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Noida News: राजस्थान के मुकाबले हरियाणा में बाजरे का 525 रुपये का अंतर बिगाड़ सकता है सरकारी खरीद का गणित
Thu, 25 Sep 2025 03:07 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Thu, 25 Sep 2025 03:07 AM IST
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अनाज मंडी में लगी बाजरे के ढेरी।
भिवानी। राजस्थान के मुकाबले हरियाणा में बाजरे का 525 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर इस बार सरकारी खरीद का गणित बिगाड़ सकता है। वजह साफ है व्यापारियों ने राजस्थान से 2250 रुपये प्रति क्विंटल पर बड़े पैमाने पर बाजरा खरीदकर भंडारण कर लिया है। वहीं हरियाणा सरकार किसानों को इस बार भावांतर भरपाई योजना के तहत 625 रुपये बोनस दे रही है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि व्यापारी सरकारी एमएसपी खरीद में सेंध लगाकर राजस्थान की खेप को हरियाणा की मंडियों में खपा सकते हैं।
भिवानी जिले के लोहारू, सिवानी और बहल खंड राजस्थान की सीमा से लगे हुए हैं। जिले की करीब 40 फीसदी सीमा राजस्थान से सटी है। सीमांत गांवों में बाजरे की काफी पैदावार हो रही है और व्यापारियों ने किसानों के घरों पर ही भंडारण करा दिया है ताकि किसी छापेमारी का खतरा न रहे।
हरियाणा सरकार ने मंगलवार से बाजरा खरीद का शेड्यूल तय कर दिया है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को ई-खरीद के तहत 2150 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिलेगा, जबकि 625 रुपये बोनस अलग से दिए जाएंगे। यानी कुल मिलाकर किसानों को 2775 रुपये प्रति क्विंटल दर पर खरीद सुनिश्चित की गई है। दूसरी ओर राजस्थान में व्यापारी 2250 रुपये प्रति क्विंटल पर पहले ही खरीद कर चुके हैं और अब ऐसे किसानों को निशाना बना रहे हैं जिन्होंने पंजीकरण तो करा रखा है लेकिन उनके पास फसल नहीं है या उन्होंने अभी तक बिक्री नहीं की। इनके नाम पर राजस्थान का बाजरा सरकारी खरीद में खपाने की पूरी तैयारी हो चुकी है।
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राजस्थान सीमा से सटे 35 गांवों में सबसे ज्यादा खतरा
भिवानी जिले के बहल, लोहारू और सिवानी खंड के 35 से अधिक गांव सीधे राजस्थान सीमा से सटे हैं। इन गांवों के किसानों का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण भी किया हुआ है। जानकारी के मुताबिक राजस्थान से लाया गया बाजरा सीमांत गांवों में किसानों के घरों में खुलेआम भंडारित हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि हर बड़े व्यापारी ने पांच से छह हजार क्विंटल तक बाजरा भंडारित कर रखा है। इससे अंदेशा है कि लाखों क्विंटल राजस्थान का बाजरा इस बार सरकारी खरीद में शामिल हो सकता है।
पिछले साल खरीदा गया था 7,42,000 क्विंटल से अधिक बाजरा
पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने 7,42,000 क्विंटल से अधिक बाजरा खरीदा गया था। उस समय किसानों की बंपर फसल हुई थी। लेकिन इस बार बाढ़ और जलभराव के कारण फसल कटाई से पहले ही बर्बाद हो गई। किसानों ने बिजाई के समय पंजीकरण करा लिया था मगर कटाई की नौबत नहीं आई। अब तक मंडियों में केवल 75 हजार क्विंटल बाजरा ही पहुंचा है जबकि सरकारी खरीद शुरू होनी बाकी है।
ऐसे बढ़ रही सरकारी खरीद में बाजरा खपाने की आशंका
व्यापारी राजस्थान से 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल पर बाजरा खरीद रहे हैं। सरकारी खरीद आढ़तियों के माध्यम से होती है जिन्हें किसानों की पैदावार का पूरा अंदाजा होता है। मंडी में किसान रोजाना 40 क्विंटल तक का गेट पास कटवा सकता है। कई बार किसान के पास उतना उत्पादन न होने पर भी उसके नाम पर गेट पास काट दिया जाता है। फसल की वास्तविक जांच न होने से इस खेल में मंडी कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी रहती है। दूसरी ओर व्यापारी ऐसे किसानों को भी टारगेट कर रहे हैं जो केवल भावांतर का लाभ ले रहे हैं लेकिन बाजरा बेच नहीं रहे। इनके नाम पर भी राजस्थान का बाजरा खपाने की तैयारी है।
भावांतर भरपाई योजना में पहले भी हुआ फर्जीवाड़ा
भिवानी जिले में 2023 के दौरान भावांतर भरपाई योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। गांव चहड़कलां के किसानों ने शिकायत दी थी कि उनकी फसल के नाम पर गलत लाभ लिया गया। गांव भारीवास निवासी सुरेंद्र सिंह ने भी कष्ट निवारण समिति की बैठक में नूंह के ठगों द्वारा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण का मामला उठाया था। जांच में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक की जांच में भिवानी जिले में 185 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई जबकि अन्य जिलों में भी केस दर्ज हुए। इन मामलों की जांच अब स्टेट क्राइम ब्रांच कर रही है।
