आलमपुर (कांगड़ा)। आलमपुर के जांगल गांव की 62 वर्षीय वीना देवी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो उम्र बढ़ने के साथ खुद को सीमित कर लेती हैं। जहां ज्यादातर लोग 60 वर्ष की आयु के बाद आराम को जीवन का हिस्सा बना लेते हैं वहीं वीना देवी ने खुद को न सिर्फ सक्रिय रखा है बल्कि अपने हाथों की कला से पहचान भी बनाई है।
साधन-संपन्न परिवार से ताल्लुक रखने वाली वीना देवी के पति बिजली बोर्ड से सेवानिवृत्त हैं। चाहतीं तो वह भी पोते-पोतियों की परवरिश में ही समय गुजार सकती थीं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में व्यस्तता ही स्वास्थ्य का मंत्र अपनाया। वीना ने बताया कि पहले वह बड़ियां, सीरा और पापड़ सिर्फ घरेलू उपयोग के लिए बनाती थीं लेकिन गांव की पंचायत में सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ने के बाद उनके बनाए स्वादिष्ट उत्पाद लोगों के बीच इतने पसंद किए गए कि ऑर्डर बढ़ते चले गए। आज स्थिति यह है कि उन्हें बाजार भी नहीं जाना पड़ता। लोग सीधा उनके घर आकर बड़ियां, पापड़ और सीरा खरीदकर ले जाते हैं। इससे उन्हें माह में छह से सात हजार रुपये घर बैठे ही कमाई हो जाती है। उन्होंने कहा कि एक साल पहले उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं थीं, लेकिन काम में व्यस्त रहने से न सिर्फ उनकी बीमारियां दूर हुईं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा भी आई है। अगर उम्र कुछ रोकती है तो मन की इच्छाशक्ति उसे हजार गुना आगे बढ़ा सकती है।