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सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने की तैयारी में पुलिस
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ग्रेटर नोएडा। जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के संचालन के लिए नियुक्त इनसॉल्वेंसी रिसोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) अनुज जैन की मुंबई से गिरफ्तारी के मामले में कोर्ट ने जांच अधिकारी को दो सप्ताह में हलफनामे के साथ स्थिति से अवगत कराने का आदेश दिया था। पुलिस अधिवक्ताओं की मदद से हलफनामा दाखिल करने की तैयारी में जुटी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 22 मार्च को सुनवाई होनी है लेकिन जांच अधिकारी सोमवार को ही हलफनामे के साथ अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुटे हैं।
मथुरा में हुए हादसे में सात लोगों की मौत के बाद यमुना प्राधिकरण के अधिकारी ने बीटा-2 थाने में केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने आईआरपी अनुज जैन को मुंबई से गिरफ्तार किया था। पुलिस टीम अनुज जैन से पूछताछ के बाद उन्हें हवाई जहाज से ग्रेटर नोएडा लेकर आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले मेें पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और अनुज जैन को फौरन रिहा करने का आदेश दिया था। साथ ही जांच अधिकारी को नोटिस देकर जवाब तलब किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जांच अधिकारी को कोर्ट की ओर से इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत नियुक्त आईआरपी के अधिकारों संबंधी प्रावधानों की जानकारी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील के उस जवाब पर हैरानी जताई थी, जिसमें कहा गया था कि जांच अधिकारी बिजेंद्र सिंह का मानना था कि आईआरपी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर भाग सकता है। खंडपीठ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल कर पूरी स्थिति से अवगत कराए। सूत्रों का कहना है कि जांच अधिकारी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंगे।
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मथुरा में हुए हादसे में सात लोगों की मौत के बाद यमुना प्राधिकरण के अधिकारी ने बीटा-2 थाने में केस दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने आईआरपी अनुज जैन को मुंबई से गिरफ्तार किया था। पुलिस टीम अनुज जैन से पूछताछ के बाद उन्हें हवाई जहाज से ग्रेटर नोएडा लेकर आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले मेें पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और अनुज जैन को फौरन रिहा करने का आदेश दिया था। साथ ही जांच अधिकारी को नोटिस देकर जवाब तलब किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जांच अधिकारी को कोर्ट की ओर से इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत नियुक्त आईआरपी के अधिकारों संबंधी प्रावधानों की जानकारी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील के उस जवाब पर हैरानी जताई थी, जिसमें कहा गया था कि जांच अधिकारी बिजेंद्र सिंह का मानना था कि आईआरपी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर भाग सकता है। खंडपीठ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल कर पूरी स्थिति से अवगत कराए। सूत्रों का कहना है कि जांच अधिकारी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंगे।
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