{"_id":"6465248ef3e223e92f0cef75","slug":"risk-of-online-games-lost-money-even-to-relatives-noida-news-c-1-gnd1002-541759-2023-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑनलाइन गेम्स का जोखिम : रिश्तेदारों तक के पैसे हारे तो आई अक्ल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑनलाइन गेम्स का जोखिम : रिश्तेदारों तक के पैसे हारे तो आई अक्ल
विज्ञापन
ऑनलाइन गेम्स का जोखिम : रिश्तेदारों तक के पैसे हारे तो आई अक्ल
- जल्द अमीर बनने की चाह में लगी ऑनलाइन गेम्स की लत, उड़ा रहे हजारों रुपये
हर्ष मिश्रा
नोएडा। सेक्टर-3 स्थित एक सीए फर्म में काम करने वाले नीरज कुमार शर्मा को मासिक मानदेय 15 हजार रुपये मिलता है। अतिरिक्त पैसा कमाने के लिए उन्होंने आईपीएल शुरू होते ही ऑनलाइन गेम्स में हाथ आजमाना शुरू किया। शुरूआत में उन्हें सफलता मिली। इसके बाद इसका खुमार उन्हें काफी हद तक चढ़ गया और 20 हजार रुपये दाव पर लगा दिए, लेकिन इस बार वह हार गए। वह पैसे उन्होंने अपने किसी रिश्तेदार से उधार लिए थे।
नीरज का यह प्रकरण तो केवल उदाहरण मात्र है, वास्तव में जिले के ऐसे तमाम युवा हैं जो ऑनलाइन गेम्स की लत में आर्थिक हालत के साथ-साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य को भी बिगाड़ रहे हैं। इसकी लत युवाओं में इस कदर घर कर गई है कि वह रिश्तेदारों से उधार लिए पैसे इन गेम्स में लगा रहे हैं। जल्दी अमीर बनने की चाह में सबकुछ बर्बाद होने के बाद ही इन्हें अक्ल आ रही है। इसी तरह सेक्टर -66 निवासी एमटेक छात्र मिथिलेश मिश्रा ऑनलाइन गेम्स में अपने पिता के अकाउंट से 40 हजार रुपये दांव पर लगा कर हार गए। उनका कहना है कि इस हरकत से वह परिवार की नजर में गिर चुके हैं, अब इससे तौबा कर लिया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
एडिक्शन डिसॉर्डर और इन्फ्ल्यूएंसिंग है कारण
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आरके बंसल बताते हैं कि जल्द ही कुछ बड़ा पाने के लिए लोग कई बार बड़े जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। यह एडिक्शन डिसॉर्डर है और इसके पीछे इन्फ्ल्यूएंसिंग एक बड़ां कारण है। ऑनलाइन गेम्स के प्रोमोटर खेल जगत और बॉलीवुड की वह बड़ी-बड़ी हस्तियां हैं जो लाखों लोगों के दिलों पर राज करती हैं। ऐसे में लोग इन लोगों पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं। लाखों में किसी एक या दो को सफलता मिल भी जाती है तो लोग उसी तरह की सफलता पाने के लिए बार-बार जोखिम लेते हैं। यह एडिक्शन डिसॉर्डर बच्चों के साथ-साथ 35-40 साल तक के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। हाल ही में ऐसे मामलों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
गेम छोड़ने की कहने पर हो रहे आक्रामक
डॉ. आरके बंसल बताते हैं कि ऑनलाइन गेम के लती लोगों में कई तरह की मानसिक समस्या सामने आ रही हैं। कई बच्चे तो गेम छोड़ने के नाम पर ही आक्रामक होने लगते हैं। इसके साथ ही लंबे समय तक एप गेम और ऑनलाइन गेम खेलने से साइकोसिस होने का भी खतरा रहता है। इसमें मरीज वास्तविक दुनिया से दूर हो जाता है। बच्चों का मन कोमल होता है, इसलिए वह आसानी से इसका शिकार हो जाते हैं। इसका असर सीधे उनकी पढ़ाई और व्यवहार पर पड़ता है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
ठगी से रहें सावधान
