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नौ घंटे जिला अस्पताल में भटका मरीज, इलाज में देरी से मौत
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नोएडा। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही एक मरीज की जिंदगी पर भारी पड़ गई। बृहस्पतिवार को दिल्ली से आए प्रकाश (35) की इलाज में देरी से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ओपीडी कक्ष नंबर-5 में मौजूद महिला डॉक्टर ने इलाज करने की जगह मरीज को धक्का मारकर बाहर धकेल दिया। आठ घंटे तक दर्द से कराहते प्रकाश को लेकर परिजन अस्पताल में भटकते रहे और दोपहर करीब दो बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
बदरपुर स्थित अलीगांव निवासी प्रकाश को पेशाब में रुकावट होने के कारण काफी तकलीफ हो रही थी। इस कारण परिजन सुबह करीब पांच बजे जिला अस्पताल लेकर आ गए। चचेरे भाई सुरेश ने बताया कि इमरजेंसी के डॉक्टरों ने फिजिशियन ओपीडी में जाने की सलाह दी। तीन घंटे इंतजार करने के बाद सुबह आठ बजे पंजीकरण कराकर ओपीडी कक्ष नंबर-5 में पहुंच गए। जब नंबर आया तो ओपीडी में मौजूद महिला डॉक्टर ने मरीज को देखने से इनकार कर दिया। आरोप है कि विरोध करने पर प्रकाश को धक्के देकर बाहर निकाल दिया।
अस्पताल प्रबंधन तक शिकायत पहुंचने पर मरीज को सर्जन डॉक्टर की ओपीडी में भेजा गया। यहां डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा तो परिजन प्रकाश को रेडियोलॉजी विभाग में ले आए, लेकिन यहां 19 अगस्त की तारीख देकर लौटने के लिए कहा गया। काफी मिन्नत के बाद दोपहर एक बजे अल्ट्रासाउंड किया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने पेशाब की नली लगाकर घर लौटने को कहा। इस बीच मरीज की हालात बिगड़ती गई। उसे रेफर भी नहीं किया गया और न ही एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई। मरीज इमरजेंसी के बाहर दर्द से तड़पता रहा। उसे किसी अन्य अस्पताल ले जाने के लिए परिजन वाहन का बंदोबस्त कर लौटे तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिजनों ने काफी देर तक हंगामा किया।
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बच्चों को पढ़ाने की जिद ले आई दिल्ली
प्रकाश मूलरूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के रहने वाले थे। अपने 13 वर्षीय बेटे और आठ व तीन वर्षीय दो बेटियों को पढ़ाने की जिद उन्हें कुछ साल पहले दिल्ली लेकर आ गई। प्रकाश अलीगांव में किराये का मकान लेकर कैब चलाकर बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने की कोशिश में जुटे थे। पत्नी सरिता का रो-रोकर बुरा है।
बेहतर उपचार की आस में पहुंचे थे नोएडा
परिजनों ने बताया कि प्रकाश कई दिनों से बीमार थे। सफदरजंग अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार रात को तबियत बिगड़ने पर परिजन उन्हें सफदरजंग ले जाना चाहते थे, लेकिन प्रकाश जिला अस्पताल ले जाने की जिद करने लगे। कुछ समय पहले प्रकाश की पत्नी का हाथ टूटने पर जिला अस्पताल में सफल उपचार हुआ था। बेहतर उपचार की आस प्रकाश को जिला अस्पताल लेकर आ गई।
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बदरपुर स्थित अलीगांव निवासी प्रकाश को पेशाब में रुकावट होने के कारण काफी तकलीफ हो रही थी। इस कारण परिजन सुबह करीब पांच बजे जिला अस्पताल लेकर आ गए। चचेरे भाई सुरेश ने बताया कि इमरजेंसी के डॉक्टरों ने फिजिशियन ओपीडी में जाने की सलाह दी। तीन घंटे इंतजार करने के बाद सुबह आठ बजे पंजीकरण कराकर ओपीडी कक्ष नंबर-5 में पहुंच गए। जब नंबर आया तो ओपीडी में मौजूद महिला डॉक्टर ने मरीज को देखने से इनकार कर दिया। आरोप है कि विरोध करने पर प्रकाश को धक्के देकर बाहर निकाल दिया।
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अस्पताल प्रबंधन तक शिकायत पहुंचने पर मरीज को सर्जन डॉक्टर की ओपीडी में भेजा गया। यहां डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा तो परिजन प्रकाश को रेडियोलॉजी विभाग में ले आए, लेकिन यहां 19 अगस्त की तारीख देकर लौटने के लिए कहा गया। काफी मिन्नत के बाद दोपहर एक बजे अल्ट्रासाउंड किया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने पेशाब की नली लगाकर घर लौटने को कहा। इस बीच मरीज की हालात बिगड़ती गई। उसे रेफर भी नहीं किया गया और न ही एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई। मरीज इमरजेंसी के बाहर दर्द से तड़पता रहा। उसे किसी अन्य अस्पताल ले जाने के लिए परिजन वाहन का बंदोबस्त कर लौटे तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिजनों ने काफी देर तक हंगामा किया।
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बच्चों को पढ़ाने की जिद ले आई दिल्ली
प्रकाश मूलरूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के रहने वाले थे। अपने 13 वर्षीय बेटे और आठ व तीन वर्षीय दो बेटियों को पढ़ाने की जिद उन्हें कुछ साल पहले दिल्ली लेकर आ गई। प्रकाश अलीगांव में किराये का मकान लेकर कैब चलाकर बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने की कोशिश में जुटे थे। पत्नी सरिता का रो-रोकर बुरा है।
बेहतर उपचार की आस में पहुंचे थे नोएडा
परिजनों ने बताया कि प्रकाश कई दिनों से बीमार थे। सफदरजंग अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार रात को तबियत बिगड़ने पर परिजन उन्हें सफदरजंग ले जाना चाहते थे, लेकिन प्रकाश जिला अस्पताल ले जाने की जिद करने लगे। कुछ समय पहले प्रकाश की पत्नी का हाथ टूटने पर जिला अस्पताल में सफल उपचार हुआ था। बेहतर उपचार की आस प्रकाश को जिला अस्पताल लेकर आ गई।