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दर्शकों को लुभा रही क्षेत्रीय कहानियां : योगेश वत्स
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फिल्म गदेरा का पोस्टर
- फोटो : पीलीभीत- गोरखपुर एक्सप्रेस में यात्रियों की भीड़।
रेवाड़ी। निमोठ गांव निवासी फिल्म निर्देशक योगेश वत्स ने अपनी नई ऐतिहासिक फिल्म गदेरा को अब एप्पल टीवी प्लस पर पूरी दुनिया के दर्शकों के लिए प्रस्तुत कर एक उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले यह फिल्म हिंदी में जी5 प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो चुकी है। योगेश बताते हैं कि दर्शकों को क्षेत्रीय कहानियां लुभा रही हैं।
गदेरा 1911 के ब्रिटिश उपनिवेश काल पर आधारित एक तीव्र पीरियड ड्रामा है जो उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष को दर्शाती है।
फिल्म का अधिकांश भाग हिमालयी पहाड़ी क्षेत्र में फिल्माया गया है जिसने इसके दृश्यों में प्राकृतिक सुंदरता और यथार्थवाद का अद्भुत मेल प्रस्तुत किया है।
योगेश वत्स ने अपनी फिल्मी पढ़ाई राजकीय फिल्म संस्थान रोहतक से पूरी की। उनकी पहली शॉर्ट फिल्म नंगे पांव के निशान को देश-विदेश के कई फिल्म महोत्सवों में सराहा गया।
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उनकी पहली हिंदी फीचर फिल्म हवाएं कोरोना महामारी के दौरान थिएटरों में रिलीज नहीं हो पाई, फिर भी उन्होंने अपने सिनेमा के प्रति जुनून और समर्पण को जारी रखा।
गदेरा दर्शकों को 1911 के भारत की सामाजिक-राजनीतिक जटिलताओं का सजीव अनुभव कराती है। वर्तमान में योगेश वत्स दो नई फिल्मों पर काम कर रहे हैं जिनमें सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों को भी समान रूप से जगह मिलेगी। उनकी फिल्म धुंध को कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी चुना गया है।
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गदेरा 1911 के ब्रिटिश उपनिवेश काल पर आधारित एक तीव्र पीरियड ड्रामा है जो उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष को दर्शाती है।
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फिल्म का अधिकांश भाग हिमालयी पहाड़ी क्षेत्र में फिल्माया गया है जिसने इसके दृश्यों में प्राकृतिक सुंदरता और यथार्थवाद का अद्भुत मेल प्रस्तुत किया है।
योगेश वत्स ने अपनी फिल्मी पढ़ाई राजकीय फिल्म संस्थान रोहतक से पूरी की। उनकी पहली शॉर्ट फिल्म नंगे पांव के निशान को देश-विदेश के कई फिल्म महोत्सवों में सराहा गया।
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उनकी पहली हिंदी फीचर फिल्म हवाएं कोरोना महामारी के दौरान थिएटरों में रिलीज नहीं हो पाई, फिर भी उन्होंने अपने सिनेमा के प्रति जुनून और समर्पण को जारी रखा।
गदेरा दर्शकों को 1911 के भारत की सामाजिक-राजनीतिक जटिलताओं का सजीव अनुभव कराती है। वर्तमान में योगेश वत्स दो नई फिल्मों पर काम कर रहे हैं जिनमें सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों को भी समान रूप से जगह मिलेगी। उनकी फिल्म धुंध को कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी चुना गया है।