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Noida News: एलआईसी में दूसरे की पॉलिसी पर 7.62 लाख लोन लेकर रकम हड़पी
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- पॉलिसीधारक के नाम पर दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर कराई रकम, प्राथमिकी दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की नोएडा शाखा में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोपियों ने पॉलिसी पर फर्जी दस्तावेज के जरिये 7.62 लाख रुपये का लोन हड़प लिया। इस मामले में एलआईसी के प्रशासनिक अधिकारी की शिकायत पर अदालत के आदेश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। एलआईसी प्रशासनिक अधिकारी अनिल चौहान के अनुसार, 26 सितंबर 2025 को गुरप्रीत सिंह लाम्बा की पॉलिसी के मेच्योरिटी भुगतान का आवेदन आया था। जांच में पता चला कि 25 मार्च 2022 को ही पॉलिसी पर 7,62,300 रुपये का लोन लिया जा चुका था। पॉलिसीधारक गुरप्रीत सिंह लाम्बा ने लोन लेने से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने आवेदन किया था और न ही कोई दस्तावेज जमा किए थे।
एलआईसी अधिकारियों ने लोन से जुड़े दस्तावेज की जांच की। इसमें पता चला कि रकम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की पंजाबी बाग वेस्ट शाखा के एक खाते में एनईएफटी के माध्यम से भेजी गई थी। बैंक खाते से जुड़े पहचान पत्र और पते का विवरण वास्तविक पॉलिसीधारक से अलग था। प्रशासनिक अधिकारी ने सितंबर 2025 में मामले की जानकारी मिलने के बाद बैंक में शिकायत दी थी। शुरुआती शिकायतों पर कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। अदालत के आदेश पर फेज-1 थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। एसीपी मयंक तिवारी ने बताया कि इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की नोएडा शाखा में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोपियों ने पॉलिसी पर फर्जी दस्तावेज के जरिये 7.62 लाख रुपये का लोन हड़प लिया। इस मामले में एलआईसी के प्रशासनिक अधिकारी की शिकायत पर अदालत के आदेश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। एलआईसी प्रशासनिक अधिकारी अनिल चौहान के अनुसार, 26 सितंबर 2025 को गुरप्रीत सिंह लाम्बा की पॉलिसी के मेच्योरिटी भुगतान का आवेदन आया था। जांच में पता चला कि 25 मार्च 2022 को ही पॉलिसी पर 7,62,300 रुपये का लोन लिया जा चुका था। पॉलिसीधारक गुरप्रीत सिंह लाम्बा ने लोन लेने से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने आवेदन किया था और न ही कोई दस्तावेज जमा किए थे।
एलआईसी अधिकारियों ने लोन से जुड़े दस्तावेज की जांच की। इसमें पता चला कि रकम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की पंजाबी बाग वेस्ट शाखा के एक खाते में एनईएफटी के माध्यम से भेजी गई थी। बैंक खाते से जुड़े पहचान पत्र और पते का विवरण वास्तविक पॉलिसीधारक से अलग था। प्रशासनिक अधिकारी ने सितंबर 2025 में मामले की जानकारी मिलने के बाद बैंक में शिकायत दी थी। शुरुआती शिकायतों पर कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। अदालत के आदेश पर फेज-1 थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। एसीपी मयंक तिवारी ने बताया कि इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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