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Noida News: अवैध रूप से काटे गए पेड़ों के बदले वन विभाग को लगाने होंगे उतने ही पौधे

Thu, 27 Nov 2025 06:24 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 27 Nov 2025 06:24 PM IST
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The Forest Department will have to plant the same number of saplings in place of trees cut illegally.
फोटो:
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- एनजीटी ने देबू मोटर्स कंपनी के अंदर पेड़ काटने के मामले में वन विभाग को दिया आदेश
- यूपीसीडा को करनी होगी तार फेंसिंग, लगाना होगा गेट, शाकुंतलम पर दर्ज है एफआईआर
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने ग्रेटर नोएडा की देबू मोटर्स कंपनी में अवैध रूप से पेड़ काटने के मामले में अंतिम आदेश जारी किया है। आदेश के तहत काटे गए पेड़ों के बदले वन विभाग को कंपनी के आसपास उतने ही पौधे लगाने होंगे। एक साल तक उनकी देखरेख करनी होगी। यूपीसीडा को तीन माह के अंदर कंपनी की तार फेंसिंग व गेट लगाने का आदेश दिया है। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि एनजीटी के आदेश मिल गया है। उसका अवलोकन कर कार्रवाई की जाएगी।


औद्योगिक सेक्टर इकोटेक-3 की देबू मोटर्स कंपनी को शाकुंतलम लैंडक्रॉफ्ट कंपनी ने नीलामी में खरीद लिया था। मामले में बाद में कोर्ट से यूपीसीडा के पक्ष में फैसला आया लेकिन इस बीच कंपनी परिसर के अंदर 980 से अधिक पेड़ काट दिए थे। कंपनी करीब 1200 बीघा जमीन पर बनी है। इसमें करीब एक लाख छोटे और बड़े पेड़ हैं। 10 जून को अवैध रूप से 1000 से अधिक पेड़ काटने की शिकायत की थी। जिसमें वन विभाग ने 980 पेड़ काटने की बात मानी। वन विभाग की चेतावनी के बाद भी पेड़ कंपनी में पेड़ काटने का सिलसिला जारी है। करीब 500 और पेड़ों को काट दिया गया। नौ जुलाई को वन विभाग ने कंपनी को सील कर दिया था।
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वहीं स्वत: संज्ञान लेकर एनजीटी ने जिलाधिकारी, वन विभाग लखनऊ व केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी किया था। जवाब दाखिल होने के बाद एनजीटी ने सुनवाई के बाद अंतिम आदेश जारी कर दिया है। एनजीटी ने वन विभाग को कंपनी से काटे गए 980 पेड़ों के बदले पौधे लगाने का आदेश दिया है। एक साल तक पौधों की देखरेख भी करनी होगी। वहीं यूपीसीडा को तीन माह के अंदर कंपनी की तार फेंसिंग करने और गेट लगवाने होंगे। ताकि अन्य पेड़ों को सुरक्षित किया जा सके। उधर पेड़ काटने के मामले में शाकुंतलम लैंडक्रॉफ्ट कंपनी के निदेशक व अन्य अधिकारी और पेड़ काटने वाले के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज है। जिस पर कार्रवाई जारी रहेगी।
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वन विभाग की मिली थी लापरवाही
यूपी के चीफ कंजरवेटर ने एनजीटी में हलफनामा दाखिल किया था जिसमें स्थानीय वन विभाग के अफसरों के कामकाज पर नाराजगी जाहिर की गई थी। पत्र भेजकर जिले के कुछ अफसरों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए थे। पत्र में बताया गया था कि बबूल, यूकेलिप्टस और नीम समेत अन्य प्रजातियों के कुल 980 पेड़ काटे गए थे। इनमें नीम के तीन पेड़ ऐसे थे जो वर्ष 2020 को जारी सरकारी अधिसूचना के तहत प्रतिबंधित प्रजाति में आते हैं। पेड़ों की लकड़ी को जब्त कर सूरजपुर नर्सरी में रखा गया है। बता दें कि मीडिया में मामला आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई की थी।


एनजीटी का आदेश मिल गया है। जिसमें कुछ निर्देश दिए गए हैं। उनका पालन कराया जाएगा। काटे गए पेड़ों के बदले पौधरोपण किया जाएगा। इस केस में एफआईआर भी दर्ज है। जिसकी सुनवाई जिला न्यायालय की एक अदालत में चल रही है। - रजनीकांत मित्तल, प्रभागीय वनाधिकारी गौतमबुद्ध नगर
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