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Greater Noida: सीए का सामान हड़पकर चार लाख की फिरौती मांग रहे पैकर्स एंड मूवर्स, केस दर्ज

Sun, 10 Jul 2022 06:51 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 10 Jul 2022 06:51 AM IST
सार

सीए अविनाश कुमार और उनके दोस्त ने जस्ट डायल से नंबर लेकर पैकर्स एंड मूवर्स को कॉल की थी। सामान बोकारो पहुंचाने की बात 20 हजार रुपये में तय हुई। दो माह बीत जाने के बाद भी सामान वहां नहीं पहुंचा। आरोपी सामान पहुंचाने के एवज में चार लाख रुपये की फिरौती मांग रहे हैं।

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Packers and movers demanding ransom of four lakhs by grabbing CAs goods
up police demo - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

ग्रेनो वेस्ट निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट ने पैकर्स एंड मूवर्स से घर का सारा सामन बोकारो भेजा। कंपनी ने सात मई को सामान पहुंचाने का वादा किया था। दो माह बीत जाने के बाद उनका सामान बोकारो नहीं पहुंचा। आरोपी सामान पहुंचाने के एवज में चार लाख रुपये की फिरौती मांग रहे हैं। सीए की शिकायत पर बिसरख कोतवाली में नंदनगरी दिल्ली निवासी आनंदी, गाजियाबाद के संदीप कुमार, दीपक, भावेश मिश्रा, राकेश झा, जस्ट  डायल के कर्मचारी, विमल, विनय और जनता पैकर्स एंड मूवर्स आईटी एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है।

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ईकोविलेज-3 सोसाइटी में रहने वाले सीए अविनाश कुमार और उनके दोस्त ने जस्ट डायल से नंबर लेकर पैकर्स एंड मूवर्स को कॉल की थी। उन्होंने ग्रेनो वेस्ट से झारखंड के बोकारो शिफ्ट करना था। जनता पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी से संपर्क करने पर विमल व राकेश नाम के आरोपियों ने उनसे बात की। सामान पहुंचाने की बात 20 हजार रुपये में तय हुई। इसमें 15 हजार रुपये नकद दिया गया और पांच हजार डिलीवरी के समय देने की बात हुई। सामान पैक कर 30 अप्रैल को झारखंड के लिए रवाना कर दिया गया। लेकिन दो माह बाद भी घर का सारा सामान, कार, स्कूटर, लैपटॉप अब तक बोकारो नहीं पहुंचा। आरोपी सामान पहुंचाने की एवज में ब्लैकमेल करने लगे। उन्होंने पांच मई को सात हजार व आठ मई को पांच हजार रुपये आरोपियों के खाते में ऑनलाइन हस्तांतरित किया गया। इसके बाद आरोपी अब चार लाख रुपये की फिरौती मांग रहे हैं।

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एनआईए के लिए कर चुके हैं काम 
अविनाश ने बताया कि पहले वह एनटीपीसी और नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) के लिए काम कर चुके हैं। दोनों संस्थाओं के साथ कार्य करने के दौरान उन्होंने करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इनमें से कई मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित चल रहे हैं। इन केसों से जुड़े दस्तावेज भी उसके सामान में मौजूद हैं।
 
फर्जी साइट से बनाया निशाना 
पीड़ित ने आरोपियों की वेबसाइट के संबंध में मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर की वेबसाइट पर संपर्क किया गया तो पता चला कि वहां इस नाम की कोई वेबसाइट पंजीकृत नहीं है। पीड़ित ने इस मामले में झारखंड, दिल्ली व यूपी पुलिस से संपर्क कर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। लेकिन अब जाकर बिसरख कोतवाली पुलिस ने मामूली धारा में केस दर्ज किया है। वहीं कोरोना संक्रमण की वजह से अविनाश के पिता की मृत्यु हो गई थी। इसी वजह से उन्होंने ग्रेनो से और बोकारो शिफ्ट होने का फैसला लिया था।

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