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Noida News: आवासीय प्लाट पर आरक्षण का बदलेगा नियम

Fri, 04 Oct 2024 08:17 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2024 08:17 PM IST
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Rules for reservation on residential plots will change
आवासीय प्लाट पर आरक्षण का बदलेगा नियम
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- यमुना प्राधिकरण में बड़े पैमाने पर पकड़ी गई गड़बड़ी के बाद अब आवासीय भूखंड का तय किया जाएगा साइज
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। व्यावसायिक भूखंडों की पूर्णता पर आवासीय प्लाट पर मिलने वाले आरक्षण के नियमों में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण बदलाव की तैयारी में है। इसके लिए व्यावसायिक भूखंड के साइज के मुताबिक ही आवासीय प्लॉट के आरक्षण पर निर्णय लिया जाएगा। यमुना प्राधिकरण में साढ़े सात मीटर के कियोस्क के जरिए आवासीय भूखंडों में आरक्षण का लाभ पाने की कोशिश में हुई गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया गया है। इसमें आवासीय भूखंड की साइज के अनुसार ही आरक्षण तय किया जाएगा।
औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में व्यावसायिक और औद्योगिक भूखंडों पर निर्माण पूरा करने के बाद आवासीय प्लॉट योजना में आरक्षण का प्रावधान है। इसके तहत यह माना जाता है कि व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधि करने के लिए उसे यहां आवास की जरूरत पड़ेगी। इस नियम की आड़ में साढ़े सात मीटर के कियोस्क और छोटे-छोटे व्यावसायिक भूखंड के पूर्णता प्रमाण पत्र के जरिये आवासीय प्लाट पर खेल होता है। साढ़े सात मीटर के कियोस्क के पूर्णता प्रमाण पत्र के जरिए उसे 60 मीटर से लेकर सबसे बड़े प्लाट पर स्कीम में आरक्षण मिलेगा। इसी का लाभ उठाकर आवासीय भूखंड योजनाओं में आरक्षण का खेल किया जाता है। यमुना प्राधिकरण में 10 कियोस्क आवंटियों को काम पूरा किए बिना ही मई से लेकर जुलाई की अलग-अलग तारीखों में पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके जरिये उन्हें हाल में निकली आवासीय भूखंड योजना के आरक्षण के लिए योग्य भी करार दिया गया था। हालांकि इस गड़बड़ी को पकड़े जाने के बाद पूर्णता प्रमाण पत्र को अवैध करार करते हुए आरक्षण के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
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मैनेजर से लेकर ओएसडी के खिलाफ शुरू हुई जांच
10 कियोस्क को ओएसडी स्तर पर ही जारी किए गए पूर्णता प्रमाण पत्र मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इसमें से पूरे मामले में प्रबंधक व्यावसायिक सिद्धार्थ चौधरी, उपमहाप्रबंधक अशोक कुमार और ओएसडी राजेश कुमार की भूमिका की जांच की जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि ओएसडी राजेश कुमार इससे पहले नोएडा प्राधिकरण में तीन वर्ष तक इसी पद पर रहे हैं। ऐसे में उनके स्तर पर हुई गलती की गहनता से जांच की जा रही है।
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व्यावसायिक भूखंड की पूर्णता के जरिए आवासीय प्लॉट पर आरक्षण की योग्यता के नए नियम बनाए जाएंगे। इसके लिए कमेटी का गठन कर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, यमुना प्राधिकरण
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