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जेपी इंफ्राटेक के आईआरपी की गिरफ्तारी पर यूपी पुलिस को फटकार

Wed, 03 Mar 2021 01:32 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 01:32 AM IST
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Police reprimanded for arrest of IRP
नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा। कर्ज में डूबे जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के संचालन के लिए नियुक्त इनसॉल्वेंसी रिसोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) अनुज जैन की यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई। पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए जैन को फौरन रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही जांच अधिकारी को नोटिस देकर जवाब तलब किया है। यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा क्षेत्र में गत 23 फरवरी को सड़क हादसे के बाद दर्ज मामले में ग्रेटर नोएडा की बीटा-टू थाना पुलिस ने अनुज जैन को सोमवार को मुंबई से गिरफ्तार किया था। उन्हें ग्रेटर नोएडा लाने के बाद मंगलवार को सीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत दे दी गई।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जांच अधिकारी को कोर्ट की ओर से इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत नियुक्त आईआरपी के अधिकारों संबंधी प्रावधानों की जानकारी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुज जैन को आईबीसी के तहत जेआईएल के संचालन के लिए नियुक्त किया था। उन्हें समाधान प्रक्रिया पूरी होने तक कंपनी के सुचारु संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। बीटा-टू थाना पुलिस ने जेआईएल और अनुज जैन द्वारा आईआईटी दिल्ली द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों को 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस वे पर लागू नहीं करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।
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ई-मेल से भिजवाया रिहाई का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने ईमेल से आदेश भिजवाते हुए अनुज जैन को बिना शर्त फौरन रिहा करने का निर्देश ग्रेटर नोएडा पुलिस और संबंधित मजिस्ट्रेट को दिया। इसके अलावा न्यायमूर्ति एएम खानविलकर एवं न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की खंडपीठ ने रजिस्ट्रार जनरल (न्यायिक) को अनुज जैन की अविलंब रिहाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट को कॉल करने के लिए भी कहा।
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वकील ने दिया तर्क, विदेश भागने की आशंका थी
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील के उस जवाब पर हैरानी जताई, जिसमें कहा गया था कि जांच अधिकारी बिजेंद्र सिंह का मानना था कि आईआरपी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर भाग सकता है। इसलिए उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गिरफ्तार किया गया। खंडपीठ ने कहा कि इस आवेदन पर याचिका के रूप में सुनवाई करते हुए उचित समय पर पड़ताल की जाएगी। फिलहाल इस मामले में अगले आदेश तक आईआरपी के खिलाफ कोई भी कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश जांच अधिकारी को दिया जाता है।
दो सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल कर स्थिति से अवगत करवाएं
खंडपीठ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल कर पूरी स्थिति से अवगत कराएं। मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने अनुज जैन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी और सिद्धार्थ लूथरा की उन दलीलों पर गौर किया कि राज्य पुलिस ने आईआरपी की भूमिका, उसके कानूनी अधिकार और विशेषाधिकारों का ध्यान नहीं रखा। उन्होंने कहा, यमुना एक्सप्रेसवे पर 115 करोड़ की लागत से क्रैश बैरियर नहीं बनाने के लिए आईआरपी को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने इससे पहले छह अगस्त 2020 को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के समक्ष उन सभी अपीलों को सुनवाई के लिए मंगा लिया था, जिनमें कर्ज में डूबी जेआईए के अधिग्रहण तथा 20 हजार से अधिक फ्लैटों के निर्माण की योजना को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल व उसके समक्ष सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी ताकि आगे और विलंब न हो।
