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Noida News: जेल भेजे गए बंदी की इलाज के दौरान मौत, फूटा आक्रोश
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जेल भेजे गए बंदी की इलाज के दौरान मौत, फूटा आक्रोश
- परिजन ने दुष्कर्म के केस में फंसाने और आईओ पर कार्रवाई की मांग कर लगाया जाम
- बीमार युवक को जेल भेजने का आरोप, तीन स्थानों पर गुस्साई भीड़ ने जमकर किया हंगामा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/जेवर। नाबालिग किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म के केस में सात दिसंबर को जेल भेजे गए बंदी राहुल (28) की मौत के बाद सोमवार शाम ग्रामीणों को आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने जांच अधिकारी पर बीमार युवक को केस में फंसाने का आरोप लगा जेवर में शव रखकर हंगामा किया। यूपी पुलिस में तैनात राहुल के भाई बंटी ने जांच अधिकारी और पीड़िता के परिजन पर कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत देकर केस दर्ज करने की मांग की। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी ग्रामीणों को समझा बुझाकर जाम खुलवाने का प्रयास करते रहे। हालांकि परिजन देर रात तक सड़क पर प्रदर्शन करते रहे।
जेवर के आरआर टाउनशिप के रोही निवासी राजपाल का बेटा राहुल, भाई नायक और साले जीतेश पर एक व्यक्ति ने नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगाया था। नाबालिग को मुक्त कराने के बाद पुलिस ने उसके बयान के आधार पर दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धारा बढ़ाकर तीनों आरोपियों को 7 दिसंबर को जेल भेज दिया। राहुल को तबीयत बिगड़ने पर रविवार रात ढाई बजे जिम्स में भर्ती कराया गया था। सोमवार दोपहर लगभग पौने चार बजे उसने दम तोड़ दिया।
पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर जेवर में पहुंच गए। परिजन व ग्रामीणों ने शाम छह बजे जेवर कोतवाली का घेराव कर जाम लगा दिया। ग्रामीणों व परिजन ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चौराहे पर पहुंचकर खुर्जा, पलवल, और झाजर रबुपूरा मार्ग को जाम कर दिया। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों के समझाने पर भी लोग जांच अधिकारी पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। बाद में आला अधिकारी और आसपास के थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया।
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तीन साल से चल रहा था इलाज, पत्नी का भाई था नामजद
परिजन ने बताया कि राहुल का पिछले तीन साल से एम्स से इलाज चल रहा था। राहुल विवाहित था और उसके तीन बच्चे भी हैं। परिजनों का दावा है कि नाबालिग के घरवालों ने राहुल की पत्नी के भाई जीतेश पर अपहरण का केस दर्ज कराया था। लेकिन पुलिस ने दूसरे पक्ष से साठगांठ कर राहुल और नायक को भी जेल भेज दिया था। परिजन का आरोप है कि जांच अधिकारी की लापरवाही से ही राहुल की जान गई है।
राहुल का भाई भी इसी केस में उसके साथ जेल में आया था। वह जेल में ही है। रविवार रात तबीयत बिगड़ने पर राहुल को तुरंत जिम्स अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। सोमवार दोपहर राहुल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। राहुल को बीपी, थायराइड बढ़ने आदि की परेशानी थी। - अरुण प्रताप सिंह, जेल अधीक्षक
नाबालिग पीड़िता के पिता की शिकायत पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था। नाबालिग की बरामदगी और न्यायालय में कराए गए बयान के आधार पर अन्य धाराएं बढ़ाईं गई और राहुल को जेल भेजा गया। पुलिस पर लगाए जा रहे सभी आरोप को निराधार हैं। - एडीसीपी अशोक कुमार
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- परिजन ने दुष्कर्म के केस में फंसाने और आईओ पर कार्रवाई की मांग कर लगाया जाम
- बीमार युवक को जेल भेजने का आरोप, तीन स्थानों पर गुस्साई भीड़ ने जमकर किया हंगामा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/जेवर। नाबालिग किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म के केस में सात दिसंबर को जेल भेजे गए बंदी राहुल (28) की मौत के बाद सोमवार शाम ग्रामीणों को आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों ने जांच अधिकारी पर बीमार युवक को केस में फंसाने का आरोप लगा जेवर में शव रखकर हंगामा किया। यूपी पुलिस में तैनात राहुल के भाई बंटी ने जांच अधिकारी और पीड़िता के परिजन पर कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत देकर केस दर्ज करने की मांग की। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी ग्रामीणों को समझा बुझाकर जाम खुलवाने का प्रयास करते रहे। हालांकि परिजन देर रात तक सड़क पर प्रदर्शन करते रहे।
जेवर के आरआर टाउनशिप के रोही निवासी राजपाल का बेटा राहुल, भाई नायक और साले जीतेश पर एक व्यक्ति ने नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगाया था। नाबालिग को मुक्त कराने के बाद पुलिस ने उसके बयान के आधार पर दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धारा बढ़ाकर तीनों आरोपियों को 7 दिसंबर को जेल भेज दिया। राहुल को तबीयत बिगड़ने पर रविवार रात ढाई बजे जिम्स में भर्ती कराया गया था। सोमवार दोपहर लगभग पौने चार बजे उसने दम तोड़ दिया।
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पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर जेवर में पहुंच गए। परिजन व ग्रामीणों ने शाम छह बजे जेवर कोतवाली का घेराव कर जाम लगा दिया। ग्रामीणों व परिजन ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चौराहे पर पहुंचकर खुर्जा, पलवल, और झाजर रबुपूरा मार्ग को जाम कर दिया। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों के समझाने पर भी लोग जांच अधिकारी पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। बाद में आला अधिकारी और आसपास के थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया।
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तीन साल से चल रहा था इलाज, पत्नी का भाई था नामजद
परिजन ने बताया कि राहुल का पिछले तीन साल से एम्स से इलाज चल रहा था। राहुल विवाहित था और उसके तीन बच्चे भी हैं। परिजनों का दावा है कि नाबालिग के घरवालों ने राहुल की पत्नी के भाई जीतेश पर अपहरण का केस दर्ज कराया था। लेकिन पुलिस ने दूसरे पक्ष से साठगांठ कर राहुल और नायक को भी जेल भेज दिया था। परिजन का आरोप है कि जांच अधिकारी की लापरवाही से ही राहुल की जान गई है।
राहुल का भाई भी इसी केस में उसके साथ जेल में आया था। वह जेल में ही है। रविवार रात तबीयत बिगड़ने पर राहुल को तुरंत जिम्स अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। सोमवार दोपहर राहुल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। राहुल को बीपी, थायराइड बढ़ने आदि की परेशानी थी। - अरुण प्रताप सिंह, जेल अधीक्षक
नाबालिग पीड़िता के पिता की शिकायत पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था। नाबालिग की बरामदगी और न्यायालय में कराए गए बयान के आधार पर अन्य धाराएं बढ़ाईं गई और राहुल को जेल भेजा गया। पुलिस पर लगाए जा रहे सभी आरोप को निराधार हैं। - एडीसीपी अशोक कुमार