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किसानों व पुलिस की झड़प के बाद किसानों ने रोकी पदयात्रा
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दनकौर में किसानों की पदयात्रा रोकी, पुलिस के साथ झड़प
दनकौर। प्राधिकरण किसान आंदोलन संगठन से जुड़े किसानों की पदयात्रा दनकौर में ही रोक दी गई। किसानों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई। वह 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और आबादी के मामलों के निस्तारण की मांग को लेकर यमुना प्राधिकरण कार्यालय तक पदयात्रा निकाल रहे थे। एडिशनल डीसीपी विशाल पांडे और एसीपी अब्दुल कादिर ने किसानों को सात सितंबर को प्राधिकरण के सीईओ से वार्ता कराने का आश्वासन दिया है। किसानों ने मांगों को लेकर दनकौर से यमुना प्राधिकरण तक पदयात्रा करने का निर्णय लिया था। पुलिस के आला अधिकारी पदयात्रा को रोकने के लिए पिछले 5 दिन से किसानों से बातचीत कर रहे थे। पुलिस ने किसानों को डराने के लिए गिरफ्तारी के नोटिस भी भेजे थे, लेकिन बुधवार को यमुना एक्सप्रेसवे के पास एक फार्म हाउस पर किसान पदयात्रा के लिए सुबह से इकट्ठा होने शुरू हो गए। करीब 11 बजे तक सैकड़ों की संख्या में किसान पंचायत स्थल पर पहुंच गए। वहीं, सूचना मिलते ही एडिशनल डीसीपी, एसीपी दनकौर, एसीपी जेवर भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ पहुंचे। यमुना प्राधिकरण के तहसीलदार जीत राय भी मौके पर पहुंच गए। पंचायत स्थल पर सभी ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह पदयात्रा निकालने की जिद पर अड़े रहे। जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने अपने वाहन लगाकर पंचायत स्थल से कुछ दूरी पर रास्ता रोक दिया। करीब साढ़े 11 बजे किसानों ने पदयात्रा शुरू की। करीब 200 मीटर बाद पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई। पुलिस अधिकारियों ने पदयात्रा निकलाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। जिससे किसानों को पदयात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी। कुछ देर बाद आश्वासन के साथ उन्हें लौटना पड़ा।
जमकर टूटे नियम
मांगों को लेकर यमुना प्राधिकरण कार्यालय तक पदयात्रा निकाल रहे किसानों ने कोरोना काल में सामाजिक दूरी के नियम का पालन नहीं किया। इतना ही नहीं पुलिस वाले भी नियम तोड़ते दिखे। वहीं, पुलिस को भी पदयात्रा रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं, पीएसी के कई जवानों ने मास्क भी नहीं पहन रखे थे। इससे वहां कोरोना संक्रमण का खतरा बना रहा।
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दनकौर। प्राधिकरण किसान आंदोलन संगठन से जुड़े किसानों की पदयात्रा दनकौर में ही रोक दी गई। किसानों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई। वह 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और आबादी के मामलों के निस्तारण की मांग को लेकर यमुना प्राधिकरण कार्यालय तक पदयात्रा निकाल रहे थे। एडिशनल डीसीपी विशाल पांडे और एसीपी अब्दुल कादिर ने किसानों को सात सितंबर को प्राधिकरण के सीईओ से वार्ता कराने का आश्वासन दिया है। किसानों ने मांगों को लेकर दनकौर से यमुना प्राधिकरण तक पदयात्रा करने का निर्णय लिया था। पुलिस के आला अधिकारी पदयात्रा को रोकने के लिए पिछले 5 दिन से किसानों से बातचीत कर रहे थे। पुलिस ने किसानों को डराने के लिए गिरफ्तारी के नोटिस भी भेजे थे, लेकिन बुधवार को यमुना एक्सप्रेसवे के पास एक फार्म हाउस पर किसान पदयात्रा के लिए सुबह से इकट्ठा होने शुरू हो गए। करीब 11 बजे तक सैकड़ों की संख्या में किसान पंचायत स्थल पर पहुंच गए। वहीं, सूचना मिलते ही एडिशनल डीसीपी, एसीपी दनकौर, एसीपी जेवर भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ पहुंचे। यमुना प्राधिकरण के तहसीलदार जीत राय भी मौके पर पहुंच गए। पंचायत स्थल पर सभी ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह पदयात्रा निकालने की जिद पर अड़े रहे। जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने अपने वाहन लगाकर पंचायत स्थल से कुछ दूरी पर रास्ता रोक दिया। करीब साढ़े 11 बजे किसानों ने पदयात्रा शुरू की। करीब 200 मीटर बाद पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई। पुलिस अधिकारियों ने पदयात्रा निकलाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। जिससे किसानों को पदयात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी। कुछ देर बाद आश्वासन के साथ उन्हें लौटना पड़ा।
जमकर टूटे नियम
मांगों को लेकर यमुना प्राधिकरण कार्यालय तक पदयात्रा निकाल रहे किसानों ने कोरोना काल में सामाजिक दूरी के नियम का पालन नहीं किया। इतना ही नहीं पुलिस वाले भी नियम तोड़ते दिखे। वहीं, पुलिस को भी पदयात्रा रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं, पीएसी के कई जवानों ने मास्क भी नहीं पहन रखे थे। इससे वहां कोरोना संक्रमण का खतरा बना रहा।
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