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हरियाणा के ध्यानार्थ : 41 साल बाद तैयार होगी 32 गांवों की शुद्ध खतौनी
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फोटो :
41 साल बाद तैयार होगी 32 गांवों की शुद्ध खतौनी
- हरियाणा सीमा से लगे है जिले के 32 गांव, वर्ष 1982 में तैयार होनी थी
- पहले बनाया जाएगा झिल्ली नक्शा, सर्वे की दो टीमें तैनात, अन्य जिलों और शासन से मांगे अन्य कर्मचारी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। हरियाणा सीमा से सटे जिले के 32 गांवों की शुद्ध खतौनी 41 वर्ष बाद तैयार होगी। प्रशासन ने शुद्ध खतौनी बनाने का काम शुरू कर दिया है। सर्वे विभाग की दो टीम गांव-गांव जाकर मुआयना कर रही हैं। सबसे पहले टीम सभी गांवों का झिल्ली नक्शा तैयार होगा। प्रशासन ने शासन और अन्य जिलों से सर्वे के लिए कर्मचारी मांगे हैं। प्रशासन ने छह माह के अंदर शुद्ध खतौनी तैयार करने का दावा किया है। इससे हरियाणा के साथ जारी विवाद समाप्त करने में आसानी होगी।
गौतमबुद्ध नगर के 32 गांव हरियाणा की सीमा से लगे हैं। जहां दोनों राज्यों के किसानों के बीच जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। वर्ष 1974 में दीक्षित अवार्ड के समय सीमांकन कर दिया गया था, लेकिन तब से अब तक जिले के गांवों की शुद्ध खतौनी तैयार नहीं की जा सकी। इसी वजह से जमीन का विवाद खत्म नहीं हो पाया। वर्ष 1982 में शुद्ध खतौनी बनाने का आदेश हुआ थ, लेकिन तब से अब तक खतौनी नहीं बनाई जा सकी।
अधिकारियों ने बताया कि गांवों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। जिसके आधार पर झिल्ली नक्शा तैयार किया जाएगा। पुराने नक्शा की मदद से यह तैयार होगा। नक्शे में पुराने नंबरों से बने नए नंबरों को दर्ज किया जाएगा। उसके बाद जमीन के कब्जा धारकों का नाम दर्ज होगा। फिर नंबर व नामाें की पर्ची तैयार कर गांवों में वितरित की जाएगी। अफसरों ने बताया कि अगर कोई आपत्ति करता है तो उसका निस्तारण कराया जाएगा। दोनों पक्ष अगर नहीं मानेंगे तो फिर विभाग अंतिम निर्णय करेगा। उसके बाद शुद्ध खतौनी तैयार होगी। छह माह के अंदर सभी गांवों की शुद्ध खतौनी तैयार करने का लक्ष्य तय किया है।
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देरी का कारण नहीं बता पा रहे अधिकारी
जिले के 32 गांवों की जमीन की शुद्ध खतौनी 41 वर्ष पहले बन जानी थी, लेकिन अब तक तैयार नहीं हो सकी। जिस कारण हरियाणा और यूपी के किसानों की जमीन का विवाद बना हुआ है। वहीं अफसर भी देरी का कारण नहीं बता पा रहे है। कभी कर्मचारियों की कमी तो कभी अन्य अड़चनों का हवाला दिया जा रहा है। जबकि हाईकोर्ट भी जमीन चिन्हित करने का आदेश दे चुकी है। उसके बाद भी देरी की गई।
सर्वे विभाग के दो और चकबंदी विभाग के तीन लेखपालों की दो टीम बना दी है। जो गांवों का सर्वे कर झिल्ली नक्शा तैयार करेंगे। छह माह के अंदर सभी 32 गांवों की शुद्ध खतौनी बना ली जाएगी। अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग शासन से की गई हैं। - भैरपाल सिंह, सहायक अभिलेख अधिकारी गौतमबुद्ध नगर
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41 साल बाद तैयार होगी 32 गांवों की शुद्ध खतौनी
- हरियाणा सीमा से लगे है जिले के 32 गांव, वर्ष 1982 में तैयार होनी थी
- पहले बनाया जाएगा झिल्ली नक्शा, सर्वे की दो टीमें तैनात, अन्य जिलों और शासन से मांगे अन्य कर्मचारी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। हरियाणा सीमा से सटे जिले के 32 गांवों की शुद्ध खतौनी 41 वर्ष बाद तैयार होगी। प्रशासन ने शुद्ध खतौनी बनाने का काम शुरू कर दिया है। सर्वे विभाग की दो टीम गांव-गांव जाकर मुआयना कर रही हैं। सबसे पहले टीम सभी गांवों का झिल्ली नक्शा तैयार होगा। प्रशासन ने शासन और अन्य जिलों से सर्वे के लिए कर्मचारी मांगे हैं। प्रशासन ने छह माह के अंदर शुद्ध खतौनी तैयार करने का दावा किया है। इससे हरियाणा के साथ जारी विवाद समाप्त करने में आसानी होगी।
गौतमबुद्ध नगर के 32 गांव हरियाणा की सीमा से लगे हैं। जहां दोनों राज्यों के किसानों के बीच जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। वर्ष 1974 में दीक्षित अवार्ड के समय सीमांकन कर दिया गया था, लेकिन तब से अब तक जिले के गांवों की शुद्ध खतौनी तैयार नहीं की जा सकी। इसी वजह से जमीन का विवाद खत्म नहीं हो पाया। वर्ष 1982 में शुद्ध खतौनी बनाने का आदेश हुआ थ, लेकिन तब से अब तक खतौनी नहीं बनाई जा सकी।
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अधिकारियों ने बताया कि गांवों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। जिसके आधार पर झिल्ली नक्शा तैयार किया जाएगा। पुराने नक्शा की मदद से यह तैयार होगा। नक्शे में पुराने नंबरों से बने नए नंबरों को दर्ज किया जाएगा। उसके बाद जमीन के कब्जा धारकों का नाम दर्ज होगा। फिर नंबर व नामाें की पर्ची तैयार कर गांवों में वितरित की जाएगी। अफसरों ने बताया कि अगर कोई आपत्ति करता है तो उसका निस्तारण कराया जाएगा। दोनों पक्ष अगर नहीं मानेंगे तो फिर विभाग अंतिम निर्णय करेगा। उसके बाद शुद्ध खतौनी तैयार होगी। छह माह के अंदर सभी गांवों की शुद्ध खतौनी तैयार करने का लक्ष्य तय किया है।
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देरी का कारण नहीं बता पा रहे अधिकारी
जिले के 32 गांवों की जमीन की शुद्ध खतौनी 41 वर्ष पहले बन जानी थी, लेकिन अब तक तैयार नहीं हो सकी। जिस कारण हरियाणा और यूपी के किसानों की जमीन का विवाद बना हुआ है। वहीं अफसर भी देरी का कारण नहीं बता पा रहे है। कभी कर्मचारियों की कमी तो कभी अन्य अड़चनों का हवाला दिया जा रहा है। जबकि हाईकोर्ट भी जमीन चिन्हित करने का आदेश दे चुकी है। उसके बाद भी देरी की गई।
सर्वे विभाग के दो और चकबंदी विभाग के तीन लेखपालों की दो टीम बना दी है। जो गांवों का सर्वे कर झिल्ली नक्शा तैयार करेंगे। छह माह के अंदर सभी 32 गांवों की शुद्ध खतौनी बना ली जाएगी। अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग शासन से की गई हैं। - भैरपाल सिंह, सहायक अभिलेख अधिकारी गौतमबुद्ध नगर