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Noida News: हाईकोर्ट ने केयू की हायर एंड फायर नीति के खिलाफ फैसले को रखा बरकरार
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कश्मीर यूनिवर्सिटी (केयू) की हायर एंड फायर नीति के खिलाफ फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने अपने सिंगल बेंच के उस फैसले को अनुकरणीय बताते हुए बरकरार रखा है।
इसमें कहा गया था कि एडहॉक, कॉन्ट्रैक्टुअल या एकेडमिक अरेंजमेंट पर नियुक्त व्यक्ति को हर एकेडमिक सेशन के लिए इसी तरह की व्यवस्था से नहीं बदला जा सकता। केयू की ओर से दाखिल अपील का निपटारा करते हुए जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसे नियुक्त व्यक्ति उन पदों पर बने रहने के हकदार हैं जिनके खिलाफ उनकी नियुक्ति हुई है जब तक कि नियमित चयन प्रक्रिया से इन पदों को भरा न जाए। डिवीजन बेंच ने लॉ डिपार्टमेंट में अस्थायी फैकल्टी की जरूरत के संबंध में सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन किया और इसे संबंधित डिपार्टमेंट तथा एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर छोड़ने का फैसला किया।
कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया तुरंत और फौरन कश्मीर यूनिवर्सिटी का दौरा करेगी और तीन साल तथा पांच साल के लॉ कोर्स चलाने के लिए कोर फैकल्टी की जरूरत का आकलन करेगी।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कश्मीर यूनिवर्सिटी (केयू) की हायर एंड फायर नीति के खिलाफ फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने अपने सिंगल बेंच के उस फैसले को अनुकरणीय बताते हुए बरकरार रखा है।
इसमें कहा गया था कि एडहॉक, कॉन्ट्रैक्टुअल या एकेडमिक अरेंजमेंट पर नियुक्त व्यक्ति को हर एकेडमिक सेशन के लिए इसी तरह की व्यवस्था से नहीं बदला जा सकता। केयू की ओर से दाखिल अपील का निपटारा करते हुए जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसे नियुक्त व्यक्ति उन पदों पर बने रहने के हकदार हैं जिनके खिलाफ उनकी नियुक्ति हुई है जब तक कि नियमित चयन प्रक्रिया से इन पदों को भरा न जाए। डिवीजन बेंच ने लॉ डिपार्टमेंट में अस्थायी फैकल्टी की जरूरत के संबंध में सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन किया और इसे संबंधित डिपार्टमेंट तथा एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर छोड़ने का फैसला किया।
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कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया तुरंत और फौरन कश्मीर यूनिवर्सिटी का दौरा करेगी और तीन साल तथा पांच साल के लॉ कोर्स चलाने के लिए कोर फैकल्टी की जरूरत का आकलन करेगी।
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