साइबर थाना इंस्पेक्टर रीता यादव कहती हैं कि जुए की लत लगाने वाले ऑनलाइन गेम्स से छात्र तो बिल्कुल ही दूर रहें। हालांकि बड़ों को भी खेलने का बहुत शौक है तो पहले उनके जोखिम समझ लें। कहीं ऐसा न हो कि आपकी सिर्फ जेब ही ढीली हो रही है। अगर लगातार हार रहे हैं तो सावधान व सतर्क हो जाएं। ठगी के शिकार होने से बचें।
विज्ञापन
- जल्द अमीर बनने की चाह में लगी ऑनलाइन गेम्स की लत, उड़ा रहे हजारों रुपये
हर्ष मिश्रा
नोएडा। सेक्टर-3 स्थित एक सीए फर्म में काम करने वाले नीरज कुमार शर्मा को मासिक मानदेय 15 हजार रुपये मिलता है। अतिरिक्त पैसा कमाने के लिए उन्होंने आईपीएल शुरू होते ही ऑनलाइन गेम्स में हाथ आजमाना शुरू किया। शुरूआत में उन्हें सफलता मिली। इसके बाद इसका खुमार उन्हें काफी हद तक चढ़ गया और 20 हजार रुपये दाव पर लगा दिए, लेकिन इस बार वह हार गए। वह पैसे उन्होंने अपने किसी रिश्तेदार से उधार लिए थे।
नीरज का यह प्रकरण तो केवल उदाहरण मात्र है, वास्तव में जिले के ऐसे तमाम युवा हैं जो ऑनलाइन गेम्स की लत में आर्थिक हालत के साथ-साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य को भी बिगाड़ रहे हैं। इसकी लत युवाओं में इस कदर घर कर गई है कि वह रिश्तेदारों से उधार लिए पैसे इन गेम्स में लगा रहे हैं। जल्दी अमीर बनने की चाह में सबकुछ बर्बाद होने के बाद ही इन्हें अक्ल आ रही है। इसी तरह सेक्टर -66 निवासी एमटेक छात्र मिथिलेश मिश्रा ऑनलाइन गेम्स में अपने पिता के अकाउंट से 40 हजार रुपये दांव पर लगा कर हार गए। उनका कहना है कि इस हरकत से वह परिवार की नजर में गिर चुके हैं, अब इससे तौबा कर लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एडिक्शन डिसॉर्डर और इन्फ्ल्यूएंसिंग है कारण
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आरके बंसल बताते हैं कि जल्द ही कुछ बड़ा पाने के लिए लोग कई बार बड़े जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। यह एडिक्शन डिसॉर्डर है और इसके पीछे इन्फ्ल्यूएंसिंग एक बड़ां कारण है। ऑनलाइन गेम्स के प्रोमोटर खेल जगत और बॉलीवुड की वह बड़ी-बड़ी हस्तियां हैं जो लाखों लोगों के दिलों पर राज करती हैं। ऐसे में लोग इन लोगों पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं। लाखों में किसी एक या दो को सफलता मिल भी जाती है तो लोग उसी तरह की सफलता पाने के लिए बार-बार जोखिम लेते हैं। यह एडिक्शन डिसॉर्डर बच्चों के साथ-साथ 35-40 साल तक के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। हाल ही में ऐसे मामलों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
गेम छोड़ने की कहने पर हो रहे आक्रामक
डॉ. आरके बंसल बताते हैं कि ऑनलाइन गेम के लती लोगों में कई तरह की मानसिक समस्या सामने आ रही हैं। कई बच्चे तो गेम छोड़ने के नाम पर ही आक्रामक होने लगते हैं। इसके साथ ही लंबे समय तक एप गेम और ऑनलाइन गेम खेलने से साइकोसिस होने का भी खतरा रहता है। इसमें मरीज वास्तविक दुनिया से दूर हो जाता है। बच्चों का मन कोमल होता है, इसलिए वह आसानी से इसका शिकार हो जाते हैं। इसका असर सीधे उनकी पढ़ाई और व्यवहार पर पड़ता है।
ठगी से रहें सावधान
साइबर थाना इंस्पेक्टर रीता यादव कहती हैं कि जुए की लत लगाने वाले ऑनलाइन गेम्स से छात्र तो बिल्कुल ही दूर रहें। हालांकि बड़ों को भी खेलने का बहुत शौक है तो पहले उनके जोखिम समझ लें। कहीं ऐसा न हो कि आपकी सिर्फ जेब ही ढीली हो रही है। अगर लगातार हार रहे हैं तो सावधान व सतर्क हो जाएं। ठगी के शिकार होने से बचें।