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Noida News: समय पर सीपीआर मिलती तो शायद बच सकती थी रोहित की जान
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समय पर सीपीआर मिलती तो शायद बच सकती थी रोहित की जान
फोटो--
-बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा जल्द स्कूलों में सीपीआर प्रशिक्षण के रखेंगे कार्यक्रम
-चिकित्सकों ने कहा धड़कन, नाड़ी बंद हो या सांस न आ रही हो तो तुरंत सीपीआर दें
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। जलपुरा स्थित उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्र रोहित के बेहोश होने पर यदि समय पर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) सहायता मिल जाती तो शायद उसकी जान बच सकती थी। स्कूल में उसकी असमय मृत्यु से सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, कक्षा में उसके सहपाठी और शिक्षक काफी उदास दिखे। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि 15 वर्ष का रोहित ह्रदय घात से उनको छोड़कर चला जाएगा।
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के सीएमएस और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौरभ श्रीवास्तव का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चे, युवा या बुजुर्ग किसी को भी त्वरित प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत हो सकती है। यदि मरीज की धड़कन या नाड़ी बंद हो गई हो या सांस रुक गई हो तो ऐसी स्थिति में तुरंत उस मरीज को प्रशिक्षित व्यक्ति से सीपीआर सहायता मिल जानी चाहिए। 70 से 80 प्रतिशत मामलों में सीपीआर तकनीक से जान बचाई जा सकती है।
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सांस लेने में थी रोहित को परेशानी
स्कूल की प्रधान शिक्षिका नूतन सक्सेना ने बताया कि दोपहर दो बजे स्कूल की छुट्टी होने ही वाली थी। इसी दौरान बाहर खेलते हुए रोहित सिंह गिर पड़ा। इस दौरान 8वीं कक्षा में ही पढ़ने वाला उसका भाई मोहित भी उसके साथ था। नूतन और अन्य शिक्षिकों ने उसे बैठाया तो रोहित बैठ गया, लेकिन उसे सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। स्कूल में उसे जीवन रक्षक घोल (ओआरएस) चम्मच से पिलाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह पी नहीं पा रहा था। मामला गंभीर होते देख उसे ऑटो में प्रधान अध्यापिका और एक शिक्षिका पास ही एक स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए। यहां उसे किसी बड़े अस्पताल ले जाने के लिए कहा तो उसे यथार्थ अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का अनुमान है कि उसे ह्रदय घात से मौत हुई है।
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क्या है सीपीआर तकनीक
सीपीआर एक तरह की मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें इंसान की सांस रुक जाने पर सांस वापस लाने तक या दिल की धड़कन सामान्य हो जाने तक छाती को दबाकर और मुंह से सांस देकर उसके दिल को दोबारा से क्रियाशील किया जाता है। इससे शरीर में पहले से मौजूद खून संचारित होने लगता है।
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अमर उजाला के सुझाव पर स्कूलों में चलाएंगे सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम
जलपुरा में 8वीं कक्षा के बच्चे की ह्रदय घात से मृत्यु बेहद दुखद घटना है। अमर उजाला का यह सुझाव बहुत अच्छा है। इसके लिए एनजीओ या अस्पतालों से बातचीत कर स्कूलों में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे बच्चों और शिक्षकों को समय पर प्राथमिक चिकित्सा मिल सकती है।
एश्वर्या लक्ष्मी, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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-बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा जल्द स्कूलों में सीपीआर प्रशिक्षण के रखेंगे कार्यक्रम
-चिकित्सकों ने कहा धड़कन, नाड़ी बंद हो या सांस न आ रही हो तो तुरंत सीपीआर दें
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। जलपुरा स्थित उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्र रोहित के बेहोश होने पर यदि समय पर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) सहायता मिल जाती तो शायद उसकी जान बच सकती थी। स्कूल में उसकी असमय मृत्यु से सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, कक्षा में उसके सहपाठी और शिक्षक काफी उदास दिखे। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि 15 वर्ष का रोहित ह्रदय घात से उनको छोड़कर चला जाएगा।
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के सीएमएस और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौरभ श्रीवास्तव का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चे, युवा या बुजुर्ग किसी को भी त्वरित प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत हो सकती है। यदि मरीज की धड़कन या नाड़ी बंद हो गई हो या सांस रुक गई हो तो ऐसी स्थिति में तुरंत उस मरीज को प्रशिक्षित व्यक्ति से सीपीआर सहायता मिल जानी चाहिए। 70 से 80 प्रतिशत मामलों में सीपीआर तकनीक से जान बचाई जा सकती है।
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सांस लेने में थी रोहित को परेशानी
स्कूल की प्रधान शिक्षिका नूतन सक्सेना ने बताया कि दोपहर दो बजे स्कूल की छुट्टी होने ही वाली थी। इसी दौरान बाहर खेलते हुए रोहित सिंह गिर पड़ा। इस दौरान 8वीं कक्षा में ही पढ़ने वाला उसका भाई मोहित भी उसके साथ था। नूतन और अन्य शिक्षिकों ने उसे बैठाया तो रोहित बैठ गया, लेकिन उसे सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। स्कूल में उसे जीवन रक्षक घोल (ओआरएस) चम्मच से पिलाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह पी नहीं पा रहा था। मामला गंभीर होते देख उसे ऑटो में प्रधान अध्यापिका और एक शिक्षिका पास ही एक स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए। यहां उसे किसी बड़े अस्पताल ले जाने के लिए कहा तो उसे यथार्थ अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का अनुमान है कि उसे ह्रदय घात से मौत हुई है।
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क्या है सीपीआर तकनीक
सीपीआर एक तरह की मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें इंसान की सांस रुक जाने पर सांस वापस लाने तक या दिल की धड़कन सामान्य हो जाने तक छाती को दबाकर और मुंह से सांस देकर उसके दिल को दोबारा से क्रियाशील किया जाता है। इससे शरीर में पहले से मौजूद खून संचारित होने लगता है।
अमर उजाला के सुझाव पर स्कूलों में चलाएंगे सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम
जलपुरा में 8वीं कक्षा के बच्चे की ह्रदय घात से मृत्यु बेहद दुखद घटना है। अमर उजाला का यह सुझाव बहुत अच्छा है। इसके लिए एनजीओ या अस्पतालों से बातचीत कर स्कूलों में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे बच्चों और शिक्षकों को समय पर प्राथमिक चिकित्सा मिल सकती है।
एश्वर्या लक्ष्मी, बेसिक शिक्षा अधिकारी