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Noida News: पढ़ाते समय सेल्फी भेजने के फरमान पर शिक्षक उग्र
Tue, 11 Nov 2025 12:15 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Tue, 11 Nov 2025 12:15 AM IST
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गगरेट (ऊना )। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ऊना के प्रधान शशि सैणी और महासचिव संजीव कुमार ने कक्षाओं में पढ़ाते समय प्रवक्ताओं को सेल्फी लेकर भेजने के आदेश पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे शिक्षकों की गरिमा और शिक्षा के स्वरूप पर सीधा प्रहार बताया।
दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें पढ़ाने दें, दिखावा करने पर मजबूर न करें। शिक्षा कोई फोटो सेशन नहीं बल्कि एक साधना है। उन्होंने कहा कि शिक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी के बीच विश्वास, एकाग्रता और संवाद से ज्ञान का संचार होता है। ऐसे में हर समय कैमरे की ओर देखकर फोटो खिंचवाने की मजबूरी शिक्षा के मूल उद्देश्य को नष्ट करती है और कक्षा का अनुशासन तथा गंभीरता भंग करती है। यह आदेश न केवल अव्यावहारिक है बल्कि शिक्षकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
पदाधिकारियों शशि सैणी एवम संजीव कुमार ने कहा कि प्रदेश के प्रवक्ता बिना प्रधानाचार्य और बिना किसी अतिरिक्त लाभ के वर्षों से विद्यालयों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। सीमित संसाधनों में भी उत्कृष्ट परिणाम दे रहे ये अध्यापक ही शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन शिक्षकों ने विपरीत परिस्थितियों में भी शैक्षणिक स्तर को बनाए रखा है, उन्हें अविश्वास और अपमान का नहीं, सम्मान और समर्थन का हक है। उन्होंने सरकार से दो टूक कहा कि यह आदेश तुरंत रद्द किया जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो प्रवक्ता समुदाय शिक्षकों के सम्मान की रक्षा के लिए राज्यव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।
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दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें पढ़ाने दें, दिखावा करने पर मजबूर न करें। शिक्षा कोई फोटो सेशन नहीं बल्कि एक साधना है। उन्होंने कहा कि शिक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी के बीच विश्वास, एकाग्रता और संवाद से ज्ञान का संचार होता है। ऐसे में हर समय कैमरे की ओर देखकर फोटो खिंचवाने की मजबूरी शिक्षा के मूल उद्देश्य को नष्ट करती है और कक्षा का अनुशासन तथा गंभीरता भंग करती है। यह आदेश न केवल अव्यावहारिक है बल्कि शिक्षकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
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पदाधिकारियों शशि सैणी एवम संजीव कुमार ने कहा कि प्रदेश के प्रवक्ता बिना प्रधानाचार्य और बिना किसी अतिरिक्त लाभ के वर्षों से विद्यालयों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। सीमित संसाधनों में भी उत्कृष्ट परिणाम दे रहे ये अध्यापक ही शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन शिक्षकों ने विपरीत परिस्थितियों में भी शैक्षणिक स्तर को बनाए रखा है, उन्हें अविश्वास और अपमान का नहीं, सम्मान और समर्थन का हक है। उन्होंने सरकार से दो टूक कहा कि यह आदेश तुरंत रद्द किया जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो प्रवक्ता समुदाय शिक्षकों के सम्मान की रक्षा के लिए राज्यव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।
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