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सुहास बोले- देश के लिए रजत जीतकर खुशी, शुभचिंतकों का शुक्रिया
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नोएडा। टोक्यो पैरालंपिक में पदक जीतने वाले जिलाधिकारी सुहास एलवाई देश के पहले आईएएस बन गए हैं। रजत जीतने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपनी खुशी को फोन पर पत्नी ऋतु सुहास से साझा किया। ऋतु पीसीएस अधिकारी हैं और गाजियाबाद में एडीएम प्रशासन के पद पर हैं।
सुहास की जीत के बाद से जिले में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता में खुशी का माहौल है। सोमवार शाम करीब 4:40 बजे जिलाधिकारी टोक्यो से देश में लौटेंगे। उनके शुभचिंतकों ने एयरपोर्ट पर स्वागत करने की बात कही है। जिलाधिकारी ने रविवार सुबह ही सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके खुशी का इजहार किया और शुभचिंतकों का भी शुक्रिया जताया। जिलाधिकारी ने कहा कि रजत पदक जीतना मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है। देश के लोगों की उम्मीदों पर मैं खरा उतरा हूं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर स्वर्ण पदक जीतता तो यह खुशी और भी ज्यादा होती।
छठी कक्षा में पकड़ लिया था रैकेट
कर्नाटक के हासन जिले में जन्मे सुहास एलवाई 2007 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने जज्बे और जुनून से साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो जिंदगी में किसी भी चुनौती से पार पाया जा सकता है। सुहास बताते हैं कि उनके पिताजी बॉल बैडमिंटन के अच्छे खिलाड़ी थे। अब तो यह खेल धीरे-धीरे गायब हो गया है। पिता जब खेलते तो उन्हें अक्सर स्कोरिंग में लगा दिया जाता था। उस समय वह कक्षा-6 में पढ़ते थे। वहां घर के पास मिट्टी में कोर्ट बना था। उसी समय पहली बार उन्होंने बॉल बैडमिंटन खेलने के लिए रैकेट पकड़ा था।
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अब तक के प्रदर्शन पर एक नजर
वर्ष 2017 में तुर्की पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2016 में एशिया पैरा बैडमिंटन चीन में स्वर्ण
वर्ष 2018 नेशनल पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2019 में आयरिश पैरा बैडमिंटन में रजत
वर्ष 2019 में तुर्की ओपन पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2020 में ब्राजील ओपन पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2020 में पेरू ओपन पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2021 टोक्यो पैरालंपिक बैडमिंटन में रजत पदक
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सुहास की जीत के बाद से जिले में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता में खुशी का माहौल है। सोमवार शाम करीब 4:40 बजे जिलाधिकारी टोक्यो से देश में लौटेंगे। उनके शुभचिंतकों ने एयरपोर्ट पर स्वागत करने की बात कही है। जिलाधिकारी ने रविवार सुबह ही सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके खुशी का इजहार किया और शुभचिंतकों का भी शुक्रिया जताया। जिलाधिकारी ने कहा कि रजत पदक जीतना मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है। देश के लोगों की उम्मीदों पर मैं खरा उतरा हूं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर स्वर्ण पदक जीतता तो यह खुशी और भी ज्यादा होती।
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छठी कक्षा में पकड़ लिया था रैकेट
कर्नाटक के हासन जिले में जन्मे सुहास एलवाई 2007 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने जज्बे और जुनून से साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो जिंदगी में किसी भी चुनौती से पार पाया जा सकता है। सुहास बताते हैं कि उनके पिताजी बॉल बैडमिंटन के अच्छे खिलाड़ी थे। अब तो यह खेल धीरे-धीरे गायब हो गया है। पिता जब खेलते तो उन्हें अक्सर स्कोरिंग में लगा दिया जाता था। उस समय वह कक्षा-6 में पढ़ते थे। वहां घर के पास मिट्टी में कोर्ट बना था। उसी समय पहली बार उन्होंने बॉल बैडमिंटन खेलने के लिए रैकेट पकड़ा था।
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वर्ष 2017 में तुर्की पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2016 में एशिया पैरा बैडमिंटन चीन में स्वर्ण
वर्ष 2018 नेशनल पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2019 में आयरिश पैरा बैडमिंटन में रजत
वर्ष 2019 में तुर्की ओपन पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2020 में ब्राजील ओपन पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2020 में पेरू ओपन पैरा बैडमिंटन में स्वर्ण
वर्ष 2021 टोक्यो पैरालंपिक बैडमिंटन में रजत पदक