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मृत भिखारी के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचा प्लॉट, गिरफ्तार
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नोएडा। भिखारी की मौत के बाद उसके नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर प्लॉट बेचने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके कुछ साथियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी की पहचान चित्रकूट के राजापुर थानाक्षेत्र के ग्राम तीर धुमाई गगंगू बांगर निवासी धीरज कुमार उर्फ छोटू के रूप में हुई है। आरोपी किसी से मिलने आया था। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि धीरज उर्फ छोटू समेत कई लोगों गिरोह बनाकर मृतकों के नाम से जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कराते थे। इसके बाद फर्जी तरीके से प्लॉट बेचकर रजिस्ट्री तक करा देते थे। उन्होंने बताया कि सेक्टर-81 में एक भिखारी रहता था। 2013 में उसकी मौत हो गई थी। आरोपियों ने उसके प्लॉट के फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक पार्र्टी को बेच दिया था। मामले में पांच आरोपियों का नाम सामने आया था। इनमें चार आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। धीरज फरार चल रहा था। उन्होंने बताया कि फिलहाल आरोपी गेझा गांव में सोनू प्रधान के मकान में नाम बदलकर रह रहा था। गिरोह ने इस तरह से तीन से चार प्लॉटों की रजिस्ट्री कर लाखों रुपये ठगे थे।
ऑनलाइन व्यवस्था से पकड़ में आए आरोपी
एडीसीपी ने बताया कि रजिस्ट्री व्यवस्था ऑनलाइन हो गई है। फर्जी रजिस्ट्री करने के दौरान आरोपियों के फोटो रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज हो गए थे। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की तो आरोपियों के फोटो आसानी से मिल गए। इनमें से चार की पहचान कर गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने नाम, पता बदल दिया था। आरोपियों ने दाढ़ी बढ़ाकर तकरीबन भिखारी की वेशभूषा को अपना लिया था। जब खरीदार प्लॉट पर कब्जा लेने गया तो मृतक के परिजनों से मुलाकात हो गई। परिजनों ने बताया कि उसे मरे तो 7 साल हो गए। इसके बाद धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
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एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि धीरज उर्फ छोटू समेत कई लोगों गिरोह बनाकर मृतकों के नाम से जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कराते थे। इसके बाद फर्जी तरीके से प्लॉट बेचकर रजिस्ट्री तक करा देते थे। उन्होंने बताया कि सेक्टर-81 में एक भिखारी रहता था। 2013 में उसकी मौत हो गई थी। आरोपियों ने उसके प्लॉट के फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक पार्र्टी को बेच दिया था। मामले में पांच आरोपियों का नाम सामने आया था। इनमें चार आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। धीरज फरार चल रहा था। उन्होंने बताया कि फिलहाल आरोपी गेझा गांव में सोनू प्रधान के मकान में नाम बदलकर रह रहा था। गिरोह ने इस तरह से तीन से चार प्लॉटों की रजिस्ट्री कर लाखों रुपये ठगे थे।
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ऑनलाइन व्यवस्था से पकड़ में आए आरोपी
एडीसीपी ने बताया कि रजिस्ट्री व्यवस्था ऑनलाइन हो गई है। फर्जी रजिस्ट्री करने के दौरान आरोपियों के फोटो रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज हो गए थे। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की तो आरोपियों के फोटो आसानी से मिल गए। इनमें से चार की पहचान कर गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने नाम, पता बदल दिया था। आरोपियों ने दाढ़ी बढ़ाकर तकरीबन भिखारी की वेशभूषा को अपना लिया था। जब खरीदार प्लॉट पर कब्जा लेने गया तो मृतक के परिजनों से मुलाकात हो गई। परिजनों ने बताया कि उसे मरे तो 7 साल हो गए। इसके बाद धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
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