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Noida News: बस पकड़ने को ले रहे रस्सीनुमा जुगाड़ का सहारा
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फोटो
- यमुना एक्सप्रेसवे पर जान जोखिम में डालकर चढ़ने-उतरने पर मजबूर हैं यात्री
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना सिटी। जेवर में यमुना एक्सप्रेसवे का खुर्जा कट यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। यहां बस पकड़ने और उतरने के लिए यात्रियों को जान जोखिम में डालकर 30 फीट ऊंचाई पर चढ़ना और उतरना पड़ता है। एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए न तो कोई रैंप बना है और न ही सीढ़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना एक हजार से अधिक यात्री जेवर से नोएडा और आगरा की ओर जाने के लिए एक्सप्रेसवे पर चढ़ते-उतरते हैं। इनमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी होती है। एक्सप्रेसवे की ऊंचाई के चलते कई बार यात्रियों के पैर फिसल चुके हैं, जिसमें वे घायल भी हुए हैं। हालात इतने खराब हैं कि निवासियों ने खुद ही रस्सीनुमा जुगाड़ बना रखा है। उसी के सहारे लोग ऊपर-नीचे चढ़ते-उतरते हैं। यह जुगाड़ भी बेहद खतरनाक है, अधिक खिंचाव होने से तार कभी भी टूट सकता है। निवासियों का कहना है कि कई बार इस समस्या को अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यहां रैम्प या सीढ़ी बनवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, हादसों का खतरा बना रहेगा।
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- यमुना एक्सप्रेसवे पर जान जोखिम में डालकर चढ़ने-उतरने पर मजबूर हैं यात्री
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना सिटी। जेवर में यमुना एक्सप्रेसवे का खुर्जा कट यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। यहां बस पकड़ने और उतरने के लिए यात्रियों को जान जोखिम में डालकर 30 फीट ऊंचाई पर चढ़ना और उतरना पड़ता है। एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए न तो कोई रैंप बना है और न ही सीढ़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना एक हजार से अधिक यात्री जेवर से नोएडा और आगरा की ओर जाने के लिए एक्सप्रेसवे पर चढ़ते-उतरते हैं। इनमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी होती है। एक्सप्रेसवे की ऊंचाई के चलते कई बार यात्रियों के पैर फिसल चुके हैं, जिसमें वे घायल भी हुए हैं। हालात इतने खराब हैं कि निवासियों ने खुद ही रस्सीनुमा जुगाड़ बना रखा है। उसी के सहारे लोग ऊपर-नीचे चढ़ते-उतरते हैं। यह जुगाड़ भी बेहद खतरनाक है, अधिक खिंचाव होने से तार कभी भी टूट सकता है। निवासियों का कहना है कि कई बार इस समस्या को अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यहां रैम्प या सीढ़ी बनवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, हादसों का खतरा बना रहेगा।
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