{"_id":"6a1eca627bc1b370d30e5cd1","slug":"satyam-verma-accused-in-labour-violence-case-denied-bail-grnoida-news-c-23-1-lko1064-96357-2026-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: श्रमिक हिंसा मामले में आरोपी सत्यम वर्मा को नहीं मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: श्रमिक हिंसा मामले में आरोपी सत्यम वर्मा को नहीं मिली जमानत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा मामले में गिरफ्तार पत्रकार व अनुवादक सत्यम वर्मा को जिला अदालत से राहत नहीं मिली है। जिला न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया उनकी संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी अपराधों की गंभीरता और उनके संभावित सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है। इस समय आरोपी को रिहा करना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में श्रमिक औद्योगिक इकाइयों के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हिंसा हुई। फैक्टरियों के गेट जबरन खोले गए। सीसीटीवी कैमरे और कांच के शीशे तोड़े गए और अन्य सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। यह विरोध प्रदर्शन पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से संचालित किया गया था। व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों के माध्यम से श्रमिकों को उकसाने वाले संदेश प्रसारित किए गए थे। कई संदेश और संचार सामग्री ऐसी है। जिनकी जांच की जा रही है। अभियोजन ने विदेशी फंडिंग और हवाला लेनदेन का भी उल्लेख किया। आंदोलन से जुड़े कुछ व्यक्तियों के वित्तीय स्रोतों की जांच की जा रही है। सत्यम वर्मा का संबंध एक ऐसे मीडिया मंच से भी बताया गया जिसने घटनाओं का लाइव प्रसारण किया था। इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई थी। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत प्रदत्त अधिकारों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं हुई। जिस समय हिंसा हुई उस समय सत्यम वर्मा घटनास्थल से लगभग 600 किलोमीटर दूर थे।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा मामले में गिरफ्तार पत्रकार व अनुवादक सत्यम वर्मा को जिला अदालत से राहत नहीं मिली है। जिला न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया उनकी संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी अपराधों की गंभीरता और उनके संभावित सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है। इस समय आरोपी को रिहा करना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में श्रमिक औद्योगिक इकाइयों के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हिंसा हुई। फैक्टरियों के गेट जबरन खोले गए। सीसीटीवी कैमरे और कांच के शीशे तोड़े गए और अन्य सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। यह विरोध प्रदर्शन पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से संचालित किया गया था। व्हाट्सएप और टेलीग्राम समूहों के माध्यम से श्रमिकों को उकसाने वाले संदेश प्रसारित किए गए थे। कई संदेश और संचार सामग्री ऐसी है। जिनकी जांच की जा रही है। अभियोजन ने विदेशी फंडिंग और हवाला लेनदेन का भी उल्लेख किया। आंदोलन से जुड़े कुछ व्यक्तियों के वित्तीय स्रोतों की जांच की जा रही है। सत्यम वर्मा का संबंध एक ऐसे मीडिया मंच से भी बताया गया जिसने घटनाओं का लाइव प्रसारण किया था। इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई थी। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत प्रदत्त अधिकारों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं हुई। जिस समय हिंसा हुई उस समय सत्यम वर्मा घटनास्थल से लगभग 600 किलोमीटर दूर थे।
विज्ञापन