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Noida News: सपेरे समुदाय को कब्रिस्तान के लिए मिली जमीन के विरोध में आए लोग
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-स्पष्ट कहा, जमीन आबादी के नजदीक, नहीं बनने देंगे कब्रिस्तान
संवाद न्यूज एजेंसी
दनकौर। रीलखा गांव में कब्रिस्तान के लिए सपेरा समाज को मिली जमीन के लिए विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को प्राधिकरण द्वारा 2200 वर्ग मीटर जमीन सपेरा समाज को कब्रिस्तान के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन मंगलवार को गांव में हुई पंचायत के बाद अन्य समाज के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
उनका कहना है कि यह जमीन आबादी क्षेत्र के बेहद नजदीक है और वे अपने घरों के पास सपेरों का कब्रिस्तान नहीं बनने देंगे। चेतावनी दी कि वे इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे और ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे। इस बीच विवाद और विरोध से पहले सोमवार को सपेरा समाज के लोगों ने उसी जमीन पर एक वृद्ध महिला के शव को दफना भी दिया था। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। लेकिन मामले को शांत कराने के लिए पुलिस की मौजूदगी गांव में बनी हुई है। दनकौर कोतवाली पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कब्रिस्तान बनने से ऐतराज नहीं है, लेकिन वह आबादी से दूर बनाया जाए। वहीं, सपेरा समाज के लोग जमीन के आवंटन पर अडिग हैं। वह चाहते हैं कि अब जब अंतिम संस्कार हो चुका है तो यहीं पर कब्रिस्तान विकसित किया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दनकौर। रीलखा गांव में कब्रिस्तान के लिए सपेरा समाज को मिली जमीन के लिए विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को प्राधिकरण द्वारा 2200 वर्ग मीटर जमीन सपेरा समाज को कब्रिस्तान के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन मंगलवार को गांव में हुई पंचायत के बाद अन्य समाज के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
उनका कहना है कि यह जमीन आबादी क्षेत्र के बेहद नजदीक है और वे अपने घरों के पास सपेरों का कब्रिस्तान नहीं बनने देंगे। चेतावनी दी कि वे इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे और ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे। इस बीच विवाद और विरोध से पहले सोमवार को सपेरा समाज के लोगों ने उसी जमीन पर एक वृद्ध महिला के शव को दफना भी दिया था। प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। लेकिन मामले को शांत कराने के लिए पुलिस की मौजूदगी गांव में बनी हुई है। दनकौर कोतवाली पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कब्रिस्तान बनने से ऐतराज नहीं है, लेकिन वह आबादी से दूर बनाया जाए। वहीं, सपेरा समाज के लोग जमीन के आवंटन पर अडिग हैं। वह चाहते हैं कि अब जब अंतिम संस्कार हो चुका है तो यहीं पर कब्रिस्तान विकसित किया जाए।
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