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Noida News: दान की साइकिल से राजू ने यूथ गेम्स विजेता को हराया
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फोटो-- -
दान की साइकिल से राजू ने यूथ गेम्स विजेता को हराया
-28 किमी की रेस को 41 मिनट 20 सेकेंड में पूरा कर पाया मुकाम
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। इंदिरा गांधी स्टेडियम से शुरू हुई साइकिल रेस में छलेरा निवासी राजू शाह ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2022 के कांस्य पदक विजेता अरशद फरीदी को हराकर स्वर्ण पदक जीता है। मूल रूप से चंपारण बिहार के रहने वाले राजू ने यह कारनामा दान दी हुई साइकिल से ही कर दिया। उन्होंने 28 किमी की रेस को 41 मिनट 20 सेकेंड में पूरा कर लिया और अरशद को पूरे एक मिनट से हराया।
कुंवर मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट व साइकिलिंग एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के संयुक्त प्रयास से आयोजित हुई साइकिल रेस में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मंगलवार को गंगा शॉपिंग कांप्लेक्स स्थित नोएडा मीडिया क्लब में राजू शाह ने बताया कि उनका जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। उनके पिता पराठे का ठेला लगाते हैं। खुद राजू एक रेस्तरां में वेटर हैं। एक फूड डिलीवरी कंपनी में डिलेवरी बॉय की नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात साइकिलिस्ट अतिन श्रीवास्तव से हुई। उनसे साइकिलिंग के शौक को साझा किया तो उन्होंने अपनी टीम में शामिल होने का न्यौता दे दिया। लोहे की पुरानी साइकिल से ही राजू की गति देख कर अतिन श्रीवास्तव प्रभावित हुए और अपनी एक साइकिल राजू को दे दी। इसके बाद करीब तीन साल के प्रशिक्षण के बाद राजू ने गुरूग्राम, लुधियाना और पंचकुला में साइकिल रेस जीतीं।
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दान की साइकिल से राजू ने यूथ गेम्स विजेता को हराया
-28 किमी की रेस को 41 मिनट 20 सेकेंड में पूरा कर पाया मुकाम
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। इंदिरा गांधी स्टेडियम से शुरू हुई साइकिल रेस में छलेरा निवासी राजू शाह ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2022 के कांस्य पदक विजेता अरशद फरीदी को हराकर स्वर्ण पदक जीता है। मूल रूप से चंपारण बिहार के रहने वाले राजू ने यह कारनामा दान दी हुई साइकिल से ही कर दिया। उन्होंने 28 किमी की रेस को 41 मिनट 20 सेकेंड में पूरा कर लिया और अरशद को पूरे एक मिनट से हराया।
कुंवर मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट व साइकिलिंग एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के संयुक्त प्रयास से आयोजित हुई साइकिल रेस में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मंगलवार को गंगा शॉपिंग कांप्लेक्स स्थित नोएडा मीडिया क्लब में राजू शाह ने बताया कि उनका जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। उनके पिता पराठे का ठेला लगाते हैं। खुद राजू एक रेस्तरां में वेटर हैं। एक फूड डिलीवरी कंपनी में डिलेवरी बॉय की नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात साइकिलिस्ट अतिन श्रीवास्तव से हुई। उनसे साइकिलिंग के शौक को साझा किया तो उन्होंने अपनी टीम में शामिल होने का न्यौता दे दिया। लोहे की पुरानी साइकिल से ही राजू की गति देख कर अतिन श्रीवास्तव प्रभावित हुए और अपनी एक साइकिल राजू को दे दी। इसके बाद करीब तीन साल के प्रशिक्षण के बाद राजू ने गुरूग्राम, लुधियाना और पंचकुला में साइकिल रेस जीतीं।
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