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Noida News: मिल्क बैंक के लिए अभी और इंतजार
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मिल्क बैंक के लिए अभी और इंतजार
- चाइल्ड पीजीआई में 2023 में शुरू हुई थी मिल्क बैंक की कवायद, अब तक नहीं मिल सकी मशीन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई में ढाई साल बीतने के बाद भी मिल्क बैंक की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। जबकि अस्पताल प्रशासन ने नवजात शिशुओं को संक्रमण से बचाने और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से 2023 में इस दिशा में पहल की थी। लेकिन, अब तक मिल्क बैंक के लिए आवश्यक मशीनें नहीं मिल पाई हैं, जिससे परियोजना अधर में लटकी हुई है।
अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) के रिसर्च के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत नवजात ऐसे होते हैं जो डिब्बाबंद दूध, मां के दूध और फॉर्मूला मिल्क पर निर्भर रहते हैं। इस कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षित स्तर तक नहीं बन पाती। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए, चाइल्ड पीजीआई ने धात्री मदर्स मिल्क बैंक और सुषेना हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के सहयोग से मिल्क बैंक स्थापित करने की योजना बनाई थी।
2023 में मिल्क बैंक के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन मशीनों की अनुपलब्धता के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। इसी दौरान, स्तनपान प्रबंधन इकाई की स्थापना की गई, जो स्तनपान कराने वाली माताओं को सही तकनीक और लाभों के बारे में सलाह देती हैं। मार्च 2024 में एक बार फिर से संस्था के साथ नया समझौता किया गया, जिसमें वादा किया गया कि तीन महीने के भीतर मिल्क बैंक शुरू कर दिया जाएगा।
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अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोबारा से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और अब उम्मीद है कि अगले तीन से चार महीनों में मिल्क बैंक पूरी तरह कार्यशील हो जाएगा।
मशीन नहीं आने की वजह से मिल्क बैंक शुरू होने में देरी हो रही है। दोबारा से इस पर काम शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि तीन से चार महीने में मिल्क बैंक पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगा।
डॉ अरुण कुमार सिंह, निदेशक, चाइल्ड पीजीआई
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- चाइल्ड पीजीआई में 2023 में शुरू हुई थी मिल्क बैंक की कवायद, अब तक नहीं मिल सकी मशीन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई में ढाई साल बीतने के बाद भी मिल्क बैंक की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। जबकि अस्पताल प्रशासन ने नवजात शिशुओं को संक्रमण से बचाने और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से 2023 में इस दिशा में पहल की थी। लेकिन, अब तक मिल्क बैंक के लिए आवश्यक मशीनें नहीं मिल पाई हैं, जिससे परियोजना अधर में लटकी हुई है।
अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) के रिसर्च के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत नवजात ऐसे होते हैं जो डिब्बाबंद दूध, मां के दूध और फॉर्मूला मिल्क पर निर्भर रहते हैं। इस कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षित स्तर तक नहीं बन पाती। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए, चाइल्ड पीजीआई ने धात्री मदर्स मिल्क बैंक और सुषेना हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के सहयोग से मिल्क बैंक स्थापित करने की योजना बनाई थी।
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2023 में मिल्क बैंक के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन मशीनों की अनुपलब्धता के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। इसी दौरान, स्तनपान प्रबंधन इकाई की स्थापना की गई, जो स्तनपान कराने वाली माताओं को सही तकनीक और लाभों के बारे में सलाह देती हैं। मार्च 2024 में एक बार फिर से संस्था के साथ नया समझौता किया गया, जिसमें वादा किया गया कि तीन महीने के भीतर मिल्क बैंक शुरू कर दिया जाएगा।
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अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोबारा से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और अब उम्मीद है कि अगले तीन से चार महीनों में मिल्क बैंक पूरी तरह कार्यशील हो जाएगा।
मशीन नहीं आने की वजह से मिल्क बैंक शुरू होने में देरी हो रही है। दोबारा से इस पर काम शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि तीन से चार महीने में मिल्क बैंक पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगा।
डॉ अरुण कुमार सिंह, निदेशक, चाइल्ड पीजीआई