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दिल्ली पुलिस की भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गिरोह पकड़ा, दो सिपाही समेत 9 गिरफ्तार
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
दिल्ली पुलिस की भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गिरोह पकड़ा, दो सिपाही समेत 9 गिरफ्तार
नोएडा। दिल्ली पुलिस की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने आए सॉल्वर गिरोह के 9 आरोपियों को कमिश्नरेट पुलिस ने शनिवार सुबह सेक्टर-62 स्थित आईऑन डिजिटल परीक्षा केंद्र से गिरफ्तार किया है। इनमें दो आरोपी दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात हैं। वहीं आयकर विभाग और गृह मंत्रालय में तैनात दो आरोपी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 3 कार, 2.10 लाख रुपये और 8 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने अभी तक करीब 110 लोगों को हरियाणा और दिल्ली पुलिस व ग्रुप डी में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलवाई हैं।
अपर पुलिस आयुक्त लॉ एंड आर्डर लव कुमार ने बताया कि शनिवार को दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा थी। सेक्टर-62 स्थित आईऑन डिजिटल परीक्षा केंद्र था। सुबह परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने दूसरे की जगह परीक्षा में बैठने का प्रयास कर रहे एक युवक दबोचा। उससे पूछताछ के बाद आसपास गाड़ियों में बैठे कुछ और लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान पलवल हरियाणा के असावटी गांव निवासी दिनेश प्रजापति उर्फ जोगी व शिव कुमार, जासवा कला सवाला झज्जर निवासी मंजीत व अमन, सोनीपत के गोरर गांव निवासी रविंद्र, समसपुर चरखी दादरी निवासी दिनेश चौधरी, डहाग झज्जर निवासी सोनू, भडौदी झज्जर निवासी मुकेश और नजफगढ़- छावला दिल्ली निवासी अर्पित के रूप में हुई। अपर पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि गिरोह का खुलासा करने वाले एसीपी रजनीश वर्मा और थानाध्यक्ष अनिल कुमार समेत टीम को इनाम दिलाने के लिए पुलिस आयुक्त को नाम भेजे जाएंगे।
मुंडका और वेलकम थाने में तैनात हैं सिपाही
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में मंजित और रविंद्र, दिल्ली पुलिस में सिपाही हैं। रविंद्र मुंडका थाने में, जबकि मंजीत वेलकम थाने में तैनात है। वहीं अर्पित, अमन और दिनेश चौधरी सॉल्वर के रूप में परीक्षा देने वाले हैं। आयकर इंस्पेक्टर रवि कुमार अभी फरार है। पुलिस के अनुसार रवि ही आवेदकों से संपर्क करता था और सॉल्वर दिनेश चौधरी उसका भांजा है। सिपाही मंजीत इन दिनों निलंबित चल रहा है, उसके खिलाफ सहमति संबंध में साथ रहने वाली महिला मित्र ने धोखा देने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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गिरोह के अन्य सदस्यों ने दूसरे केंद्रों पर दी परीक्षा
सॉल्वर गिरोह से जुड़े लोग नोएडा नहीं बल्कि दिल्ली, हरियाणा में भी सक्रिय हैं, शनिवार को मेरठ सहित अन्य केंद्रों पर परीक्षा भी दे रहे थे। पुलिस के अनुसार शुक्रवार को भी गिरोह से जुड़े लोगों ने नोएडा में परीक्षा दी थी। शनिवार को अर्पित, नितिन कुमार के नाम से परीक्षा देने आया था, जबकि नितिन अपने घर पर आराम कर रहा था।
