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Noida News: राव इंद्रजीत ने एसडीएम को सुनाई खरी खोटी, कहा- विधायक का नाम अनिल, सुनील नहीं, कम से कम लिखकर ले आते

Mon, 24 Nov 2025 12:59 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Mon, 24 Nov 2025 12:59 AM IST
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Rao Inderjit scolded the SDM and said, at least he should have written down the name of the MLA, not Anil or Sunil.
राव तुलाराम स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सि - फोटो : credit
रेवाड़ी। सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में राव तुलाराम स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मंच पर एसडीएम सुरेश कुमार को खरी खोटी सुना दी।
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विवाद तब बढ़ा जब एसडीएम अतिथियों का नाम मंच से ले रहे थे। विवाद कोसली से विधायक अनिल यादव के नाम को लेकर हुआ। इधर, एसडीएम सुरेश ने बताया कि मंत्री को बता दिया था कि अनिल नाम ही लिया था। वहीं, एक वीडियो सामने आई है जिसमें एसडीएम सुरेश विधायक का नाम अनिल लेते दिख रहे हैं।
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केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत को लगा कि मंच से एसडीएम ने अनिल यादव को सुनील यादव बता दिया। उसके बाद राव इंद्रजीत ने कहा कि कोसली से विधायक का नाम अनिल यादव है। एसडीएम साहब आपने गलती की है। उनका नाम सुनील यादव नहीं है। इस तरह कैसे कार्यक्रम चलेगा। कम से कम जनता के चुने हुए नुमाइंदों का नाम याद रखना चाहिए। यहां तीन विधायक बैठे हैं, रेवाड़ी से लक्ष्मण सिंह, बावल से कृष्ण कुमार और कोसली से अनिल यादव नॉट सुनील यादव। अगर पब्लिक के सामने कार्यक्रम करना है तो कम से कम नाम लिखकर तो ले आते। हम आपके बलबूते पर सरकार चला रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी और पब्लिक की है।
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नेता हर पांच साल बाद इम्तिहान देता है
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि प्रजातंत्र में हमें 5 साल के बाद इम्तिहान देना पड़ता है, लेकिन जो अधिकारी हैं, उन्हें सिर्फ एक बार इम्तिहान और इंटरव्यू देना पड़ता है। अगर वह पास हो जाता है तो 30 से 35 साल नौकरी करता है। हमें 5 साल के लिए चुनते हैं, इसलिए हमें याद रखना पड़ता है कि हमारे सहयोगी कौन हैं, जिन्होंने हमें जिताकर भेजा। हमारी पार्टी कौन है, जिन्होंने हमें टिकट दिया।



आप और हम बराबर के पब्लिक सर्वेंट: राव
राव इंद्रजीत ने अधिकारियों से कहा कि आप और हम बराबर के पब्लिक सर्वेंट हैं। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। सरकारी अधिकारियों को जहां वे नौकरी कर रहे हैं, वहां के नुमाइंदों का नाम याद रखना चाहिए। 5 साल बाद जनता चुनेगी या नहीं, यह इनके हाथ में है, लेकिन अगर आपको कोई जिम्मेदारी दी गई है, तो उसे निभाना आपका फर्ज है। यहां जिला परिषद, ब्लॉक समिति की चेयरमैन, सदस्य, पार्टी की प्रधान बैठी हैं, इन सभी को बराबर इज्जत अधिकारियों की तरफ से मिलनी चाहिए। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदेश है।
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