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Noida News: यौन उत्पीड़न पर एफआईआर दर्ज कराने की याचिका खारिज
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-महिला का आरोप था, आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके उसका यौन शोषण किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने पुलिस को एक व्यक्ति के खिलाफ यौन उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि महिला ने अदालत में आने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने की।
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपी ने 2021 में आईजीआई हवाई अड्डे के पास एक होटल में शादी का झूठा वादा कर उसके साथ गलत संबंध बनाए और उसके बाद से लगातार उसे धमकियां दीं।अदालत ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने यह नहीं बताया कि थाना प्रभारी (एसएचओ) द्वारा कार्रवाई न करने पर उसने अपने मामले को पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) तक पहुंचाया या नहीं। महिला ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173(4) में बताई गई अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया। यह धारा यह प्रावधान करती है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट दर्ज नहीं करता तो शिकायतकर्ता को वरिष्ठ अधिकारी को सूचना देने का अधिकार होता है। चूंकि महिला ने ऐसा नहीं किया, इसलिए अदालत ने उसकी याचिका को स्वीकार्य नहीं बताते हुए खारिज कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने पुलिस को एक व्यक्ति के खिलाफ यौन उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि महिला ने अदालत में आने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने की।
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपी ने 2021 में आईजीआई हवाई अड्डे के पास एक होटल में शादी का झूठा वादा कर उसके साथ गलत संबंध बनाए और उसके बाद से लगातार उसे धमकियां दीं।अदालत ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने यह नहीं बताया कि थाना प्रभारी (एसएचओ) द्वारा कार्रवाई न करने पर उसने अपने मामले को पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) तक पहुंचाया या नहीं। महिला ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173(4) में बताई गई अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया। यह धारा यह प्रावधान करती है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट दर्ज नहीं करता तो शिकायतकर्ता को वरिष्ठ अधिकारी को सूचना देने का अधिकार होता है। चूंकि महिला ने ऐसा नहीं किया, इसलिए अदालत ने उसकी याचिका को स्वीकार्य नहीं बताते हुए खारिज कर दिया।
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