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Noida News: प्रदेश में 11 नए जिले बनाने के मिले प्रस्ताव, 125 गांव जरूरी
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नए जिले बनाने के लिए चार लाख से अधिक आबादी व 80 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल होना चाहिए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में 11 नए जिले बनाने के लिए पुनर्गठन उप समिति के समक्ष प्रस्ताव आए हैं। जो भी नए जिले बनेंगे उनकी चार लाख से अधिक आबादी होनी चाहिए और 80,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल होना अनिवार्य होगा।
संबंधित जिले में 125 से 200 गांव होने चाहिए। चंडीगढ़ के सिविल सचिवालय में मंगलवार को पुनर्गठन उप-समिति की पांचवीं बैठक आयोजित हुई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा के विकास एवं पंचायत और खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता और जनप्रतिनिधियों की मांगों के अनुसार प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक के बाद प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए मंत्री पंवार ने बताया कि अब तक पुनर्गठन उप-समिति को 73 प्रस्ताव मिले हैं। इनमें 11 नए जिले, 14 उपमंडल, 4 तहसील और 27 उप-तहसील बनाने के प्रस्ताव शामिल हैं। नए जिले के लिए असंध, नारायणगढ़, मानेसर, पिहोवा, बरवाला, सफीदों, पटौदी, डबवाली, हांसी, गोहाना व रनियां के नाम प्रस्तावित हैं।
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समिति ने गांव खुंगा (उपमंडल उचाना) को उपमंडल जींद और गांव खानपुर रोरण (तहसील पिहोवा) में शामिल करने की मंजूरी के लिए सरकार के पास सिफारिश भेजी है। मंत्री ने यह भी बताया कि समिति ने उपमंडल, तहसील और उप-तहसील बनाने के लिए भी अलग-अलग मानदंड तय किए हैं।
अब बैठक में लिए गए निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे। बैठक में कमेटी के सदस्यों के रूप में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद रहे।
इस साल नहीं बने नए जिले तो करना होगा 18 माह इंतजार
प्रदेश में 31 दिसंबर तक नए जिलों और तहसीलों को बनाने का निर्णय लेना होगा। यदि निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं हुआ तो करीब 18 माह का इंतजार करना पड़ सकता है। इसके पीछे यही कारण है कि अगले वर्ष अप्रैल से जनगणना का कार्य शुरू हो रहा है। ऐसे में प्रशासनिक सीमाओं में 31 दिसंबर तक ही बदलाव किया जा सकता है और बाद में जून 2027 में ही आगामी कार्रवाई हो सकती है।
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में 11 नए जिले बनाने के लिए पुनर्गठन उप समिति के समक्ष प्रस्ताव आए हैं। जो भी नए जिले बनेंगे उनकी चार लाख से अधिक आबादी होनी चाहिए और 80,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल होना अनिवार्य होगा।
संबंधित जिले में 125 से 200 गांव होने चाहिए। चंडीगढ़ के सिविल सचिवालय में मंगलवार को पुनर्गठन उप-समिति की पांचवीं बैठक आयोजित हुई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा के विकास एवं पंचायत और खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता और जनप्रतिनिधियों की मांगों के अनुसार प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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बैठक के बाद प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए मंत्री पंवार ने बताया कि अब तक पुनर्गठन उप-समिति को 73 प्रस्ताव मिले हैं। इनमें 11 नए जिले, 14 उपमंडल, 4 तहसील और 27 उप-तहसील बनाने के प्रस्ताव शामिल हैं। नए जिले के लिए असंध, नारायणगढ़, मानेसर, पिहोवा, बरवाला, सफीदों, पटौदी, डबवाली, हांसी, गोहाना व रनियां के नाम प्रस्तावित हैं।
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समिति ने गांव खुंगा (उपमंडल उचाना) को उपमंडल जींद और गांव खानपुर रोरण (तहसील पिहोवा) में शामिल करने की मंजूरी के लिए सरकार के पास सिफारिश भेजी है। मंत्री ने यह भी बताया कि समिति ने उपमंडल, तहसील और उप-तहसील बनाने के लिए भी अलग-अलग मानदंड तय किए हैं।
अब बैठक में लिए गए निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे। बैठक में कमेटी के सदस्यों के रूप में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद रहे।
इस साल नहीं बने नए जिले तो करना होगा 18 माह इंतजार
प्रदेश में 31 दिसंबर तक नए जिलों और तहसीलों को बनाने का निर्णय लेना होगा। यदि निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं हुआ तो करीब 18 माह का इंतजार करना पड़ सकता है। इसके पीछे यही कारण है कि अगले वर्ष अप्रैल से जनगणना का कार्य शुरू हो रहा है। ऐसे में प्रशासनिक सीमाओं में 31 दिसंबर तक ही बदलाव किया जा सकता है और बाद में जून 2027 में ही आगामी कार्रवाई हो सकती है।