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Noida News: दर्द घुटने में और कर दिया डेंगू का इलाज
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दर्द घुटने में और कर दिया डेंगू का इलाज
आईएचआईपी पोर्टल पर बढ़ रहे डेंगू मरीजों के आंकड़े की जांच से खुलासा
स्वास्थ्य विभाग ने तीन निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर मांगा स्पष्टीकरण
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ग्रेटर नोएडा के सलेमपुर निवासी 53 वर्षीय मिथिलेश को जनवरी में एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया था। यहां कागजों में ही मरीज का डेंगू का उपचार कर दिया गया। रैपिड जांच मान्य नहीं होने पर भी इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफोर्मेशन प्लेटफॉर्म (आईएचआईपी) पर डेंगू पुष्टि होने की रिपोर्ट अपलोड कर दी गई। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग ने जांच की तो परिजनों ने बताया कि मरीज को डेंगू हुआ ही नहीं था। घुटने में दर्द होने पर उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था।
निजी अस्पतालों की लापरवाही का यह अकेला मामला नहीं है बल्कि जांच में ऐसे कई गड़बड़झाले सामने आए हैं। अब तक ग्रेटर नोएडा के दो और नोएडा के एक नामचीन अस्पताल के कारनामे की जानकारी स्वास्थ्य विभाग जुटा चुका है। इन तीनों अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। दरअसल, संचारी रोग नियंत्रण के लिए शासन स्तर पर आईएचआईपी पोर्टल पर डेंगू मरीजों की रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। पहले मलेरिया विभाग निजी अस्पतालों से जानकारी जुटाकर शासन को भेजता था। अब पोर्टल के माध्यम से सीधे निजी अस्पताल रिपोर्ट अपलोड कर रहे हैं। निजी अस्पतालों की लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब पोर्टल पर गौतमबुद्धनगर में इस साल डेंगू मरीजों की संख्या 169 दिखाई गई। विभाग ने क्रॉस चेकिंग की कार्रवाई शुरू की तो निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर चल रहे खेल का पता चला। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि सभी 169 मामलों की जांच की जा रही है। केवल एलाइजा जांच के आधार पर ही डेंगू की पुष्टि की जाती है।
परिजन बोले- हमें तो डेंगू के बारे में बताया ही नहीं
लापरवाही का दूसरा मामला भी ग्रेटर नोएडा के नामचीन अस्पताल से जुड़ा है। 77 वर्षीय लक्ष्मी देवी को 19 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल ने रैपिड जांच के आधार पर डेंगू की पुष्टि कर पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड कर दी। मलेरिया विभाग ने जांच की तो पता चला कि महिला को टीबी, शुगर, चेस्ट इंफेक्शन जैसी कई बीमारी है। अस्पताल मरीज को आईसीयू में रखकर बिल बढ़ाता जा रहा है। डेंगू के बारे में कोई जानकारी तक नहीं दी है।
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हर साल डेंगू के सीजन में निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मरीजों की जेब हल्की करते हैं। इस बार तो बिना सीजन के ही अस्पतालों ने डेंगू फैलाना शुरू कर दिया है। सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट के आधार पर डेंगू बताकर अस्पताल मरीज-तीमारदारों की जेब पर बोझ डाल रहे हैं।
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आईएचआईपी पोर्टल पर बढ़ रहे डेंगू मरीजों के आंकड़े की जांच से खुलासा
स्वास्थ्य विभाग ने तीन निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर मांगा स्पष्टीकरण
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ग्रेटर नोएडा के सलेमपुर निवासी 53 वर्षीय मिथिलेश को जनवरी में एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया था। यहां कागजों में ही मरीज का डेंगू का उपचार कर दिया गया। रैपिड जांच मान्य नहीं होने पर भी इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफोर्मेशन प्लेटफॉर्म (आईएचआईपी) पर डेंगू पुष्टि होने की रिपोर्ट अपलोड कर दी गई। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग ने जांच की तो परिजनों ने बताया कि मरीज को डेंगू हुआ ही नहीं था। घुटने में दर्द होने पर उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था।
निजी अस्पतालों की लापरवाही का यह अकेला मामला नहीं है बल्कि जांच में ऐसे कई गड़बड़झाले सामने आए हैं। अब तक ग्रेटर नोएडा के दो और नोएडा के एक नामचीन अस्पताल के कारनामे की जानकारी स्वास्थ्य विभाग जुटा चुका है। इन तीनों अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। दरअसल, संचारी रोग नियंत्रण के लिए शासन स्तर पर आईएचआईपी पोर्टल पर डेंगू मरीजों की रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। पहले मलेरिया विभाग निजी अस्पतालों से जानकारी जुटाकर शासन को भेजता था। अब पोर्टल के माध्यम से सीधे निजी अस्पताल रिपोर्ट अपलोड कर रहे हैं। निजी अस्पतालों की लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब पोर्टल पर गौतमबुद्धनगर में इस साल डेंगू मरीजों की संख्या 169 दिखाई गई। विभाग ने क्रॉस चेकिंग की कार्रवाई शुरू की तो निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर चल रहे खेल का पता चला। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि सभी 169 मामलों की जांच की जा रही है। केवल एलाइजा जांच के आधार पर ही डेंगू की पुष्टि की जाती है।
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परिजन बोले- हमें तो डेंगू के बारे में बताया ही नहीं
लापरवाही का दूसरा मामला भी ग्रेटर नोएडा के नामचीन अस्पताल से जुड़ा है। 77 वर्षीय लक्ष्मी देवी को 19 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल ने रैपिड जांच के आधार पर डेंगू की पुष्टि कर पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड कर दी। मलेरिया विभाग ने जांच की तो पता चला कि महिला को टीबी, शुगर, चेस्ट इंफेक्शन जैसी कई बीमारी है। अस्पताल मरीज को आईसीयू में रखकर बिल बढ़ाता जा रहा है। डेंगू के बारे में कोई जानकारी तक नहीं दी है।
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हर साल डेंगू के सीजन में निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मरीजों की जेब हल्की करते हैं। इस बार तो बिना सीजन के ही अस्पतालों ने डेंगू फैलाना शुरू कर दिया है। सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट के आधार पर डेंगू बताकर अस्पताल मरीज-तीमारदारों की जेब पर बोझ डाल रहे हैं।