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Noida News: जिम्स में स्कैन और भुगतान मॉड्यूल लॉन्च
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-बना पे मॉड्यूल लागू करने वाला देश का पहला राज्य स्तरीय मेडिकल संस्थान
-डिजिटल पर्ची बनवाना व भुगतान में होगी आसानी
-अब मरीजों को लाइन के झंझट से मिलेगी मुक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) ने मरीजों की सुविधा के लिए एक बड़ी पहल की है। अब इलाज के लिए दूरदराज से आने वाले मरीजों को पर्ची बनवाने व फीस जमा करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सोमवार को स्कैन और भुगतान मॉड्यूल लॉन्च किया गया। इससे डिजिटल माध्यम से पर्ची बनवाना और शुल्क भुगतान करना संभव होगा। अस्पताल प्रशासन ने एम्स के अलावा एबीडीएम-एबीएचए के सभी मॉड्यूल को सफलतापूर्वक लागू करने वाला भारत का पहला राज्य व पहला चिकित्सा संस्थान बनने का दावा किया है।
जिम्स में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में रोजाना काफी वृद्धि देखने को मिल रही है। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन दो हजार से अधिक लोग आ रहे है। ऐसे में पर्ची काउंटर व फीस काउंटर पर मरीजों के साथ तीमारदारों की लंबी लाइन देखी जा रही हैं। लंबी लाइनों को देखते हुए जिम्स प्रशासन की ओर से सोमवार को डिजिटलीकरण में नवीनीकरण करते हुए स्कैन और भुगतान मॉड्यूल लॉन्च किया है। इससे यहां आने वाले मरीजों को लाइन से छुटकारा मिलेगा। साथ ही कम समय में ही इलाज संभव होगा।
जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मरीजों के इलाज में हो रही देरी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में नवीनीकरण किया गया है। जिम्स में एबीएचए-एडीबीएम के स्कैन और भुगतान मॉड्यूल को लागू किया है। एनएचए ने एबीडीएम सूचीबद्ध सुविधाओं में क्यूआर-कोड आधारित समाधान स्कैन और भुगतान मॉड्यूल पेश किया है। इस प्रक्रिया से मरीजों के लिए इलाज के लिए प्रतीक्षा समय कम हो जाएगा। वहीं, उन्हें भुगतान के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी।
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- मरीजों को मिलेगा सीधे लाभ
निदेशक का कहना है कि जब कोई मरीज सुविधा केंद्र पर उपलब्ध क्यू-आर कोड को स्कैन करके भुगतान का विकल्प चुनता है, तो वह अपने एबीएचए के लंबित भुगतानों के लिए खुले ऑर्डर देख सकता है। इससे वह भुगतान की कतारों से बचकर सीधे पीएचआर एप्लिकेशन का उपयोग करके डायग्नोस्टिक टेस्ट, दवाइयां और ओपीडी पंजीकरण जैसी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए डिजिटल भुगतान कर सकता है। सफल भुगतान के बाद भुगतान की पुष्टि की डिजिटल रसीद का उपयोग करके उपयोगकर्ता सीधे सेवाओं का लाभ उठा सकता है। इनमें स्कैन एंड शेयर (ओपीडी और फार्मेसी), ई-प्रिस्क्रिप्शन, स्कैन एंड पे, एचपीआर, हेल्थ रिकॉर्ड लिंकेज आदि शामिल हैं।
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- प्राइम केयर का दूसरा बैच शुरू
जिम्स में सोमवार को तीन महीने के लिए प्राइम केयर का दूसरा बैच शुरू किया गया। इसे स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को गहन चिकित्सा में आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से लैस करने के लिए डिजाइन किया गया है। पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से यांत्रिक वेंटिलेशन प्रशिक्षण, बेहतर चिकित्सा प्रबंधन, आवश्यक कौशल कार्यशालाएं आदि विशेष कार्यक्रम शामिल किया गया है।
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-डिजिटल पर्ची बनवाना व भुगतान में होगी आसानी
-अब मरीजों को लाइन के झंझट से मिलेगी मुक्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) ने मरीजों की सुविधा के लिए एक बड़ी पहल की है। अब इलाज के लिए दूरदराज से आने वाले मरीजों को पर्ची बनवाने व फीस जमा करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सोमवार को स्कैन और भुगतान मॉड्यूल लॉन्च किया गया। इससे डिजिटल माध्यम से पर्ची बनवाना और शुल्क भुगतान करना संभव होगा। अस्पताल प्रशासन ने एम्स के अलावा एबीडीएम-एबीएचए के सभी मॉड्यूल को सफलतापूर्वक लागू करने वाला भारत का पहला राज्य व पहला चिकित्सा संस्थान बनने का दावा किया है।
जिम्स में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में रोजाना काफी वृद्धि देखने को मिल रही है। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन दो हजार से अधिक लोग आ रहे है। ऐसे में पर्ची काउंटर व फीस काउंटर पर मरीजों के साथ तीमारदारों की लंबी लाइन देखी जा रही हैं। लंबी लाइनों को देखते हुए जिम्स प्रशासन की ओर से सोमवार को डिजिटलीकरण में नवीनीकरण करते हुए स्कैन और भुगतान मॉड्यूल लॉन्च किया है। इससे यहां आने वाले मरीजों को लाइन से छुटकारा मिलेगा। साथ ही कम समय में ही इलाज संभव होगा।
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जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मरीजों के इलाज में हो रही देरी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में नवीनीकरण किया गया है। जिम्स में एबीएचए-एडीबीएम के स्कैन और भुगतान मॉड्यूल को लागू किया है। एनएचए ने एबीडीएम सूचीबद्ध सुविधाओं में क्यूआर-कोड आधारित समाधान स्कैन और भुगतान मॉड्यूल पेश किया है। इस प्रक्रिया से मरीजों के लिए इलाज के लिए प्रतीक्षा समय कम हो जाएगा। वहीं, उन्हें भुगतान के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी।
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- मरीजों को मिलेगा सीधे लाभ
निदेशक का कहना है कि जब कोई मरीज सुविधा केंद्र पर उपलब्ध क्यू-आर कोड को स्कैन करके भुगतान का विकल्प चुनता है, तो वह अपने एबीएचए के लंबित भुगतानों के लिए खुले ऑर्डर देख सकता है। इससे वह भुगतान की कतारों से बचकर सीधे पीएचआर एप्लिकेशन का उपयोग करके डायग्नोस्टिक टेस्ट, दवाइयां और ओपीडी पंजीकरण जैसी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए डिजिटल भुगतान कर सकता है। सफल भुगतान के बाद भुगतान की पुष्टि की डिजिटल रसीद का उपयोग करके उपयोगकर्ता सीधे सेवाओं का लाभ उठा सकता है। इनमें स्कैन एंड शेयर (ओपीडी और फार्मेसी), ई-प्रिस्क्रिप्शन, स्कैन एंड पे, एचपीआर, हेल्थ रिकॉर्ड लिंकेज आदि शामिल हैं।
- प्राइम केयर का दूसरा बैच शुरू
जिम्स में सोमवार को तीन महीने के लिए प्राइम केयर का दूसरा बैच शुरू किया गया। इसे स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को गहन चिकित्सा में आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से लैस करने के लिए डिजाइन किया गया है। पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से यांत्रिक वेंटिलेशन प्रशिक्षण, बेहतर चिकित्सा प्रबंधन, आवश्यक कौशल कार्यशालाएं आदि विशेष कार्यक्रम शामिल किया गया है।