फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Problem for Rohingyas in Haryana as NRC may be implemented

एनआरसी के फंदे में हरियाणा में बसे रोहिंग्या मुसलमान

Wed, 18 Sep 2019 10:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 10:18 PM IST
विज्ञापन
Problem for Rohingyas in Haryana  as NRC may be implemented
नगीना। म्यांमार में एक साल पहले हुए नरसंहार को भले ही दुनिया भूल गई हो लेकिन उसकी जद में आए रोहिंग्या मुसलमानों पर फिर से एक नई मुसीबत एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) के रूप में आती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा प्रदेश में भी एनआरसी लागू करने का एलान कर चुके है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी समर्थन में हैं तो, पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला सरकार की खुली मुखालफत पर उतर आए हैं। नूंह जिले में बसे करीब 400 रोहिंग्या मुसलमानों की हालत यहां बद से बदतर है। वैसे जिला प्रशासन के सही रवैये से खुद को ये सुरक्षित महसूस करते हैं। अगर यहां एनआरसी लागू होती है तो इन परिवारों पर फिर से गाज गिरना तय है।
विज्ञापन

दरअसल, हाल ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा में भी एनआरसी लागू करने का एलान किया है। ऐसे में प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर निश्चित रूप से संकट आएगा। इसलिए ऐसे लोग फिलहाल डर के साए में जी रहे हैं। हालांकि फिलहाल उनके बच्चे यहां के सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं और दोपहर बाद उर्दू भाषा की पढ़ाई अलग से संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से कराई जा रही है।
विज्ञापन

शाहपुर नंगली गांव में बने कई कैंप तो ऐसे हैं जिसमें दो परिवार एक ही कैंप में रह रहे हैं। महिला परवीना, मोहम्मद यूनुस, ताहिर और मोहम्मद अयाश कहते हैं कि दुनिया ही हमारे लिए जहन्नुम बन चुकी है? आखिर हम इंसान हैं, हमें म्यांमार से लेकर पूरी दुनिया में गुनहगार ठहराया जा रहा है। ऐसा हमने क्या किया है जो हर कोई हमें शक की नजर से देखता है? हम हिंदुस्तान में भी 2010 से रह रहे हैं, यहां के जिला प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है और हम भी पूरा सहयोग उन्हें देते हैं, कई अधिकारी बीच-बीच में आते रहते हैं। वो बताते हैं कि 2018 में 2 साल के लिए यानी 2020 तक संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से हमारा पहचान पत्र बना है हमें बीच-बीच में वहां से पढ़ाई लिखाई का सहयोग मिल रहा है। अगर भारत सरकार ऐसा सोचती है एनआरसी बनाकर हमें बाहर निकाला जाए तो हम तैयार हैं लेकिन इससे पहले संयुक्त राष्ट्र संघ हमें सुरक्षित जगह भेजने का प्रबंध करें। जहां हम खुशहाल जीवन जी सकें। यहां पर छोटी-छोटी दुकानें झोपड़ पट्टी में खोल रखी है, कुछ रेहड़ी लगाते हैं ऐसे ही काम चल रहा है, अधिकतर मजदूरी का काम करते हैं। कुछ कैंप में छोटे-छोटे टेलीविजन लगे हुए हैं जिन पर छोटे-छोटे बच्चे फिल्म, समाचार देखते हैं और अपना मनोरंजन करते हैं। अधिकतर कैप बच्चों के पास कपड़ों की कमी है। इधर-उधर अर्धनग्न बच्चे दिखाई देते हैं। दरअसल, भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान हैं तो हरियाणा के कई जिलों में रोहिंग्या मुसलमान रहते है। उनमें फरीदाबाद, नूंह, मेवात और पलवल में सबसे ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान है।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या कहना है रोहिंग्याओं का?
करीब 400 रोहिंग्या परिवारों के घर हैं नूंह जिला में है। यदि हरियाणा में असम की तर्ज पर एनआरसी लागू किया गया तो इसका सबसे ज्यादा असर नूंह जिले में देखने को मिलेगा। हम भी अपने वतन लौटना चाहते हैं, लेकिन जब तक हमारे देश म्यांमार में हालात ठीक नहीं हो जाते हमें यहीं रहने दिया जाए।

कई स्थानों पर बरसे रोहिंग्या
जिला जिला उपायुक्त पंकज कुमार ने बताया कि नूंह जिले में रोहिंग्या परिवार नूंह के बस अड्डे के पास, गांव शाहपुर नंगली, चंदेनी, जोगीपुर और फिरोजपुर नमक में रह रहे हैं। इनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं इनसे किसी भी प्रकार का खतरा प्रशासन को नहीं है उन्हें पूरी सुरक्षा दी जा रही है संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से उन्हें आईडी कार्ड दिए हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed