, चिराग सेठ, सोनाली सिंह, शहजार चौधरी, समायरा परमार आदि खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा लोहा बनवा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले के सात से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं, जबकि शहर में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर खेल चुके खिलाड़ियों की बात की जाए तो उनकी संख्या 100 से अधिक है।
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बैडमिंटन अकादमियों की महंगी फीस एक बड़ा संकट है। मेरे एक-दो जूनियरों को महंगी फीस के कारण अपना खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा था। जिले में अकादमियों की मासिक फीस 20 हजार रुपये तक है। फीस में कमी होनी चाहिए ताकि सभी को आसानी रहे।

- सोनाली सिंह, बैडमिंटन खिलाड़ी
सरकार की ओर से कई बार छात्रवृत्ति मिल जाती है। ऐसे में अकादमियों की फीस का खर्च माफ हो जाता है। मगर खेल की शुरुआत में ऐसी मदद मिलना मुश्किल है। प्रशासन को आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें शुरुआत से ही सपोर्ट करना होगा। जिला स्तर पर एक अच्छा और सस्ता खेल प्रशिक्षण दिलाना सरकार की प्राथमिकता हो।



- नीर नेहवाल
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जनपद स्तर पर सरकार एक जनपद एक खेल योजना चला रही है। गौतमबुद्ध नगर खेल संघ को बैडमिंटन मिला है। सितंबर 2022 से 30 बच्चों को 210 रुपए की सालाना फीस के आधार पर बैडमिंटन की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके साथ ही सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए समय-समय पर विभिन्न पुरस्कारों की घोषणा की जाती रहती है। जिले के खिलाड़ी इसमें आवेदन कर सकते हैं, लाभ ले सकते हैं।



अनिता नागर, जिला उपक्रीडा अधिकारी
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