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Noida News: मिठाई कहीं बिगाड़ा न दे सेहत...सतर्क होकर करें खरीद

Wed, 15 Oct 2025 12:41 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Wed, 15 Oct 2025 12:41 AM IST
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Sweets may harm your health... buy them with caution
शहर के दुकान में बन कर तैयार गुलाब जामुन। संवाद
सिद्धार्थनगर। खुशियों के पर्व दीपावली में मिठाई कहीं हाजमा न बिगाड़ दे, फूड प्वाइजनिंग के शिकार न हो जाएं, इसके लिए आपको मिठाई परख कर लेने की जरूरत है। चमचमाती मिठाई के चक्कर में गए तो मिलावटी ही पाएंगे। क्योंकि, त्योहार को देखते हुए पेड़ा से लेकर छेना और काजू की बर्फी से लेकर पपड़ी तक में मिलावट का खेल है।
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कमाई करने के लिए धंधेबाज क्या मिला देंगे कोई पता नहीं है। कई बार प्रयोग होने वाला तेल, दूध की जगह पर मैदा और बेहतर सेंट के लिए केमिकल का प्रयोग कर रहे हैं। घी के बजाय, 70 प्रतिशत डाल्डा का प्रयोग हो रहा है। मिलावट का इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि बीते होली में 45 में 35 नमूने फेल आए थे।
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इसमें मिठाई से लेकर अन्य खाद्य पदार्थ में मिलावट की पुष्टि हुई है। ऐसे अगर इसका सेवन करते हैं तो फूड प्वाइंजनिंग, लीवर और किडनी से बीमार हो सकते हैं। वहीं, खाद्य सुरक्षा विभाग की बात करें तो नियमित छापामारी और सैंपलिंग कर रहा है। खराब पनीर और मिठाई भी नष्ट करवा रहा है।
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दूध उत्पादन का केंद्र नहीं फिर भी प्रर्याप्त मात्रा में उपलब्ध
जिले में दुग्ध उत्पादन का कोई बड़ा स्रोत नहीं है। जो लोग पशु पालन किए हैं उनके स्वयं के उपयोग में दूध आ जाता है लेकिन खोवा और दूध भारी मात्रा में उपलब्ध है। दूध का कारोबार करने वाले जितेंद्र यादव और मिठाई की दुकान करने वाले रामलाल ने बताया कि जिले में दुकानदार कानपुर, गोरखपुर और बलरामपुर से खोवा मांगते हैं। कानपुर के खोवा में बड़े पैमाने पर मिलावट की जाती है। वह बहुत सस्ता होता है। यहां से आर्डर करिए, पहले रोडवेज की बस से आता था। छापेमारी शुरु होने के बाद पिकअप और अन्य छाेटे- छोटे वाहनों से डिलिवरी करते और रुपये वसूलते हैं। इसमें बड़ी दुकानों से सेटिंग होती है। क्योंकि छोटे दुकानदार खुद बनाते हैं बाजार पर कम निर्भर रहते हैं। त्योहार में देखते ही देखते सब खप जाता है। कानपुर खोआ की बात इसलिए पुख्ता है कि क्योंकि पूर्व में रोडवेज की बसों में बांसी और अन्य स्थानों पर खोवा पकड़ा जा चुका है लेकिन किसका खोवा था और कौन भेजा था। इसके बारे में जांच आगे नहीं बढ़ी।
यह है नियम पर नहीं होता है पालन

खोवा और उससे बनने वाली मिठाई, इसके अलावा दुकान पर नियमित बनाने वाली मिठाई लोगों को सही मिले इसके लिए जनवरी 2021 में शासन की ओर से नियम लागू किया गया था। इसमें बताया गया है कि दुकान पर बनने वाली मिठाई कब बनी और कबतक बिक्री योग्य है। यह सभी दुकानदारों को मिठाई के आगे नोटिस चस्पा करने के निर्देश थे, लेकिन यह आदेश केवल कागजों में सीमित रह गया है। कुछ दुकानदार आदेश से अनजान हैं तो कुछ जानते हुए भी पालन नहीं करते हैं। कुल मिलाकर प्रभावी रूप से यह अमल में नहीं आ सका।
इतने समय तक रख सकते हैं यह मिठाई

खाद्य सुरक्षा विभाग के जानकारों के मुताबिक दूध से बनने वाली मिठाई गर्मी में 24 घंटे तक खाने योग्य रहती है। अगर मौसम ठंड है तो 36 घंटे तक सेवन कर सकते हैं। वहीं खोवा से बनने वाली मिठाई एक सप्ताह तक रख सकते हैं। उससे अधिक समय होने पर खाने पर बीमार हो सकते हैं। जबकि दुकानों पर कई दिन का छेना, खोवा से बनी मिठाई और पनीर को स्टाॅक किया जा रहा है। अगर इससे अधिक समय हुआ तो गंध आनी शुरू हो जाता है पर अब कई प्रकार के सेंट आ रहे हैं, जिसे डालने के बाद गंध नहीं आता है। ग्राहक नहीं समझ पाता है, जब सैंपलिंग होती है और रिपोर्ट आती है तो खराब होना पाया जाता है, जुर्माना लगाया जाता है।
मिलावट की इस तरह करें पहचान

मिठाई बनाने वाले कारीगर मुकेश मोदनवाल के मुताबिक खोवा में मिलावट की अधिक संभावना रहती है। इसकी पहचान के लिए खरीदते समय ग्राहक थोड़ा सा हाथ में ले लें। उसके बाद उसका गोली तैयार करें। अगर गोली बनाते समय हाथ चिकना हो रहा है तो समझिए की सही है। अगर गोली बनाने पर खुरदुरा है तो मिलावटी है। ऐसा मिलता है तो उस न खरीदें। क्योंकि, इसमें मैदा, बड़ी मात्रा में गंजी का प्रयोग करके तैयार किया जाता है। त्योहार में शायद ही कोई दुकान हो जहां पर मिलावट न होता हो। छोटी दुकानों पर तो गनीमत है, लेकिन जिसका थोड़ा सा चल गया है, वह अधिक कमाई के चक्कर में मिलावट करते हैं।

यह भी सावधानी जरूरी

अगर सिल्वर पॉलिस लगी मिठाई खरीदते हैं तो इसमें भी गड़बड़ी होने की बड़ी संभावना है। इसकी पहचान के लिए मिठाई पर लगे पॉलिस को हाथ में लेकर मलिए, अगर सही है तो हाथ में विलीन हो जाएगा। अगर गड़बड़ है एलुमिनियम वाला पॉलिस है तो खुरदुरा हो जाएगा। जो सेहत के लिए नुकसानदेह है।
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