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लापरवाही की हद : ई-साइकिल योजना की फाइल ही गायब

Sat, 19 Feb 2022 01:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 01:21 AM IST
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The extent of negligence: the file of the e-cycle plan is missing
नोएडा (योगेश शर्मा)। ई-साइकिल की सवारी से राह आसान बनाने का सपना तो प्राधिकरण ने शहरवासियों को दिखा दिया, लेकिन इसे तीन साल बाद भी साकार नहीं किया जा सका है। शहर में 60 जगह ई-साइकिल स्टैंड बनकर तैयार हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बने इन स्टैंड पर साइकिल उपलब्ध कराने के लिए बड़ी मुश्किल से एक निजी कंपनी आगे आई है, लेकिन अब प्राधिकरण की लापरवाही इस महत्वाकांक्षी योजना में बाधा बन गई है। दरअसल, योजना से जुड़ी मूल फाइल ही प्राधिकरण दफ्तर से गायब हो गई है। अब ट्रैफिक सेल इस फाइल को तलाशने में जुटी है।
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अधिकारियों के अनुसार, यूलू कंपनी दो बार निविदा प्रक्रिया का हिस्सा बन चुकी है। पहली बार एग्रीमेंट पर साइन न होने से निविदा रद्द कर दी गई थी। चुनाव से पहले एक बार फिर निविदा आमंत्रित की गई, जिसमें अकेले यूलू ने ही हिस्सा लिया। शहर में ई-साइकिल के संचालन के लिए इसी कंपनी को सहमति पत्र जारी होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाया ही नहीं गया। इस बीच चुनावी आचार संहिता लग गई। दस मार्च से पहले कंपनी को सहमति पत्र नहीं सौंपा जा सकेगा, लेकिन इससे पहले कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए योजना से जुड़ी मूल फाइल की जरूरत पड़ी तो ट्रैफिक सेल के कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिए।
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बृहस्पतिवार को इस संबंध में ट्रैफिक सेल के वरिष्ठ प्रबंधक एएस शर्मा ने अधीनस्थों को तलब किया तो फाइल गायब होने की जानकारी मिली। वरिष्ठ प्रबंधक ने अधीनस्थों को फटकार लगाते हुए फाइल तलाशने के निर्देश दिए। फाइल न मिलने पर इसके गुम होने की एफआईआर लिखाने तक की हिदायत दे डाली।
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तीन साल में तीन कदम भी नहीं बढ़ी योजना
साल 2019 से प्राधिकरण योजना पर काम कर रहा है। योजना में 620 ई-साइकिल उपलब्ध कराने के लिए अच्छा खासा निवेश करना होगा। हर स्टैंड पर 2 ईसीएस (दो कारों की पार्किंग के बराबर जगह) उपलब्ध कराने की एवज में 1500 रुपये प्रतिमाह किराया वसूलने का प्रावधान योजना में था। ऐसे में आमदनी से ज्यादा घाटे का खतरा भांपते हुए किसी कंपनी ने निविदा प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।

साइकिल चलाने के लिए रोड नहीं ‘रोकड़ा’ जरूरी
कई बार निविदाएं आमंत्रित होने के बाद भी किसी निजी कंपनी ने रुझान नहीं दिखाया तो प्राधिकरण ने खुद ही शहर की अलग-अलग लोकेशन पर ई-साइकिल स्टैंड बनवा दिए। सूत्रों के अनुसार, स्टैंड बनाने में प्राधिकरण की रकम खर्च होनी थी, ऐसे में प्राधिकरण के जेई से लेकर वरिष्ठ अफसरों तक की टेबल पर फाइल रफ्तार के साथ दौड़ी। अब आगे का काम संचालन का जिम्मा संभालने वाली कंपनी को करना है। ऐसे में किसी की दिलचस्पी योजना में नहीं दिख रही है। साइकिल चलाने के लिए रोड से ज्यादा रोकड़ा यानी पैसा कितना जरूरी है, इसका अंदाजा प्राधिकरण की कार्यशैली से लगाया जा सकता है।
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