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बीपी और शुगर से पीड़ित, फिर भी घर पर दी कोरोना को मात

Fri, 30 Apr 2021 12:16 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 30 Apr 2021 12:16 AM IST
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Suffering from BP and sugar, yet beat Corona at home
ग्रेटर नोएडा। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी की वजह से लोगों के मन में डर बैठ गया है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर लोग तुरंत अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है। जबकि, चिकित्सकों के मुताबिक, हर व्यक्ति को अस्पताल की जरूरत नहीं है। शहर में भी ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिनकी उम्र 60 साल है। संक्रमित होने के बाद उन्होंने हिम्मत से काम लिया और आज वो पूरी तरह से ठीक हैं।
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चौगानपुर गांव में रहने वाली 67 वर्षीय बिमला देवी ने थायरायड, बीपी, शुगर और हार्ट की बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी घर पर रहकर कोरोना को मात दी। इनके परिवार के 11 सदस्यों में से 10 संक्रमित हो गए थे। घर के मुखिया 72 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद का ऑक्सीजन लेवल गिरने पर यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर वह ऑक्सीजन के सपोर्ट पर हैं। पति की हालत देखकर और अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर बिमला देवी ने घर में रहकर ही इलाज कराने का फैसला किया। इनका ऑक्सीजन लेवल 87 हो गया था। इसके बाद भी नियमित रूप से भाप लेना शुरू किया। भूख नहीं होने पर भी खाना खाया। मल्टी विटामिन, विटामिन सी की गोलियां खाईं और गर्म पानी पिया। साथ ही, खूब आराम किया। फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए व्यायाम किया। अब वो पूरी तरह से ठीक हैं और ऑक्सिजन लेवल 96 हो गया है।
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हिम्मत से करें मुकाबला
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर गामा में रहने वाली 63 वर्षीय सत्यवती ने घर में रहकर ही कोरोना को हराया है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद घबराई नहीं और हिम्मत से मुकाबला किया। सत्यवती ने बताया कि सर्दी, जुकाम की शिकायत थी। मुझे हाई ब्लड प्रेशर भी परेशानी है। संक्रमित होने पर खुद को परिवार से अलग किया और खाने-पीने पर पूरा ध्यान दिया। हरी सब्जी, दाल जैसी पौष्टिक चीजों का सेवन किया। गर्म पानी पीया। अब रिपोर्ट निगेटिव आ गई है और बेहतर महसूस कर रही हूं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कोरोना पीड़ित हर मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है। घर पर रहकर डॉक्टर की सलाह मानकर पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।
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संक्रमित होकर भी मरीजों को दे रहे परामर्श
सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल के डॉ. विशाल गुप्ता संक्रमितों की सेवा और देखरेख करते हुए खुद संक्रमण की चपेट में आ गए। इसके बावजूद वह सुबह से देर शाम तक ‘टेलीमेडिसिन’ के जरिये कोरोना या दूसरी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को चिकित्सकीय सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस मुश्किल घड़ी में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भारी दबाव में हैं, इसलिए वह हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते। उन्होंने बताया कि ‘टेलीमेडिसिन’ के जरिये रोगियों की मदद की जा सकती है। इससे अन्य डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत बचेगी। डॉ. गुप्ता प्रतिदिन 50 से 70 मरीजों को सलाह दे रहे हैं। इनसे परामर्श लेने वालों में नोएडा समेत कई अन्य शहरों के मरीज भी शामिल हैं।
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