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Noida News: बॉक्सिंग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजकोें पर कर्ज का संकट
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बॉक्सिंग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजकोें पर कर्ज का संकट
- अमेरिका तक से आई कॉल, मिले आश्वासन, नहीं मिले स्पॉन्सर
- आयोजन में दो दिन शेष, खर्च में भी करनी पड़ सकती है कटौती
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिले में सैकड़ों उद्योग, बिल्डर होने के बावजूद सब जूनियर बालक व बालिका राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के आयोजकों पर कर्ज लेने का संकट आ गया है। प्रतियोगिता शुरू होने में दो दिन शेष हैं, 18 मार्च को खिलाड़़ी शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंच जाएंगे। इसके बावजूद अब तक प्रतियोगिता के लिए स्पाॅन्सर नहीं मिले हैं। हालांकि अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद कई लोगों से आयोजकों की बात हुई है। अमेरिका से भी मदद की कॉल आई है। लेकिन बजट का बंदोबस्त न होने से आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आयोजकों के मुताबिक, 19 से 23 मार्च तक होने वाली प्रतियोगिता में लगभग 1.75 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। लेकिन बॉक्सिंग फेडरेशन से केवल 15 लाख रुपये ही मिले हैं। इसके अलावा सरकार व कुछ अन्य जगह से लगभग 60 लाख रुपये का बंदोबस्त होने का अनुमान है। लेकिन शेष के लिए आयोजक अभी भी स्पाॅन्सर की तलाश में हैं। हाल ही में सादुल्लापुर गांव में हुए दंगल में आयोजकों की राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र सिंह नागर से इस संबंध में वार्ता हुई थी। शनिवार को दुजाना गांव में इंडोर जिम के उद्घाटन के मौके पर भी आयोजकों ने सुरेंद्र नागर से वार्ता की। सुरेंद्र नागर ने इस संबंध में ग्रेनो प्राधिकरण के अधिकारियों से वार्ता कर आश्वासन दिया है। इसके अलावा यूपी बॉक्सिंग फेडरेशन के सचिव प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके बेटे के दोस्त को प्रतियोगिता के लिए स्पाॅन्सर न मिलने की जानकारी हुई तो उन्होने अमेरिका से कॉल की, कहा कि वह इस संबंध में देश में मौजूद अन्य लोगों से संपर्क करेंगे। ऐसे में आयोजकों को प्रतियोगिता कराने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है। इन सबके बावजूद प्रतियोगिता की तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। इंडोर स्टेडियम का निरीक्षण करने के बाद बालक-बालिका खिलाड़ियों के रुकने आदि के लिए होटल आदि की बुकिंग कर निरीक्षण किया गया है।
खर्च में कटौती से सुविधाएं होंगी कम
अगर स्पाॅन्सर व बजट का बंदोबस्त नहीं हो पाता है, तो आयोजक को कर्ज लेने के साथ खर्च में भी कटौती कर सकते हैं। किस खर्च में कटौती की जाए। इस पर भी आयोजक विचार कर रहे हैं। लेकिन यह तय है कि अगर खर्च में कटौती की जाती है, तो खिलाड़ियों या दर्शकों को मिलने वाली सुविधाओं में भी कमी आ सकती है।
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- अमेरिका तक से आई कॉल, मिले आश्वासन, नहीं मिले स्पॉन्सर
- आयोजन में दो दिन शेष, खर्च में भी करनी पड़ सकती है कटौती
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिले में सैकड़ों उद्योग, बिल्डर होने के बावजूद सब जूनियर बालक व बालिका राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के आयोजकों पर कर्ज लेने का संकट आ गया है। प्रतियोगिता शुरू होने में दो दिन शेष हैं, 18 मार्च को खिलाड़़ी शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंच जाएंगे। इसके बावजूद अब तक प्रतियोगिता के लिए स्पाॅन्सर नहीं मिले हैं। हालांकि अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद कई लोगों से आयोजकों की बात हुई है। अमेरिका से भी मदद की कॉल आई है। लेकिन बजट का बंदोबस्त न होने से आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आयोजकों के मुताबिक, 19 से 23 मार्च तक होने वाली प्रतियोगिता में लगभग 1.75 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। लेकिन बॉक्सिंग फेडरेशन से केवल 15 लाख रुपये ही मिले हैं। इसके अलावा सरकार व कुछ अन्य जगह से लगभग 60 लाख रुपये का बंदोबस्त होने का अनुमान है। लेकिन शेष के लिए आयोजक अभी भी स्पाॅन्सर की तलाश में हैं। हाल ही में सादुल्लापुर गांव में हुए दंगल में आयोजकों की राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र सिंह नागर से इस संबंध में वार्ता हुई थी। शनिवार को दुजाना गांव में इंडोर जिम के उद्घाटन के मौके पर भी आयोजकों ने सुरेंद्र नागर से वार्ता की। सुरेंद्र नागर ने इस संबंध में ग्रेनो प्राधिकरण के अधिकारियों से वार्ता कर आश्वासन दिया है। इसके अलावा यूपी बॉक्सिंग फेडरेशन के सचिव प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके बेटे के दोस्त को प्रतियोगिता के लिए स्पाॅन्सर न मिलने की जानकारी हुई तो उन्होने अमेरिका से कॉल की, कहा कि वह इस संबंध में देश में मौजूद अन्य लोगों से संपर्क करेंगे। ऐसे में आयोजकों को प्रतियोगिता कराने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है। इन सबके बावजूद प्रतियोगिता की तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। इंडोर स्टेडियम का निरीक्षण करने के बाद बालक-बालिका खिलाड़ियों के रुकने आदि के लिए होटल आदि की बुकिंग कर निरीक्षण किया गया है।
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खर्च में कटौती से सुविधाएं होंगी कम
अगर स्पाॅन्सर व बजट का बंदोबस्त नहीं हो पाता है, तो आयोजक को कर्ज लेने के साथ खर्च में भी कटौती कर सकते हैं। किस खर्च में कटौती की जाए। इस पर भी आयोजक विचार कर रहे हैं। लेकिन यह तय है कि अगर खर्च में कटौती की जाती है, तो खिलाड़ियों या दर्शकों को मिलने वाली सुविधाओं में भी कमी आ सकती है।
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