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Noida News: केंद्र ने वापस लिया फैसला, संशय बरकरार
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चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को अनुच्छेद-240 में शामिल करने का फैसला वापस ले लिया है लेकिन अभी संशय बरकरार है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और शहर के पूर्व सांसद पवन कुमार बंसल ने कहा कि चंडीगढ़ को अनुच्छेद-240 में शामिल करना अत्यंत गंभीर और दूरगामी प्रभाव वाला कदम होगा। उन्होंने कहा कि अभी अनुच्छेद 239 के तहत राष्ट्रपति किसी भी केंद्र शासित प्रदेश का शासन प्रशासक के माध्यम से चला सकते हैं लेकिन अनुच्छेद 240 में संशोधन होने पर केंद्र सरकार केवल एक रेग्यूलेशन बनाकर संसद में गए बिना चंडीगढ़ के किसी भी कानून को बदल या समाप्त कर सकेगी।
बंसल ने कहा कि इससे संसद की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी और चंडीगढ़ का शासन सेक्शन ऑफिसर से लेकर गृह मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी स्तर तक सीमित हो सकता है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952, पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, हरियाणा हाउसिंग बोर्ड एक्ट, 1971 इन सभी कानूनों में एक साधारण आदेश से परिवर्तन संभव होगा, जिसका सीधा प्रभाव शहरवासियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था 40 वर्षों से सुचारू रूप से काम कर रही है और इसमें बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। केवल नगर निगम के लिए मेयर-इन-काउंसिल सिस्टम लागू कर अधिकार और संसाधन बढ़ाए जाने चाहिए।
कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाना उद्देश्य
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अजय जग्गा ने कहा कि केंद्र का उद्देश्य केवल कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र पंजाब, हरियाणा और अन्य हितधारकों से बातचीत किए बिना कोई निर्णय नहीं लेगा और अब गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरण से यह बात और साफ हो गई है।
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संसद से मंजूरी की जरूरत खत्म होगी
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश चंद जैन ने कहा कि यदि चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 में शामिल किया जाता है तो इससे हर नियम, संशोधन या नीति के लिए बार-बार संसद की मंजूरी लेने की बाध्यता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सीधे प्रशासनिक नियम जारी कर सकेंगे, जिससे लंबित कार्य समयबद्ध और सरल तरीके से निपट सकेंगे। उन्होंने इसे शहरवासियों के लिए लाभदायक कदम बताया।
शहरवासियों की राय सबसे महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और हिमाचल प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा कि चंडीगढ़ शहरवासियों का है। शहर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण आवाज इसके निवासियों की होनी चाहिए। जिन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है, उनकी राय बिना सुने इसे राजनीति का विषय बनाना गलत है। हमारा शहर हमारी प्राथमिकता है और पड़ोसी राजनीति को इस पर हावी नहीं होने दिया जा सकता।
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बंसल ने कहा कि इससे संसद की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी और चंडीगढ़ का शासन सेक्शन ऑफिसर से लेकर गृह मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी स्तर तक सीमित हो सकता है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952, पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, हरियाणा हाउसिंग बोर्ड एक्ट, 1971 इन सभी कानूनों में एक साधारण आदेश से परिवर्तन संभव होगा, जिसका सीधा प्रभाव शहरवासियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था 40 वर्षों से सुचारू रूप से काम कर रही है और इसमें बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। केवल नगर निगम के लिए मेयर-इन-काउंसिल सिस्टम लागू कर अधिकार और संसाधन बढ़ाए जाने चाहिए।
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कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाना उद्देश्य
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अजय जग्गा ने कहा कि केंद्र का उद्देश्य केवल कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र पंजाब, हरियाणा और अन्य हितधारकों से बातचीत किए बिना कोई निर्णय नहीं लेगा और अब गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरण से यह बात और साफ हो गई है।
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संसद से मंजूरी की जरूरत खत्म होगी
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश चंद जैन ने कहा कि यदि चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 में शामिल किया जाता है तो इससे हर नियम, संशोधन या नीति के लिए बार-बार संसद की मंजूरी लेने की बाध्यता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सीधे प्रशासनिक नियम जारी कर सकेंगे, जिससे लंबित कार्य समयबद्ध और सरल तरीके से निपट सकेंगे। उन्होंने इसे शहरवासियों के लिए लाभदायक कदम बताया।
शहरवासियों की राय सबसे महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और हिमाचल प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा कि चंडीगढ़ शहरवासियों का है। शहर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण आवाज इसके निवासियों की होनी चाहिए। जिन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है, उनकी राय बिना सुने इसे राजनीति का विषय बनाना गलत है। हमारा शहर हमारी प्राथमिकता है और पड़ोसी राजनीति को इस पर हावी नहीं होने दिया जा सकता।