8 से 35 लाख रुपये तक लेते थे
पुलिस के अनुसार यह गिरोह सिपाही की परीक्षा पास कराने के लिए 8 लाख रुपये, ग्रुप डी के विभिन्न पदों भर्ती के लिए 15 लाख रुपये जबकि अन्य पदों के लिए 35 लाख रुपये तक लेता था। फार्म भरने से लेकर परीक्षा पास कराने तक का जिम्मा गिरोह का होता था। आवेदक को केवल पद और कीमत बता दी जाती थी। पुलिस के अनुसार यह गिरोह एसएससी, सीजीएल, रेलवे भर्ती आदि की परीक्षाएं भी दिलवा चुका है।
सॉल्वर को एडवांस दी जाती थी 50 फीसदी रकम
डीसीपी राजेश एस ने बताया कि सॉल्वर को 50 फीसदी रकम एडवांस दी जाती थी और शेष परीक्षा परिणाम आने के बाद। एक से दो लाख रुपये परीक्षा देने वाले को दिए जाते थे। फर्जी दस्तावेज बनाने का काम दिनेश प्रजापति उर्फ दिनेश जोगी करता था। ज्यादातर परीक्षाओं में आईडी के तौर पर ड्राइविंग लाइसेंस लगाते थे। आवेदक के नाम और सॉल्वर के चेहरे को मिलाकर फर्जी डीएल बनाया जाता था। जिससे आवेदक के नाम पर सॉल्वर को आसानी से परीक्षा दे सके।
फोटो ब्लेडर ऐप का लेते थे सहारा, बल्लभगढ़ में बनवाते थे फर्जी डीएल
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि परीक्षा में जाने वाले सॉल्वर और आवेदक का चेहरा मिलाया जाता था। करीब 10 से 15 सॉल्वर के फोटो से सामान्य तौर पर चेहरा मिलाया जाता था। इसके बाद जिस साल्वर का चेहरा आवेदक से मिलता-जुलता होता, उसी के फोटो को आवेदक की फोटो से मैच करने के लिए फोटो ब्लेडर ऐप का इस्तेमाल किया जाता था। ऐप पर बाल और आंख आदि का मिलान करते हुए चेहरे का ज्यादातर हिस्सा मिक्स हो जाता था। ऐप से तैयार फोटो प्रवेश पत्र पर लगाया जाता था। इसी फोटो के आधार पर बल्लभगढ़ के एक कैफे पर फर्जी डीएल बनवाया जाता था।
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नोएडा। दिल्ली पुलिस की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने आए सॉल्वर गिरोह के 9 आरोपियों को कमिश्नरेट पुलिस ने शनिवार सुबह सेक्टर-62 स्थित आईऑन डिजिटल परीक्षा केंद्र से गिरफ्तार किया है। इनमें दो आरोपी दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात हैं। वहीं आयकर विभाग और गृह मंत्रालय में तैनात दो आरोपी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 3 कार, 2.10 लाख रुपये और 8 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने अभी तक करीब 110 लोगों को हरियाणा और दिल्ली पुलिस व ग्रुप डी में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलवाई हैं।
अपर पुलिस आयुक्त लॉ एंड आर्डर लव कुमार ने बताया कि शनिवार को दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा थी। सेक्टर-62 स्थित आईऑन डिजिटल परीक्षा केंद्र था। सुबह परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने दूसरे की जगह परीक्षा में बैठने का प्रयास कर रहे एक युवक दबोचा। उससे पूछताछ के बाद आसपास गाड़ियों में बैठे कुछ और लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान पलवल हरियाणा के असावटी गांव निवासी दिनेश प्रजापति उर्फ जोगी व शिव कुमार, जासवा कला सवाला झज्जर निवासी मंजीत व अमन, सोनीपत के गोरर गांव निवासी रविंद्र, समसपुर चरखी दादरी निवासी दिनेश चौधरी, डहाग झज्जर निवासी सोनू, भडौदी झज्जर निवासी मुकेश और नजफगढ़- छावला दिल्ली निवासी अर्पित के रूप में हुई। अपर पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि गिरोह का खुलासा करने वाले एसीपी रजनीश वर्मा और थानाध्यक्ष अनिल कुमार समेत टीम को इनाम दिलाने के लिए पुलिस आयुक्त को नाम भेजे जाएंगे।
