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कोरोना काल में निगम के मौजूदा व पूर्व कर्मियों को हुई सबसे ज्यादा तकलीफ: हाईकोर्ट
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नई दिल्ली। कोरोना काल में वेतन न मिलने से निगम के मौजूदा कर्मचारियों को वेतन व पूर्व कर्मचारियों को पेंशन न मिलने से सबसे ज्यादा तकलीफ हुई है। यह बात हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कही। हाईकोर्ट ने अप्रैल से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उत्तरी निगम द्वारा पेंशन न दिए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा यह किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा कि इन कर्मचारियों को पूरी तरह असहाय कर दिया जाए जबकि अन्य लोगों को कुछ न कुछ दिया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा उम्मीद है कि एमसीडी दिवाली तक बकाये का भुगतान कर देगी।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली व न्यायमूर्ति सुब्रमोणियम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि असली तकलीफ इन कर्मचारियों और परिजनों ने झेली है क्योंकि इनके संसाधन बेहद सीमित हैं और उनका यह कोरोना काल में प्रयोग कर चुके हैं। अब इनके पास कुछ नहीं बचा है।
खंडपीठ ने कहा कि निगम और खास तौर से उत्तरी दिल्ली नगर निगम इन कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन जारी करने के लिए कदम उठाएगी क्योंकि दिवाली बेहद नजदीक है। ये मत भूलिए ये त्योहारी सीजन है और अपने परिवारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ये लोग कहां जाएंगे। इनमें कई बुजुर्ग व बीमार लोग भी हैं जो इलाज के लिए इंतजार नहीं कर सकते।
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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगमों ने एक बार फिर दिल्ली सरकार पर देय फंड का भुगतान न करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि जिस तरह निगम की आय प्रभावित हुई है, उसी तरह दिल्ली सरकार की आय भी प्रभावित हुई है। दिल्ली सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार उसे दस हजार करोड़ से ज्यादा का फंड जल्द जारी करेगी।
इस पर केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता अनिल सोनी ने इस दावे पर आपत्ति करते हुए कहा कि उन्हें इस पर कुछ कहने के लिए सरकार से निर्देश लेना होगा। हाईकोर्ट ने कहा वह सरकार और उसकी एजेंसियों के बीच पंच नहीं बन सकती और न ही उनके बजट पर विचार कर सकती है, न ही यह बता सकती है कि किसकी गलती है। - एजेंसी
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली व न्यायमूर्ति सुब्रमोणियम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि असली तकलीफ इन कर्मचारियों और परिजनों ने झेली है क्योंकि इनके संसाधन बेहद सीमित हैं और उनका यह कोरोना काल में प्रयोग कर चुके हैं। अब इनके पास कुछ नहीं बचा है।
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खंडपीठ ने कहा कि निगम और खास तौर से उत्तरी दिल्ली नगर निगम इन कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन जारी करने के लिए कदम उठाएगी क्योंकि दिवाली बेहद नजदीक है। ये मत भूलिए ये त्योहारी सीजन है और अपने परिवारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ये लोग कहां जाएंगे। इनमें कई बुजुर्ग व बीमार लोग भी हैं जो इलाज के लिए इंतजार नहीं कर सकते।
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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगमों ने एक बार फिर दिल्ली सरकार पर देय फंड का भुगतान न करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि जिस तरह निगम की आय प्रभावित हुई है, उसी तरह दिल्ली सरकार की आय भी प्रभावित हुई है। दिल्ली सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार उसे दस हजार करोड़ से ज्यादा का फंड जल्द जारी करेगी।
इस पर केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता अनिल सोनी ने इस दावे पर आपत्ति करते हुए कहा कि उन्हें इस पर कुछ कहने के लिए सरकार से निर्देश लेना होगा। हाईकोर्ट ने कहा वह सरकार और उसकी एजेंसियों के बीच पंच नहीं बन सकती और न ही उनके बजट पर विचार कर सकती है, न ही यह बता सकती है कि किसकी गलती है। - एजेंसी