जिले भर में अब तक एक लाख 15 हजार 287 किसानों की छह लाख 16 हजार 239 एकड़ भूमि का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण हो चुका है। पंजीकृत किसानों की ई-पोर्टल पर बाजरे की सरकारी खरीद एमएसपी पर कराई जा रही है। कृषि विभाग केवल किसानों की फसल का पंजीकरण कर रहा है जबकि खरीद संबंधी मानकों की जांच सरकारी एजेंसी व नोडल एजेंसी के अधिकारी ही कर रहे हैं। गलत तरीके से पंजीकरण संबंधी शिकायतों की सूचना उच्चाधिकारियों को भी भेजी जा चुकी है। - डॉ. विनोद फौगाट, कृषि उपनिदेशक, भिवानी
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भिवानी जिले के लोहारू, सिवानी और बहल खंड राजस्थान की सीमा से लगे हुए हैं। जिले की करीब 40 फीसदी सीमा राजस्थान से सटी है। सीमांत गांवों में बाजरे की काफी पैदावार हो रही है और व्यापारियों ने किसानों के घरों पर ही भंडारण करा दिया है ताकि किसी छापेमारी का खतरा न रहे।
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हरियाणा सरकार ने मंगलवार से बाजरा खरीद का शेड्यूल तय कर दिया है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को ई-खरीद के तहत 2150 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिलेगा, जबकि 625 रुपये बोनस अलग से दिए जाएंगे। यानी कुल मिलाकर किसानों को 2775 रुपये प्रति क्विंटल दर पर खरीद सुनिश्चित की गई है। दूसरी ओर राजस्थान में व्यापारी 2250 रुपये प्रति क्विंटल पर पहले ही खरीद कर चुके हैं और अब ऐसे किसानों को निशाना बना रहे हैं जिन्होंने पंजीकरण तो करा रखा है लेकिन उनके पास फसल नहीं है या उन्होंने अभी तक बिक्री नहीं की। इनके नाम पर राजस्थान का बाजरा सरकारी खरीद में खपाने की पूरी तैयारी हो चुकी है।
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राजस्थान सीमा से सटे 35 गांवों में सबसे ज्यादा खतरा
भिवानी जिले के बहल, लोहारू और सिवानी खंड के 35 से अधिक गांव सीधे राजस्थान सीमा से सटे हैं। इन गांवों के किसानों का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण भी किया हुआ है। जानकारी के मुताबिक राजस्थान से लाया गया बाजरा सीमांत गांवों में किसानों के घरों में खुलेआम भंडारित हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि हर बड़े व्यापारी ने पांच से छह हजार क्विंटल तक बाजरा भंडारित कर रखा है। इससे अंदेशा है कि लाखों क्विंटल राजस्थान का बाजरा इस बार सरकारी खरीद में शामिल हो सकता है।
पिछले साल खरीदा गया था 7,42,000 क्विंटल से अधिक बाजरा
पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने 7,42,000 क्विंटल से अधिक बाजरा खरीदा गया था। उस समय किसानों की बंपर फसल हुई थी। लेकिन इस बार बाढ़ और जलभराव के कारण फसल कटाई से पहले ही बर्बाद हो गई। किसानों ने बिजाई के समय पंजीकरण करा लिया था मगर कटाई की नौबत नहीं आई। अब तक मंडियों में केवल 75 हजार क्विंटल बाजरा ही पहुंचा है जबकि सरकारी खरीद शुरू होनी बाकी है।
ऐसे बढ़ रही सरकारी खरीद में बाजरा खपाने की आशंका
व्यापारी राजस्थान से 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल पर बाजरा खरीद रहे हैं। सरकारी खरीद आढ़तियों के माध्यम से होती है जिन्हें किसानों की पैदावार का पूरा अंदाजा होता है। मंडी में किसान रोजाना 40 क्विंटल तक का गेट पास कटवा सकता है। कई बार किसान के पास उतना उत्पादन न होने पर भी उसके नाम पर गेट पास काट दिया जाता है। फसल की वास्तविक जांच न होने से इस खेल में मंडी कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी रहती है। दूसरी ओर व्यापारी ऐसे किसानों को भी टारगेट कर रहे हैं जो केवल भावांतर का लाभ ले रहे हैं लेकिन बाजरा बेच नहीं रहे। इनके नाम पर भी राजस्थान का बाजरा खपाने की तैयारी है।
भावांतर भरपाई योजना में पहले भी हुआ फर्जीवाड़ा
भिवानी जिले में 2023 के दौरान भावांतर भरपाई योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। गांव चहड़कलां के किसानों ने शिकायत दी थी कि उनकी फसल के नाम पर गलत लाभ लिया गया। गांव भारीवास निवासी सुरेंद्र सिंह ने भी कष्ट निवारण समिति की बैठक में नूंह के ठगों द्वारा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण का मामला उठाया था। जांच में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक की जांच में भिवानी जिले में 185 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई जबकि अन्य जिलों में भी केस दर्ज हुए। इन मामलों की जांच अब स्टेट क्राइम ब्रांच कर रही है।
जिले भर में अब तक एक लाख 15 हजार 287 किसानों की छह लाख 16 हजार 239 एकड़ भूमि का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण हो चुका है। पंजीकृत किसानों की ई-पोर्टल पर बाजरे की सरकारी खरीद एमएसपी पर कराई जा रही है। कृषि विभाग केवल किसानों की फसल का पंजीकरण कर रहा है जबकि खरीद संबंधी मानकों की जांच सरकारी एजेंसी व नोडल एजेंसी के अधिकारी ही कर रहे हैं। गलत तरीके से पंजीकरण संबंधी शिकायतों की सूचना उच्चाधिकारियों को भी भेजी जा चुकी है। - डॉ. विनोद फौगाट, कृषि उपनिदेशक, भिवानी