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Noida News: प्रदूषण और फास्टफूड से घट रही प्रजनन क्षमता
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- देर से शादी, फास्टफूड, तनाव और नींद की कमी से बढ़ रहीं बांझपन की समस्याएं
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बदलती जीवनशैली और तेजी से बढ़ते प्रदूषण का असर अब लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। अधिक उम्र में शादी, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, तनाव, अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद की कमी को प्रजनन क्षमता प्रभावित होने की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण के संपर्क में लंबे समय तक रहने और अस्वास्थ्यकर खानपान से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता तथा महिलाओं में अंडाणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि भंडारी ने बताया कि हवा में कार्बन तत्व समेत कई हानिकारक गैसों और प्रदूषकों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, लोगों के खानपान में भी तेजी से बदलाव आया है। पौष्टिक भोजन की जगह फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। इसका सीधा या अप्रत्यक्ष असर प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम होने के साथ उनकी गतिशीलता और गुणवत्ता प्रभावित होने की समस्या भी देखी जा रही है। कुछ मामलों में शुक्राणुओं के डीएनए को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। वहीं, महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता स्वाभाविक रूप से कम होती जाती है। ऐसे में देर से शादी और गर्भधारण में देरी परेशानी को और बढ़ा सकती है।
आईवीएफ में एआई तकनीक से मिल रही मदद
बांझपन के उपचार में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। डॉ. भंडारी के अनुसार, आईवीएफ उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे भ्रूण और प्रजनन कोशिकाओं के आकलन में चिकित्सकों को मदद मिलती है तथा बेहतर गुणवत्ता वाले विकल्पों की पहचान करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। उनका कहना है कि देर रात तक जागना, अधूरी नींद, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और पौष्टिक आहार का अभाव भी प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। धूम्रपान और शराब का सेवन इस जोखिम को और बढ़ा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई जोखिमों को कम किया जा सकता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
-धूम्रपान, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं।
-फास्ट फूड को सीमित मात्रा में लें और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें।
-फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं।
-रोजाना 6-8 घंटे की पर्याप्त और नियमित नींद लें।
-देर रात तक जागने से बचें।
-नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
-तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। बदलती जीवनशैली और तेजी से बढ़ते प्रदूषण का असर अब लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। अधिक उम्र में शादी, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, तनाव, अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद की कमी को प्रजनन क्षमता प्रभावित होने की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण के संपर्क में लंबे समय तक रहने और अस्वास्थ्यकर खानपान से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता तथा महिलाओं में अंडाणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि भंडारी ने बताया कि हवा में कार्बन तत्व समेत कई हानिकारक गैसों और प्रदूषकों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, लोगों के खानपान में भी तेजी से बदलाव आया है। पौष्टिक भोजन की जगह फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। इसका सीधा या अप्रत्यक्ष असर प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम होने के साथ उनकी गतिशीलता और गुणवत्ता प्रभावित होने की समस्या भी देखी जा रही है। कुछ मामलों में शुक्राणुओं के डीएनए को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। वहीं, महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता स्वाभाविक रूप से कम होती जाती है। ऐसे में देर से शादी और गर्भधारण में देरी परेशानी को और बढ़ा सकती है।
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आईवीएफ में एआई तकनीक से मिल रही मदद
बांझपन के उपचार में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। डॉ. भंडारी के अनुसार, आईवीएफ उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे भ्रूण और प्रजनन कोशिकाओं के आकलन में चिकित्सकों को मदद मिलती है तथा बेहतर गुणवत्ता वाले विकल्पों की पहचान करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। उनका कहना है कि देर रात तक जागना, अधूरी नींद, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और पौष्टिक आहार का अभाव भी प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। धूम्रपान और शराब का सेवन इस जोखिम को और बढ़ा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई जोखिमों को कम किया जा सकता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
-धूम्रपान, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं।
-फास्ट फूड को सीमित मात्रा में लें और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें।
-फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं।
-रोजाना 6-8 घंटे की पर्याप्त और नियमित नींद लें।
-देर रात तक जागने से बचें।
-नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
-तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करें।