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Noida News: प्रोफेसर की बर्खास्तगी मामले में हस्तक्षेप करने से इन्कार

Thu, 31 Jul 2025 07:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jul 2025 07:55 PM IST
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Refusal to interfere in dismissal of professor
-तीन वर्तमान और एक पूर्व छात्रा ने डीयू प्रोफेसर पर लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने हाल ही में पॉश अधिनियम के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के एक प्रोफेसर पर उनकी छात्राओं की तरफ से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच को सही ठहराया है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की संकाय सदस्य की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सिफारिश करने के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया।

उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि छात्राएं इस तरह के दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने से हिचकिचाती हैं और कई छात्राएं उपहास और अपमान का सामना करने के कारण कॉलेज भी छोड़ देती हैं। उन्होंने कहा कि पॉश अधिनियम का उद्देश्य अन्य बातों के अलावा, छात्राओं को एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण प्रदान करना और आश्वस्त करना है, जहां वे स्वतंत्र रूप से अध्ययन कर सकें। तीन छात्राओं और एक पूर्व छात्रा ने डॉ. अमित कुमार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि कुमार ने उन्हें फेसबुक मैसेंजर और व्हाट्सएप के जरिए अश्लील संदेश भेजे थे। इन आरोपों के बाद आईसीसी ने पॉश अधिनियम के तहत जांच शुरू की और पाया कि कुमार के खिलाफ प्रथम दृष्टया यौन उत्पीड़न का मामला बनता है। इसके चलते डीयू ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का पत्र जारी कर दिया। कुमार ने निष्कासन पत्र और आईसीसी के गठन, प्रक्रिया और निष्कर्षों को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है।
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