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मुंडका और वेलकम थाने में तैनात हैं सिपाही
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में मंजित और रविंद्र, दिल्ली पुलिस में सिपाही हैं। रविंद्र मुंडका थाने में, जबकि मंजीत वेलकम थाने में तैनात है। वहीं अर्पित, अमन और दिनेश चौधरी सॉल्वर के रूप में परीक्षा देने वाले हैं। आयकर इंस्पेक्टर रवि कुमार अभी फरार है। पुलिस के अनुसार रवि ही आवेदकों से संपर्क करता था और सॉल्वर दिनेश चौधरी उसका भांजा है। सिपाही मंजीत इन दिनों निलंबित चल रहा है, उसके खिलाफ सहमति संबंध में साथ रहने वाली महिला मित्र ने धोखा देने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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गिरोह के अन्य सदस्यों ने दूसरे केंद्रों पर दी परीक्षा
सॉल्वर गिरोह से जुड़े लोग नोएडा नहीं बल्कि दिल्ली, हरियाणा में भी सक्रिय हैं, शनिवार को मेरठ सहित अन्य केंद्रों पर परीक्षा भी दे रहे थे। पुलिस के अनुसार शुक्रवार को भी गिरोह से जुड़े लोगों ने नोएडा में परीक्षा दी थी। शनिवार को अर्पित, नितिन कुमार के नाम से परीक्षा देने आया था, जबकि नितिन अपने घर पर आराम कर रहा था।
8 से 35 लाख रुपये तक लेते थे
पुलिस के अनुसार यह गिरोह सिपाही की परीक्षा पास कराने के लिए 8 लाख रुपये, ग्रुप डी के विभिन्न पदों भर्ती के लिए 15 लाख रुपये जबकि अन्य पदों के लिए 35 लाख रुपये तक लेता था। फार्म भरने से लेकर परीक्षा पास कराने तक का जिम्मा गिरोह का होता था। आवेदक को केवल पद और कीमत बता दी जाती थी। पुलिस के अनुसार यह गिरोह एसएससी, सीजीएल, रेलवे भर्ती आदि की परीक्षाएं भी दिलवा चुका है।
सॉल्वर को एडवांस दी जाती थी 50 फीसदी रकम
डीसीपी राजेश एस ने बताया कि सॉल्वर को 50 फीसदी रकम एडवांस दी जाती थी और शेष परीक्षा परिणाम आने के बाद। एक से दो लाख रुपये परीक्षा देने वाले को दिए जाते थे। फर्जी दस्तावेज बनाने का काम दिनेश प्रजापति उर्फ दिनेश जोगी करता था। ज्यादातर परीक्षाओं में आईडी के तौर पर ड्राइविंग लाइसेंस लगाते थे। आवेदक के नाम और सॉल्वर के चेहरे को मिलाकर फर्जी डीएल बनाया जाता था। जिससे आवेदक के नाम पर सॉल्वर को आसानी से परीक्षा दे सके।
फोटो ब्लेडर ऐप का लेते थे सहारा, बल्लभगढ़ में बनवाते थे फर्जी डीएल
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि परीक्षा में जाने वाले सॉल्वर और आवेदक का चेहरा मिलाया जाता था। करीब 10 से 15 सॉल्वर के फोटो से सामान्य तौर पर चेहरा मिलाया जाता था। इसके बाद जिस साल्वर का चेहरा आवेदक से मिलता-जुलता होता, उसी के फोटो को आवेदक की फोटो से मैच करने के लिए फोटो ब्लेडर ऐप का इस्तेमाल किया जाता था। ऐप पर बाल और आंख आदि का मिलान करते हुए चेहरे का ज्यादातर हिस्सा मिक्स हो जाता था। ऐप से तैयार फोटो प्रवेश पत्र पर लगाया जाता था। इसी फोटो के आधार पर बल्लभगढ़ के एक कैफे पर फर्जी डीएल बनवाया जाता था।