फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   The district court rejected the transfer petition in the Akhlaq mob lynching case.

Noida News: अखलाक मॉब लिंचिंग में जिला अदालत ने स्थानांतरण याचिका की खारिज

Thu, 22 Jan 2026 08:06 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 08:06 PM IST
विज्ञापन
The district court rejected the transfer petition in the Akhlaq mob lynching case.
अखलाक मॉब लिंचिंग में जिला अदालत ने स्थानांतरण याचिका की खारिज
विज्ञापन

आज एफटीसी में होगी गवाही
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में स्थानांतरण याचिका (टीए) पर गौतमबुद्ध नगर के जिला न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत में बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। अदालत ने आरोपियों द्वारा लगाई स्थानांतरण याचिका खारिज कर दी।
ऐसे में इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी-1) सौरभ द्विवेदी की अदालत में चलेगी। आज इस मामले में गवाही होगी। आरोपियों के वकील ने 8 जनवरी को एफटीसी से किसी अन्य अदालत में मामले के स्थानांतरण के लिए याचिका दायर की थी। यह याचिका तब दायर की गई थी जब अखलाक की पत्नी इकरामन फास्ट ट्रैक कोर्ट में 23 दिसंबर-205 के फैसले के बाद सुनवाई को दैनिक आधार पर आगे बढ़ाने के बाद अपना बयान दर्ज कराने आई थीं। अभी तक केवल अखलाक की बेटी शाइस्ता के बयान ही अदालत में दर्ज किए गए हैं। जबकि अखलाक की पत्नी और बेटे दानिश के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं। स्थानांतरण याचिका छह आरोपियों विनय, शिवम, सौरभ, संदीप, गौरव और हरिओम की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उन्हें झूठे तरीके से फंसाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने का निर्देश दिया। मगर एफटीसी अदालत ने सुनवाई के बाद धारा-321 सीआरपीसी के तहत मामला वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया। इसलिए मामले को एडीजे एफटीसी-1 से किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करना आवश्यक है।
विज्ञापन

पीड़ित परिवार अखलाक के अधिवक्ता युसुफ सैफी ने बताया कि आपराधिक विचारण को मात्र संभावनाओं या आशंकाओं तथा किसी पक्षकार के प्रतिकूल आदेश पारित करने के आधार पर किसी अन्य न्यायालय में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। प्रार्थना पत्र में बल नहीं है। इसलिए प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है। अदालत ने मामले में अब्दुल नजर मदानी बनाम तमिलनाडु राज्य और अन्य का हवाला देकर याचिका को खारिज किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed