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Noida News: स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से टेलीमेडिसिन सुविधा ठप
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घर बैठे फोन पर डॉक्टर से परामर्श और इलाज पाने वाले मरीज दर-दर भटकने को मजबूर
नंबर गेम-350 मरीज रोजाना लेते हैं परामर्श
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल के चलते जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बुरी तरह पटरी से उतर गई हैं। इस आंदोलन का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवा टेलीमेडिसिन पर पड़ा है, जो पूरी तरह ठप हो गई है। इसके बंद होने से रोजाना घर बैठे फोन पर डॉक्टर से परामर्श और इलाज पाने वाले सैकड़ों मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
टेलीमेडिसिन के माध्यम से जिले में रोजाना औसतन 350 मरीज फोन के जरिये डॉक्टरों से सीधे परामर्श लेते थे। दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के मरीजों के लिए यह सेवा जीवनदायिनी साबित हो रही थी, जहां वह बिना अस्पताल जाए विशेषज्ञ डॉक्टरों से दवाइयां और सलाह प्राप्त कर लेते थे। सेवा बंद होने से अब ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को प्राथमिक जांच के लिए भी जिला या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
इस टेलीमेडिसिन नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए 7 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 56 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) की तैनाती थी। 7 डॉक्टरों में जिला अस्पताल और चाइल्ड पीजीआई के डॉक्टर शामिल हैं।
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अस्पतालों में बढ़ी भीड़, मरीज परेशान
टेलीमेडिसिन बंद होने और एनएचएम कर्मियों के कार्य बहिष्कार से नियमित ओपीडी और जिला अस्पतालों में मरीजों का भारी दबाव बढ़ गया है। दूरदराज से आने वाले मरीजों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है, जिससे उन्हें समय पर इलाज मिलने में कठिनाई हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्था को वैकल्पिक रूप से संभालने का दावा कर रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
हड़ताल की वजह से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्यकर्मी काली पट्टी बांधकर सांकेतिक प्रदर्शन करते तो मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होता। -डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी, सीएमओ, गौतमबुद्ध नगर
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नंबर गेम-350 मरीज रोजाना लेते हैं परामर्श
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल के चलते जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बुरी तरह पटरी से उतर गई हैं। इस आंदोलन का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवा टेलीमेडिसिन पर पड़ा है, जो पूरी तरह ठप हो गई है। इसके बंद होने से रोजाना घर बैठे फोन पर डॉक्टर से परामर्श और इलाज पाने वाले सैकड़ों मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
टेलीमेडिसिन के माध्यम से जिले में रोजाना औसतन 350 मरीज फोन के जरिये डॉक्टरों से सीधे परामर्श लेते थे। दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के मरीजों के लिए यह सेवा जीवनदायिनी साबित हो रही थी, जहां वह बिना अस्पताल जाए विशेषज्ञ डॉक्टरों से दवाइयां और सलाह प्राप्त कर लेते थे। सेवा बंद होने से अब ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को प्राथमिक जांच के लिए भी जिला या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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इस टेलीमेडिसिन नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए 7 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 56 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) की तैनाती थी। 7 डॉक्टरों में जिला अस्पताल और चाइल्ड पीजीआई के डॉक्टर शामिल हैं।
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अस्पतालों में बढ़ी भीड़, मरीज परेशान
टेलीमेडिसिन बंद होने और एनएचएम कर्मियों के कार्य बहिष्कार से नियमित ओपीडी और जिला अस्पतालों में मरीजों का भारी दबाव बढ़ गया है। दूरदराज से आने वाले मरीजों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है, जिससे उन्हें समय पर इलाज मिलने में कठिनाई हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्था को वैकल्पिक रूप से संभालने का दावा कर रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
हड़ताल की वजह से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्यकर्मी काली पट्टी बांधकर सांकेतिक प्रदर्शन करते तो मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होता। -डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी, सीएमओ, गौतमबुद्ध नगर