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Greater Noida: प्रदेश के 877 प्रोजेक्ट लापता, 398 सिर्फ एनसीआर में गायब, यूपी रेरा जानकारी एकत्र करने में जुटा

Thu, 16 Feb 2023 12:45 PM IST
अभिषेक वर्मा नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: अभिषेक वर्मा Updated Thu, 16 Feb 2023 12:45 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के 877 आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट का पता नहीं चल रहा है। दो से तीन वर्ष पहले इस प्रोजेक्टों का यूपी रेरा पंजीकरण समाप्त हो चुका है। जिनका अब कोई अपडेट नहीं मिल रहा है। इन प्रोजेक्टों में लाखों खरीदारों के पैसे फंसे हैं।

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rera does not have information about 877 residential and commercial projects in up
उत्तर प्रदेश के 877 आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्टों की जानकारी यूपी रेरा के पास नहीं है। - फोटो : सांकेतिक फोटो

विस्तार

उत्तर प्रदेश के 877 आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति के बारे में उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) के पास कोई जानकारी नहीं है। इन सभी प्रोजेक्ट का पंजीकरण दो से तीन वर्ष पहले समाप्त हो चुका है। प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत से अनजान यूपी रेरा ने बिल्डरों को तलब किया है। यूपी रेरा ने साफ कर दिया है कि इन सभी मामलों में बिल्डरों को खरीदारों का पैसा वापस करना होगा या प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 50 फीसदी खरीदारों से सहमति लेनी होगी। प्रदेश भर के इन प्रोजेक्टों में लाखों खरीदार फंसे हैं।

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यूपी रेरा में अब तक 3363 प्रोजेक्ट पंजीकरण कराए जा चुके हैं। पंजीकरण के समय बिल्डर प्रोजेक्ट से जुड़ी हर रिपोर्ट देता है। इसमें प्रोजेक्ट के पूरा करने का समय भी बताया जाता है। तय समय में बिल्डर को प्रोजेक्ट पूरा करना होता है, लेकिन पंजीकरण के बाद भी बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो सके हैं। इनमें से कई का पंजीकरण भी समाप्त हो चुका है। यूपी रेरा ने ऐसे 877 प्रोजेक्टों को चिन्हित किया है। इनमें एनसीआर के 398 और एनसीआर से बाहर के 479 प्रोजेक्ट शामिल हैं। प्रोजेक्ट पूरे हो चुके है या अधूरे है, इसकी जानकारी यूपी रेरा के पास नहीं है।
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अब इन प्रोजेक्ट के बिल्डरों को तलब किया जा रहा है। लखनऊ और ग्रेटर नोएडा स्थित कार्यालय में बिल्डरों को बुलाकर जानकारी ली जा रही है। अब तक दस से अधिक बिल्डरों के साथ बैठकें हो चुकी हैं। बैठक में यूपी रेरा ने बिल्डरों से जवाब-तलब कर प्रोजेक्ट के भविष्य पर उनका प्लान पूछा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इन सभी प्रोजेक्टों पर फैसला लिया जाएगा।

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खरीदारों का पैसा करना होगा वापस

यूपी रेरा ने स्पष्ट किया है कि बिल्डरों के सामने केवल दो विकल्प हैं। अगर बिल्डर प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकते है तो उन्हें सभी खरीदारों का पैसा वापस करना होगा। दूसरा अगर बिल्डर प्रोजेक्ट को पूरा करना चाहता है तो उसके लिए खरीदारों की सहमति लेनी होगी। सहमति 50 प्रतिशत से अधिक खरीदारों की होनी चाहिए। तभी यूपी रेरा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए समय विस्तार देगा।

बैठक से पहले स्थलीय निरीक्षण करा रहा यूपी रेरा

यूपी रेरा बिल्डरों के साथ बैठक करने से पहले प्रोजेक्टों का स्थलीय निरीक्षण करा रहा है जिससे बिल्डरों का झूठ पकड़ा जा सके। इसका फायदा भी मिला है। हाल ही में एक बैठक में बिल्डर ने प्रोजेक्ट पूरा करने और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने का दावा किया, लेकिन निरीक्षण रिपोर्ट ने पोल खोल दी। बिल्डर को केवल चार टावर की ओसी मिली थी। प्रोजेक्ट के 10 अन्य टावर के लिए ओसी नहीं जारी की गई थी। बाद में बिल्डर ने धीमी गति से काम होने की बात स्वीकार की।

 

वर्जन: जिन प्रोजेक्ट का पंजीकरण समाप्त हो चुका है। उन प्रोजेक्ट के बिल्डरों को तलब किया गया है। बैठक में उसने प्रोजेक्ट से जुड़ी हर जानकारी ली जा रही है। बिल्डरों को खरीदारों का पैसा वापस करना होगा। अगर प्रोजेक्ट पूरा करना है तो खरीदारों की सहमति देनी होगी। - राजीव कुमार, चेयरमैन यूपी रेरा

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