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Noida News: पुराने पुल पर रेल यातायात ठप, नया 20 साल से अटका
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हर साल यमुना का जलस्तर बढ़ने पर बंद करना पड़ता है पुराना पुल, लोग होते हैं परेशान
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50 से अधिक ट्रेनें रद्द हैं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी का पुराना रेलवे पुल यात्रियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को छूते ही इसे बंद करना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि कुछ दिनों में करीब 50 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गईं जबकि कई ट्रेनों के रूट बदलने पड़े।
इससे दिल्ली-शाहदरा रूट पर चलने वाली ट्रेनों पर निर्भर यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इधर, इस पुल के बगल में रेलवे की ओर से करीब दो दशक से नया पुल तैयार किया जा रहा है। इसकी समयसीमा लगातार बढ़ती जा रही है।
दो मंजिला पुराना पुल 1867 में बना था। ऊपरी हिस्से से ट्रेनें व निचले हिस्से से सड़क यातायात चलता है। वर्तमान में इसकी स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां ट्रेनों की अधिकतम गति 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित कर दी गई है। जैसे ही नदी का जलस्तर बढ़ता है रफ्तार और घटा दी जाती है। कई बार यातायात पूरी तरह बंद करना पड़ता है। इस पुल के बगल 1997-98 में नए पुल का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ और 2003 में निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया लेकिन परियोजना आज तक अधूरी है।
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रेलवे सूत्रों के अनुसार, सबसे बड़ी बाधा एलाइनमेंट को लेकर आई। शुरुआती योजना में पुल का रास्ता सलीमगढ़ किले के बेहद करीब पड़ रहा था। यह संरक्षित धरोहर है। ऐसे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 2007 में अनुमति वापस ले ली। इसके बाद 2011 में सांस्कृतिक प्रभाव आकलन समिति ने नया एलाइनमेंट सुझाया और 2012 में एएसआई से संशोधित अनुमति मिल गई। इसके बावजूद काम उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ा। नतीजा यह है कि करीब 20 साल बीतने के बाद भी नया पुल बनकर तैयार नहीं हो पाया है। 2023 में आई बाढ़ के दौरान भी कई दिनों तक रेल यातायात बाधित रहा था। उस समय उत्तर रेलवे ने दावा किया था कि नया पुल जल्द पूरा कर लिया जाएगा और काम तेजी से आगे बढ़ेगा लेकिन हालात जस के तस हैं। अब अधिकारियों का कहना है कि नया पुल लगभग तैयार है और केवल अंतिम निरीक्षण होना बाकी है। इस साल के अंत तक इसे शुरू कर दिया जाएगा।
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50 से अधिक ट्रेनें रद्द हैं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी का पुराना रेलवे पुल यात्रियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को छूते ही इसे बंद करना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि कुछ दिनों में करीब 50 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गईं जबकि कई ट्रेनों के रूट बदलने पड़े।
इससे दिल्ली-शाहदरा रूट पर चलने वाली ट्रेनों पर निर्भर यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इधर, इस पुल के बगल में रेलवे की ओर से करीब दो दशक से नया पुल तैयार किया जा रहा है। इसकी समयसीमा लगातार बढ़ती जा रही है।
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दो मंजिला पुराना पुल 1867 में बना था। ऊपरी हिस्से से ट्रेनें व निचले हिस्से से सड़क यातायात चलता है। वर्तमान में इसकी स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां ट्रेनों की अधिकतम गति 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित कर दी गई है। जैसे ही नदी का जलस्तर बढ़ता है रफ्तार और घटा दी जाती है। कई बार यातायात पूरी तरह बंद करना पड़ता है। इस पुल के बगल 1997-98 में नए पुल का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ और 2003 में निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया लेकिन परियोजना आज तक अधूरी है।
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रेलवे सूत्रों के अनुसार, सबसे बड़ी बाधा एलाइनमेंट को लेकर आई। शुरुआती योजना में पुल का रास्ता सलीमगढ़ किले के बेहद करीब पड़ रहा था। यह संरक्षित धरोहर है। ऐसे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 2007 में अनुमति वापस ले ली। इसके बाद 2011 में सांस्कृतिक प्रभाव आकलन समिति ने नया एलाइनमेंट सुझाया और 2012 में एएसआई से संशोधित अनुमति मिल गई। इसके बावजूद काम उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ा। नतीजा यह है कि करीब 20 साल बीतने के बाद भी नया पुल बनकर तैयार नहीं हो पाया है। 2023 में आई बाढ़ के दौरान भी कई दिनों तक रेल यातायात बाधित रहा था। उस समय उत्तर रेलवे ने दावा किया था कि नया पुल जल्द पूरा कर लिया जाएगा और काम तेजी से आगे बढ़ेगा लेकिन हालात जस के तस हैं। अब अधिकारियों का कहना है कि नया पुल लगभग तैयार है और केवल अंतिम निरीक्षण होना बाकी है। इस साल के अंत तक इसे शुरू कर दिया जाएगा।