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Noida News: धमाके में घायल हुए लोगों को सुनने में आ रही दिक्कत
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तीन दिन बाद भी घायलों की हालत पूरी तरह स्थिर नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लाल किला धमाके के तीन दिन बाद भी घायलों की हालत पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। कई घायलों सुनने में दिक्कत, कान में दर्द और लगातार आवाज (टिनिटस) की समस्या हो रही है। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास मौजूद लोगों के कानों पर सीधा असर पड़ा।
एलएनजेपी अस्पताल में अभी कई घायल भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मरीजों के कानों के पर्दे फट गए हैं जबकि कई को अस्थायी सुनने की समस्या है। चेन्नई के मोहम्मद सफवान (28) ने बताया कि धमाके के तुरंत बाद दोनों कान बजने लगे और अब लगातार दर्द हो रहा है। वहीं, यूपी के शिवा जायसवाल (28) को कम सुनाई दे रहा है और उनके चेहरे, हाथ व पैरों पर जलने के निशान हैं।
इधर, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. देविंदर राय ने कहा कि इस तरह के शक्तिशाली धमाकों से कानों पर काफी गहरा असर होता है। कुछ लोगों में शोर के झटके को सहने की क्षमता कम होती है जिससे सुनने की शक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। घायलों को जल्द सामान्य सुनने की क्षमता वापस पाने में कई हफ्ते लग सकते हैं जबकि कुछ मामलों में स्थायी नुकसान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लाल किला धमाके के तीन दिन बाद भी घायलों की हालत पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। कई घायलों सुनने में दिक्कत, कान में दर्द और लगातार आवाज (टिनिटस) की समस्या हो रही है। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास मौजूद लोगों के कानों पर सीधा असर पड़ा।
एलएनजेपी अस्पताल में अभी कई घायल भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मरीजों के कानों के पर्दे फट गए हैं जबकि कई को अस्थायी सुनने की समस्या है। चेन्नई के मोहम्मद सफवान (28) ने बताया कि धमाके के तुरंत बाद दोनों कान बजने लगे और अब लगातार दर्द हो रहा है। वहीं, यूपी के शिवा जायसवाल (28) को कम सुनाई दे रहा है और उनके चेहरे, हाथ व पैरों पर जलने के निशान हैं।
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इधर, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. देविंदर राय ने कहा कि इस तरह के शक्तिशाली धमाकों से कानों पर काफी गहरा असर होता है। कुछ लोगों में शोर के झटके को सहने की क्षमता कम होती है जिससे सुनने की शक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। घायलों को जल्द सामान्य सुनने की क्षमता वापस पाने में कई हफ्ते लग सकते हैं जबकि कुछ मामलों में स्थायी नुकसान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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