शीर्ष कोर्ट के आदेश पर कुछ घंटों बाद ही आईंआरपी रिहा
कोर्ट के आदेश पर आईआरपी अनुज जैन को कुछ घंटों बाद ही रिहा कर दिया गया। बीटा-2 थाना पुलिस ने सोमवार को मुंबई के मालाबार हिल थाना क्षेत्र के अशोका अपार्टमेंट से अनुज जैन को गिरफ्तार किया था। यीडा सीईओ के आदेश पर वरिष्ठ प्रबंधक विशेष त्यागी की तहरीर पर 24 जनवरी की देर रात एफआईआर दर्ज की गई थी। डीसीपी ग्रेटर नोएडा राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ धारा-283, 431 व 7 के अंतर्गत केस दर्ज किया गया था। मामले में आईआरपी अनुज जैन की गिरफ्तारी के लिए गुरुग्राम स्थित दफ्तर में दबिश दी गई थी, लेकिन वह फरार हो गया है। हादसे में कार सवार सात लोगों की मौत हो गई थी।
सेंट्रल वर्ज पर क्रैश बैरियर लगे होते तो टल सकता था हादसा
यमुना प्राधिकरण का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर सेंट्रल वर्ज पर क्रैश बैरियर लगे होते तो दुर्घटना टल सकती थी। प्राधिकरण का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हो रहे हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेफ्टी ऑडिट कराई गई थी, जिसमें कई सुझाव दिए गए थे। अहम है कि दिवालिया होने पर जेपी इंफ्राटेक का बोर्ड भंग हो गया। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल ने कंपनी में आईआरपी के तौर पर अनुज जैन को नियुक्त किया। सुरक्षा उपायों को पूरा कराने के लिए आईआरपी से कई बार बात की गई, लेकिन हर बार आश्वासन दिया गया। एक्सप्रेसवे पर आए दिन हो रहे हादसों के लिए यीडा ने जांच में आईआरपी अनुज जैन और गठित की गई प्रबंधन समिति को दोषी माना है। इस संबंध में बीते 4 जनवरी को भी बैठक हुई, लेकिन सुझावों पर अमल नहीं किया गया। प्राधिकरण के पूछने पर हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर टालमटोल करते रहे।
आईआईटी ने दिए थे ये सुझाव
यमुना एक्सप्रेसवे की सेफ्टी ऑडिट करने के बाद आईआईटी दिल्ली ने एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ एंट्री व एग्जिट प्वाइंट पर रंबल स्ट्रिप लगाने और एक्सप्रेसवे पर दिशा सूचक बोर्ड की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया था। साथ ही सेंट्रल वर्ज पर मेटल बैरियर लगाने की सलाह दी गई थी। ताकि वाहन चालक एक तरफ से दूसरी ओर नहीं जा सकें। इसके अलावा साइड बैरियर की ऊंचाई बढ़ाने, लेन खत्म करने, लचीले क्रैश बैरियर लगाने और चालान सिस्टम को दुरुस्त करने की सलाह दी गई थी। चालान सिस्टम को और दुरुस्त किया जाए।
अपराध बेलगाम, आईआरपी की गिरफ्तारी में दिखाई जल्दबाजी
बीटा-2 थाना पुलिस को आईआरपी अनुज जैन की मुंबई से गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार लगी है। हैरानी की बात यह है कि बीटा-2 थाना पुलिस चोरी, लूट और ठगी करने वाले बदमाशों की गिरफ्तारी में सुस्त रहने वाली पुलिस इस मामले में मुस्तैदी दिखाते देखी गई। गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस ने अपनी पीठ ठोंकनी भी शुरू कर दी थी, जबकि इसी थाना क्षेत्र में अपराधी बेलगाम है। यहां अक्सर कॉमर्शियल बेल्ट, वेनिस मॉल, ओमेक्स कनॅाट प्लेस, जगत फार्म आदि से पलक झपकते गिरोह के बदमाश वाहन चोरी कर लेते हैं। कॉमर्शियल बेल्ट में ही दफ्तर खोलकर कई लोगों को पेपर कप बनाने की मशीन के नाम पर ठगी करने वाले आरोपियों के खिलाफ मेरठ के पीड़ित थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन रिपोर्ट दर्ज तक नहीं की गई। अल्फा-2 में बुजुर्ग दंपती से लूट और हत्या की घटना भी इसी थाना क्षेत्र में हुई।
आईआरपी को मुंबई से गिरफ्तार कर हवाई जहाज से ग्रेटर नोएडा लाकर अदालत में पेश किया गया। आईआरपी के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को पूरे मामले से अवगत कराया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तत्काल जमानत दे दी गई।

राजेश कुमार सिंह, डीसीपी ग्रेटर नोएडा
यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही सेफ्टी ऑडिट कराई गई थी। उन सुझाओं पर अमल करना जरूरी है। इससे कम लोग हादसे के शिकार होंगे। इन कामों को कराने के लिए कई बार बैठक कर निर्देश दिए गए, लेकिन अमल नहीं हुआ। एफआईआर के पीछे एक ही मकसद है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा बिंदुओं पर अमल हो सके, ताकि हादसे कम किए जा सकें।
डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण
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